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बामनौली में चकबंदी से आहत दो सगे भाई टॉवर पर चढ़े
Updated Thu, 21 Jun 2018 01:24 AM IST
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दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में चकबंदी प्रक्रिया से आहत दो सगे भाई बीएसएनएल के टॉवर पर चढ़ गए। टॉवर के नीचे दोनों किसानों के परिजन के सदस्यों ने धरना शुरू कर दिया है। एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार द्विवेदी ने टावर पर चढ़ कर बैठे किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी। उजाड़ी गई फसल का मुआवजा मिलेगा। एसओसी अजय उपाध्यक्ष द्वारा दिए गए फर्जी आदेश पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। इस आश्वासन पर किसान संतुष्ट हो गए और साढ़े नौ घंटे बाद दोनों किसान टावर से नीचे उतर आए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे फिर से टावर पर चढ़ जाएंगे।
बामनौली गांव निवासी किसान कृष्णपाल और सुक्रमपाल पुत्र ब्रहम स्वरूप बुधवार सुबह नौ बजे अपने-अपने परिवार के साथ गांव में बीएसएनएल टावर के पास पहुंचे। दोनों भाई एक सौ फुट ऊंचे टावर पर चढ़ गए और नीचे जमीन पर दोनों के परिवार धरना देकर बैठ गए। सूचना पर एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार द्विवेदी, दोघट एसओ चितवन कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं माने। किसानों के परिजनों ने बताया कि चकबंदी में उन्हें गांव के एक किसान के खेत के पास आठ बीघा जमीन मिली। जिस पर उनका कब्जा है और उन्होंने गन्ने की फसल की बुवाई कर रखी है।
मंगलवार को कानूनगो आनंद प्रकाश पड़ोसी खेत मालिक की भूमि की पैमाइश करने पहुंचे। कानूनगो ने दोनों भाइयों की आठ बीघा जमीन की पैमाइश पड़ोसी की भूमि में कर दी। निशानदेही कर वे वापस चले गए। उनके जाते ही पड़ोसी किसान ने उनकी आठ बीघा जमीन में ट्रैक्टर चलाकर गन्ने की फसल को बर्बाद कर दिया। दोनों भाइयों ने इसका विरोध भी किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस भी नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी जमीन वापस नहीं दी जाती और बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक वे नीचे नहीं उतरेंगे। परिजनों ने बताया डीडीसी ने सितंबर 2017 को चक बनाकर फाइनल कर दिया, लेकिन 18 अप्रैल 2018 को एसओसी ने बिना नोटिस दिए, चक में फेरबदल कर दी। डीडीसी की सुनवाई के बाद एसओसी को चकों में फेरबदल करने का कोई अधिकार नहीं है। आठ घंटे बाद भी किसान टावर से नीचे नहीं उतरे। उन्होंने कहा यदि उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे टावर पर ही भूखे-प्यासे मर जाएंगे। पुलिस अधिकारी दोनों किसानों को मनाने में जुटे हैं। शाम के समय अफसरों के समझाने पर किसान टावर से उतर गए।
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सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं परिवार
दोघट (बागपत)। बामनौली में किसान सुक्रम पाल की पत्नी विमलेश, बेटे रूपेश, हितैश, पौत्री वैशाली और पौत्र विशाल, कृष्णपाल की पत्नी सुरेश वती धरने पर बैठे हैं। सुक्रम पाल के दोनों पौत्र दिव्यांग हैं। परिवार की महिलाएं और बच्चे भी सुबह से ही भूख-प्यासे हैं। उनका कहना है कि इंसाफ मिलने तक इस तरह धरने पर बैठेंगे।
किसान कृष्णपाल कर चुका है आत्महत्या
दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में 37 साल से चल रही चकबंदी प्रक्रिया ने किसानों को तोड़कर रखा। पिछले वर्ष नवंबर माह में चकबंदी से आहत होकर किसान कृष्णपाल ने आत्महत्या कर ली । इसके बाद भी शासन-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। चकबंदी अधिकारी आए दिन गांव में कभी किसी की तो कभी किसी किसान की भूमि की पैमाइश करने आ जाते हैं, लेकिन एक किसान की भूमि पूरी हो जाती है तो दूसरे किसान की घट जाती है। अधिकारी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
तीसरी बार किसान टावर पर चढ़े
दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में टावर पर चढ़ने का यह पहले मामला नहीं है। 15 दिन पहले चकबंदी से आहत होकर किसान राम कुमार भी टावर पर चढ़ा । अधिकारियों के आश्वासन पर नीचे उतारा । पिछले वर्ष भी किसान सहेंद्र गन्ना भुगतान के लिए टावर पर चढ़ गया । दो माह पहले कई किसानों ने कृष्णा नदी में जल समाधि लेने की कोशिश की , पुलिस ने उन्हें रोका। एक किसान ने मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया , लेकिन उसे ग्रामीणों ने बचा लिया। किसान कलक्ट्रेट बागपत से लेकर लखनऊ तक धरने और प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन आज तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
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बामनौली गांव निवासी किसान कृष्णपाल और सुक्रमपाल पुत्र ब्रहम स्वरूप बुधवार सुबह नौ बजे अपने-अपने परिवार के साथ गांव में बीएसएनएल टावर के पास पहुंचे। दोनों भाई एक सौ फुट ऊंचे टावर पर चढ़ गए और नीचे जमीन पर दोनों के परिवार धरना देकर बैठ गए। सूचना पर एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार द्विवेदी, दोघट एसओ चितवन कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं माने। किसानों के परिजनों ने बताया कि चकबंदी में उन्हें गांव के एक किसान के खेत के पास आठ बीघा जमीन मिली। जिस पर उनका कब्जा है और उन्होंने गन्ने की फसल की बुवाई कर रखी है।
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मंगलवार को कानूनगो आनंद प्रकाश पड़ोसी खेत मालिक की भूमि की पैमाइश करने पहुंचे। कानूनगो ने दोनों भाइयों की आठ बीघा जमीन की पैमाइश पड़ोसी की भूमि में कर दी। निशानदेही कर वे वापस चले गए। उनके जाते ही पड़ोसी किसान ने उनकी आठ बीघा जमीन में ट्रैक्टर चलाकर गन्ने की फसल को बर्बाद कर दिया। दोनों भाइयों ने इसका विरोध भी किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस भी नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी जमीन वापस नहीं दी जाती और बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक वे नीचे नहीं उतरेंगे। परिजनों ने बताया डीडीसी ने सितंबर 2017 को चक बनाकर फाइनल कर दिया, लेकिन 18 अप्रैल 2018 को एसओसी ने बिना नोटिस दिए, चक में फेरबदल कर दी। डीडीसी की सुनवाई के बाद एसओसी को चकों में फेरबदल करने का कोई अधिकार नहीं है। आठ घंटे बाद भी किसान टावर से नीचे नहीं उतरे। उन्होंने कहा यदि उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे टावर पर ही भूखे-प्यासे मर जाएंगे। पुलिस अधिकारी दोनों किसानों को मनाने में जुटे हैं। शाम के समय अफसरों के समझाने पर किसान टावर से उतर गए।
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सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं परिवार
दोघट (बागपत)। बामनौली में किसान सुक्रम पाल की पत्नी विमलेश, बेटे रूपेश, हितैश, पौत्री वैशाली और पौत्र विशाल, कृष्णपाल की पत्नी सुरेश वती धरने पर बैठे हैं। सुक्रम पाल के दोनों पौत्र दिव्यांग हैं। परिवार की महिलाएं और बच्चे भी सुबह से ही भूख-प्यासे हैं। उनका कहना है कि इंसाफ मिलने तक इस तरह धरने पर बैठेंगे।
किसान कृष्णपाल कर चुका है आत्महत्या
दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में 37 साल से चल रही चकबंदी प्रक्रिया ने किसानों को तोड़कर रखा। पिछले वर्ष नवंबर माह में चकबंदी से आहत होकर किसान कृष्णपाल ने आत्महत्या कर ली । इसके बाद भी शासन-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। चकबंदी अधिकारी आए दिन गांव में कभी किसी की तो कभी किसी किसान की भूमि की पैमाइश करने आ जाते हैं, लेकिन एक किसान की भूमि पूरी हो जाती है तो दूसरे किसान की घट जाती है। अधिकारी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
तीसरी बार किसान टावर पर चढ़े
दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में टावर पर चढ़ने का यह पहले मामला नहीं है। 15 दिन पहले चकबंदी से आहत होकर किसान राम कुमार भी टावर पर चढ़ा । अधिकारियों के आश्वासन पर नीचे उतारा । पिछले वर्ष भी किसान सहेंद्र गन्ना भुगतान के लिए टावर पर चढ़ गया । दो माह पहले कई किसानों ने कृष्णा नदी में जल समाधि लेने की कोशिश की , पुलिस ने उन्हें रोका। एक किसान ने मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया , लेकिन उसे ग्रामीणों ने बचा लिया। किसान कलक्ट्रेट बागपत से लेकर लखनऊ तक धरने और प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन आज तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।