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14 हेक्टेयर जमीन के विवाद में खून-खराबा
Updated Fri, 23 Feb 2018 12:49 AM IST
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14 हेक्टेयर जमीन के विवाद में हुआ खून-खराबा
बागपत। गौरीपुर निवाड़ा में 14 हेक्टेयर जमीन को लेकर खून खराबा हुआ। पिछले डेढ़ माह से सुलग रही चिंगारी संघर्ष में तब्दील हो गई। खनन का ठेका मंजूर होने के बाद पुलिस-प्रशासन विवाद निपटाने पहुंचा, जबकि विवाद की चिंगारी पहले से ही सुलग रही थी। किसानों का कहना है कि जमीन उनकी है, जबकि प्रशासन का दावा है कि जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है।
बता दें कि गाजियाबाद की एक कंपनी ने यमुना खादर में खनन का ठेका लिया है। करीब डेढ़ माह पहले भी ठेकेदार पक्ष के लोग रास्ता बनाने पहुंचे थे, तब भी ग्रामीणों ने विरोध किया था। इसके बाद ठेका कागजी कार्रवाई में उलझ गया। दो दिन पहले ही डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने ठेके की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी। बृहस्पतिवार को फिर से ठेकेदार पक्ष के युवक जेसीबी, पोर्कलेन लेकर पहुंचे। टेंट लगा दिया। इस बीच ग्रामीणों को भनक लग गई। एसडीएम विवेक कुमार यादव जानकारी मिलते ही एंटी भूमाफिया टीम को लेकर पहुंच गए।
ये ग्रामीण खादर की 14 हेक्टेयर जमीन पर किसान अपना हक जता रहे थे, जबकि अफसरों का दावा है कि इस जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। सवाल यह है कि डेढ़ माह से विवाद जारी था तो उसके सुलझाने में अदूरदर्शिता क्यों बरती गई। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी अगर पहले प्रकरण में रुचि लेते तो शायद यह हालात न होते।
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फसलों पर चली जेसीबी तो गुस्से से भर गए ग्रामीण
बागपत। निवाड़ा यमुना खादर में एंटी भूमाफिया टीम ने पैमाइश करा दी। इसके बाद ठेकेदार पक्ष के लोगों ने किसानों की फसलों पर जेसीबी चला दी। फसलों पर मशीनें उतरते ही किसान भड़क गए। किसान झगडू पुत्र सुक्का व कुर्बान पुत्र उमरद्दीन निवासी निवाड़ा ने अपनी जमीन पर गेहूं की फसल बोई हुई है। किसानों का कहना था कि वह अपनी फसल को नहीं उजाड़ने देंगे।
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बागपत। गौरीपुर निवाड़ा में 14 हेक्टेयर जमीन को लेकर खून खराबा हुआ। पिछले डेढ़ माह से सुलग रही चिंगारी संघर्ष में तब्दील हो गई। खनन का ठेका मंजूर होने के बाद पुलिस-प्रशासन विवाद निपटाने पहुंचा, जबकि विवाद की चिंगारी पहले से ही सुलग रही थी। किसानों का कहना है कि जमीन उनकी है, जबकि प्रशासन का दावा है कि जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है।
बता दें कि गाजियाबाद की एक कंपनी ने यमुना खादर में खनन का ठेका लिया है। करीब डेढ़ माह पहले भी ठेकेदार पक्ष के लोग रास्ता बनाने पहुंचे थे, तब भी ग्रामीणों ने विरोध किया था। इसके बाद ठेका कागजी कार्रवाई में उलझ गया। दो दिन पहले ही डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने ठेके की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी। बृहस्पतिवार को फिर से ठेकेदार पक्ष के युवक जेसीबी, पोर्कलेन लेकर पहुंचे। टेंट लगा दिया। इस बीच ग्रामीणों को भनक लग गई। एसडीएम विवेक कुमार यादव जानकारी मिलते ही एंटी भूमाफिया टीम को लेकर पहुंच गए।
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ये ग्रामीण खादर की 14 हेक्टेयर जमीन पर किसान अपना हक जता रहे थे, जबकि अफसरों का दावा है कि इस जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। सवाल यह है कि डेढ़ माह से विवाद जारी था तो उसके सुलझाने में अदूरदर्शिता क्यों बरती गई। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी अगर पहले प्रकरण में रुचि लेते तो शायद यह हालात न होते।
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फसलों पर चली जेसीबी तो गुस्से से भर गए ग्रामीण
बागपत। निवाड़ा यमुना खादर में एंटी भूमाफिया टीम ने पैमाइश करा दी। इसके बाद ठेकेदार पक्ष के लोगों ने किसानों की फसलों पर जेसीबी चला दी। फसलों पर मशीनें उतरते ही किसान भड़क गए। किसान झगडू पुत्र सुक्का व कुर्बान पुत्र उमरद्दीन निवासी निवाड़ा ने अपनी जमीन पर गेहूं की फसल बोई हुई है। किसानों का कहना था कि वह अपनी फसल को नहीं उजाड़ने देंगे।