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तीन साल में 132 किसानों की फसल जली
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बागपत। बिजली के तारों से निकली चिंगारी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। पिछले तीन साल में अब तक 132 किसानों की गेहूं और गन्ने की फसल जल चुकी है। कर्मचारियों की लापरवाही और गर्मी के मौसम में सबसे अधिक हादसे हुए हैं। फसल जलने के अलावा अब तक आठ किसानों की मौत भी हुई है।
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता रामवीर सिंह ने बताया कि बागपत में वर्ष 2016 से 2018 तक 132 किसानों की फसल जल चुकी है। विभाग ने 112 किसानों को 38.37 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। साल 2019 का आंकड़ा भी तैयार कराया जा रहा है। अधिकतर दुर्घटनाओं की वजह तारों से निकली चिंगारी ही सामने आया है। बिजली के करंट से आठ किसानों की भी मौत हो चुकी है। किसानों के परिजनों को भी मुआवजा दिया।
केस नंबर - एक :
मुकारी गांव के जंगल में विद्युत लाइन के तारों से चिंगारी गिरने पर किसानों की 48 बीघा फसल जल गई। किसानों ने स्वयं ही आग पर काबू पाया था। सूचना देने के बाद भी दमकल विभाग की गाड़ी भी नहीं पहुंच पाई थी।
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केस नंबर -दो :
काठा गांव के जंगल में विद्युत निगम की लापरवाही से 12 बीघा गेहूं की फसल जल गई । पीड़ित के अनुसार जर्जर विद्युत लाइन के तार आपस में टकराने से आग लगी।
केस नंबर-तीन :
अमीनगर सराय में बिजली के तार भिड़ने से 12 बीघा गेहूं और चार बीघा ईख की फसल जलकर राख हो गई थी। इसके अलावा दोघट थाना क्षेत्र के गांगनौली में पांच बीघा गेहूं, भड़ल में 12 बीघा गेहूं की फसल जल चुकी है।
दस बीघा ईख की फसल जली
बागपत। कान्हड़ गांव के जंगल में मंगलवार को अचानक दाहा गांव निवासी संजय पुत्र जगमेहर के खेत में खड़ी गन्ने की फसल में आग लग गई। आग लगने की सूचना पर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा मिट्टी व पानी डालकर किसी तरह आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक किसान की दस बीघा गन्ने की फसल जल चुकी थी।
हादसे रोकने के लिए आपूर्ति बंद
बागपत। एसई रामवीर सिंह का कहना है कि गेहूं की फसल कटाई तक दिन में आपूर्ति नहीं दी जाएगी। खेतों की बिजली सप्लाई पर दिन में रोक लगाई गई है। गर्मी अधिक होने के कारण हादसे हो रहे हैं। रात में आपूर्ति की जाएगी।
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विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता रामवीर सिंह ने बताया कि बागपत में वर्ष 2016 से 2018 तक 132 किसानों की फसल जल चुकी है। विभाग ने 112 किसानों को 38.37 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। साल 2019 का आंकड़ा भी तैयार कराया जा रहा है। अधिकतर दुर्घटनाओं की वजह तारों से निकली चिंगारी ही सामने आया है। बिजली के करंट से आठ किसानों की भी मौत हो चुकी है। किसानों के परिजनों को भी मुआवजा दिया।
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केस नंबर - एक :
मुकारी गांव के जंगल में विद्युत लाइन के तारों से चिंगारी गिरने पर किसानों की 48 बीघा फसल जल गई। किसानों ने स्वयं ही आग पर काबू पाया था। सूचना देने के बाद भी दमकल विभाग की गाड़ी भी नहीं पहुंच पाई थी।
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केस नंबर -दो :
काठा गांव के जंगल में विद्युत निगम की लापरवाही से 12 बीघा गेहूं की फसल जल गई । पीड़ित के अनुसार जर्जर विद्युत लाइन के तार आपस में टकराने से आग लगी।
केस नंबर-तीन :
अमीनगर सराय में बिजली के तार भिड़ने से 12 बीघा गेहूं और चार बीघा ईख की फसल जलकर राख हो गई थी। इसके अलावा दोघट थाना क्षेत्र के गांगनौली में पांच बीघा गेहूं, भड़ल में 12 बीघा गेहूं की फसल जल चुकी है।
दस बीघा ईख की फसल जली
बागपत। कान्हड़ गांव के जंगल में मंगलवार को अचानक दाहा गांव निवासी संजय पुत्र जगमेहर के खेत में खड़ी गन्ने की फसल में आग लग गई। आग लगने की सूचना पर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा मिट्टी व पानी डालकर किसी तरह आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक किसान की दस बीघा गन्ने की फसल जल चुकी थी।
हादसे रोकने के लिए आपूर्ति बंद
बागपत। एसई रामवीर सिंह का कहना है कि गेहूं की फसल कटाई तक दिन में आपूर्ति नहीं दी जाएगी। खेतों की बिजली सप्लाई पर दिन में रोक लगाई गई है। गर्मी अधिक होने के कारण हादसे हो रहे हैं। रात में आपूर्ति की जाएगी।