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यमुना में डूबा ट्रैक्टर-ट्राली, किसानों ने कूदकर बचाई जान
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बागपत।
क्षेत्र के मवी कलां गांव के जंगल में यमुना नदी पार करते समय ट्रैक्टर-ट्राली पानी में डूब गया। ट्रैक्टर-ट्राली में सवार दस किसानों ने किसी तरह कूदकर अपनी जान बचाई। यमुना नदी पर किसानों की भीड़ लग गई। सूचना पर एएसपी फोर्स के साथ पहुंचे। क्रेन मंगाकर ट्रैक्टर-ट्राली को नदी से बाहर निकलवाया। गनीमत रही कि बड़ा हादसा होने से बच गया।
काठा गांव के सैकड़ों किसानों की यमुना नदी पार कर हरियाणा की तरफ हजारों बीघा कृषि भूमि है। हर रोज सैकड़ों किसान जान जोखिम में डालकर यमुना नदी पार कर करते हैं। कई बार बड़े हादसे भी हो चुके हैं। रविवार को काठा गांव निवासी किसान यशपाल पुत्र दरियाव किसान ट्रैक्टर-ट्राली से मवी कलां गांव के जंगल से होते हुए यमुना नदी पार कर खेत में जा रहा था। ट्रैक्टर ट्राली में अवनीश, रोहित, राम नारायण, सीमा, मुनेश, लोकेश, राहुल, बिजेंद्र, शिवकुमार आदि किसान भी सवार थे। यमुना नदी के बीच में जाते ही ट्रैक्टर गहरे गड्ढे में फंस गया और धीरे-धीरे डूबने लगा। ट्रैक्टर-ट्राली में सवार किसानों ने नदी में कूृद कर अपनी जान बचाई। तैयार कर नदी से बाहर निकले। शोर शराबा होने पर नदी के किनारे किसानों की भीड़ लग गई।
सूचना पर एएसपी रण विजय सिंह फोर्स के साथ नदी पर पहुंचे। गोताखोरों को बुलाकर नदी में डूबे ट्रैक्टर की तलाश कराई। बाद में क्रेन से ट्रैक्टर-ट्राली को खींचकर बाहर निकलवाया। एएसपी ने बताया कि जान माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। किसानों को समय रहते नदी से सकुशल बाहर निकाल लिया गया था। ट्रैक्टर-ट्राली को भी निकलवाया गया है। किसानों ने कहा जब तक यमुना नदी में पानी अधिक है, नदी पार न करें।
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काठा में हो चुका है नाव हादसा
बागपत। काठा गांव में वर्ष 2017 में यमुना नदी में डूब कर 19 लोगों की मौत हो गई। मृतक नाव में बैठ कर नदी पार कर रहे थे। नदी के बीच में नाव भंवर में फंस गई। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी प्रशासन ने नदी पार करने के लिए कोई प्रबंध नहीं किए। किसानों ने कहा वे मजबूरी में नदी पार करनी होती है। यदि वे नदी पार कर खेती करने नहीं जाएंगे तो उन्हें खाने को नहीं मिलेगा। प्रशासन को नदी पर नाव की व्यवस्था करनी चाहिए।
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क्षेत्र के मवी कलां गांव के जंगल में यमुना नदी पार करते समय ट्रैक्टर-ट्राली पानी में डूब गया। ट्रैक्टर-ट्राली में सवार दस किसानों ने किसी तरह कूदकर अपनी जान बचाई। यमुना नदी पर किसानों की भीड़ लग गई। सूचना पर एएसपी फोर्स के साथ पहुंचे। क्रेन मंगाकर ट्रैक्टर-ट्राली को नदी से बाहर निकलवाया। गनीमत रही कि बड़ा हादसा होने से बच गया।
काठा गांव के सैकड़ों किसानों की यमुना नदी पार कर हरियाणा की तरफ हजारों बीघा कृषि भूमि है। हर रोज सैकड़ों किसान जान जोखिम में डालकर यमुना नदी पार कर करते हैं। कई बार बड़े हादसे भी हो चुके हैं। रविवार को काठा गांव निवासी किसान यशपाल पुत्र दरियाव किसान ट्रैक्टर-ट्राली से मवी कलां गांव के जंगल से होते हुए यमुना नदी पार कर खेत में जा रहा था। ट्रैक्टर ट्राली में अवनीश, रोहित, राम नारायण, सीमा, मुनेश, लोकेश, राहुल, बिजेंद्र, शिवकुमार आदि किसान भी सवार थे। यमुना नदी के बीच में जाते ही ट्रैक्टर गहरे गड्ढे में फंस गया और धीरे-धीरे डूबने लगा। ट्रैक्टर-ट्राली में सवार किसानों ने नदी में कूृद कर अपनी जान बचाई। तैयार कर नदी से बाहर निकले। शोर शराबा होने पर नदी के किनारे किसानों की भीड़ लग गई।
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सूचना पर एएसपी रण विजय सिंह फोर्स के साथ नदी पर पहुंचे। गोताखोरों को बुलाकर नदी में डूबे ट्रैक्टर की तलाश कराई। बाद में क्रेन से ट्रैक्टर-ट्राली को खींचकर बाहर निकलवाया। एएसपी ने बताया कि जान माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। किसानों को समय रहते नदी से सकुशल बाहर निकाल लिया गया था। ट्रैक्टर-ट्राली को भी निकलवाया गया है। किसानों ने कहा जब तक यमुना नदी में पानी अधिक है, नदी पार न करें।
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काठा में हो चुका है नाव हादसा
बागपत। काठा गांव में वर्ष 2017 में यमुना नदी में डूब कर 19 लोगों की मौत हो गई। मृतक नाव में बैठ कर नदी पार कर रहे थे। नदी के बीच में नाव भंवर में फंस गई। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी प्रशासन ने नदी पार करने के लिए कोई प्रबंध नहीं किए। किसानों ने कहा वे मजबूरी में नदी पार करनी होती है। यदि वे नदी पार कर खेती करने नहीं जाएंगे तो उन्हें खाने को नहीं मिलेगा। प्रशासन को नदी पर नाव की व्यवस्था करनी चाहिए।