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नाकामी पर लताड़, दर्ज किए गए बयान
Updated Thu, 25 Oct 2018 01:00 AM IST
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बागपत। वन विभाग की ओर से बरती गई लापरवाही और अदूरदर्शिता की जांच शुरू कर दी गई है। वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश दूसरे दिन भी बागपत में मौजूद रहे। लापरवाह वन अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब तलब किया । वन विभाग को सूचना मिलने के बाद से तेंदुए की मौत तक हुए घटनाक्रम की जानकारी ली। किस समय सूचना मिली और टीम किस समय पहुंची, इसकी जानकारी जुटाई। कर्मचारियों के बयान लिए गए। बृहस्पतिवार को वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश ककौर पहुंचकर मामले की जांच कर सकते हैं। यहां पर वह मौका मुआयना करेंगे, इसके अलावा ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
नाकामियों के इन सवालों पर जांच की आंच
बागपत। वन विभाग प्रकरण की दो स्तर से जांच करा रहा है। यह जांच की जा रही है कि खटका किसने और क्यों लगवाया । वन विभाग को किस समय सूचना मिली, टीम किस समय मौके पर पहुंची, टीम ने मौके पर पहुंचकर क्या किया, पिंजरा खपराना से ककौर तक आने में देरी क्यों हुई, तेंदुए की गर्दन लाठी से दबाने के लिए किसने कहा और अगर गलत तरीके से दबाई जा रही थी तो क्यों नहीं रोका, पुलिस की मदद क्यों नहीं ली गई, पशु चिकित्सकों को बुलाकर इंजेक्शन किसने और क्या लगवाया, तेंदुआ अगर बेहोश था तो उसे ले जाने का कोई दूसरा इंतजाम क्यों नहीं किया, करीब दस घंटे तक तेंदुए गांव के जंगल में ही क्यों रखा और वन विभाग की टीम गांव से बाहर निकालकर क्यों नहीं ले गई। मौके पर कौन-कौन अधिकारी किस-किस समय पहुंचे और उन्होंने क्या किया।
डीएफओ को जांच देने पर भी उठे सवाल
बागपत। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद डीएफओ बागपत अनिल कुमार मिश्र भी मौके पर पहुंचे, उन्हें ही मामले की जांच दी। अधिकारियों तक यह बात पहुंची है कि उन्हें ही जांच दे दी गई है, जो रेस्क्यू कार्य के वक्त मौके पर थे, जबकि जांच किसी दूसरे अधिकारी को दी जानी चाहिए थी। इस पर मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र ललित कुमार वर्मा का कहना है कि निष्पक्ष जांच होगी। सभी चीजें लखनऊ तक स्पष्ट है, जो भी दोषी होगा, वह बचेगा नहीं।
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ककौर - खपराना में निगरानी, जंगल में हैं तेंदुए
बागपत। ककौर में तेंदुए की मौत के बाद वन विभाग हरकत में आ गया। ककौर और खपराना के जंगल में चौकसी बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यहां पर मादा तेंदुए हैं। पाली गांव के युद्धवीर ने अधिकारियों से मिलकर कहा कि उन्होंने गांव में कई दिन पहले तेंदुआ देखा है। अधिकारियों ने कहा कि वन विभाग की टीम भेजकर जांच कराएंगे।
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नाकामियों के इन सवालों पर जांच की आंच
बागपत। वन विभाग प्रकरण की दो स्तर से जांच करा रहा है। यह जांच की जा रही है कि खटका किसने और क्यों लगवाया । वन विभाग को किस समय सूचना मिली, टीम किस समय मौके पर पहुंची, टीम ने मौके पर पहुंचकर क्या किया, पिंजरा खपराना से ककौर तक आने में देरी क्यों हुई, तेंदुए की गर्दन लाठी से दबाने के लिए किसने कहा और अगर गलत तरीके से दबाई जा रही थी तो क्यों नहीं रोका, पुलिस की मदद क्यों नहीं ली गई, पशु चिकित्सकों को बुलाकर इंजेक्शन किसने और क्या लगवाया, तेंदुआ अगर बेहोश था तो उसे ले जाने का कोई दूसरा इंतजाम क्यों नहीं किया, करीब दस घंटे तक तेंदुए गांव के जंगल में ही क्यों रखा और वन विभाग की टीम गांव से बाहर निकालकर क्यों नहीं ले गई। मौके पर कौन-कौन अधिकारी किस-किस समय पहुंचे और उन्होंने क्या किया।
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डीएफओ को जांच देने पर भी उठे सवाल
बागपत। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद डीएफओ बागपत अनिल कुमार मिश्र भी मौके पर पहुंचे, उन्हें ही मामले की जांच दी। अधिकारियों तक यह बात पहुंची है कि उन्हें ही जांच दे दी गई है, जो रेस्क्यू कार्य के वक्त मौके पर थे, जबकि जांच किसी दूसरे अधिकारी को दी जानी चाहिए थी। इस पर मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र ललित कुमार वर्मा का कहना है कि निष्पक्ष जांच होगी। सभी चीजें लखनऊ तक स्पष्ट है, जो भी दोषी होगा, वह बचेगा नहीं।
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ककौर - खपराना में निगरानी, जंगल में हैं तेंदुए
बागपत। ककौर में तेंदुए की मौत के बाद वन विभाग हरकत में आ गया। ककौर और खपराना के जंगल में चौकसी बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यहां पर मादा तेंदुए हैं। पाली गांव के युद्धवीर ने अधिकारियों से मिलकर कहा कि उन्होंने गांव में कई दिन पहले तेंदुआ देखा है। अधिकारियों ने कहा कि वन विभाग की टीम भेजकर जांच कराएंगे।