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रिश्वत के मामले की जांच करने पहुंची डीआईजी होमगार्ड

Sun, 09 Sep 2018 01:05 AM IST
Updated Sun, 09 Sep 2018 01:05 AM IST
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रिश्वत के मामले की जांच करने पहुंची डीआईजी होमगार्ड
बागपत। होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय पर दो क्लर्कों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ने के मामले की जांच करने आगरा से डीआईजी होमगार्ड बागपत पहुंची। उन्होंने बंद कमरे में होमगार्डों से पूछताछ की।
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शुक्रवार को चंदनहेड़ी गांव निवासी कंपनी कमांडर छपरौली अशोक कुमार की शिकायत पर मेरठ से पहुंची एंटी करप्शन टीम ने बागपत होमगार्ड कार्यालय पर छापा मारकर क्लर्क अवनीश व प्रवीन कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। आरोपी प्रवीन कुमार मौके से भाग निकला था। जबकि अवनीश को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया। टीम प्रभारी अरविंद कुमार ने दोनों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले में शनिवार को आगरा से डीआईजी होमगार्ड रजनी उपाध्याय बागपत होमगार्ड कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने होमगार्ड कमांडेंट व अन्य कई होमगार्डों से बंद कमरे में पूछताछ की। इस दौरान उन्होंने किसी से भी मिलने के लिए साफ इंकार कर दिया। उनके इंतजार में कई फरियादी कार्यालय के बाहर ही खड़े रहे। मामले की जांच कर वे वापस लौट गई।
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डीआईजी ने होमगार्डों की नहीं सुनी पीड़ा
बागपत। डीआईजी होमगार्ड रजनी उपाध्याय के आने की सूचना पर कई निलंबित होमागार्ड उनसे मिलने पहुंच गए। इस दौरान चांदीनगर थाना क्षेत्र के पांची गांव निवासी प्रमोद कुमार पुत्र सुखबीर सिंह ने बताया कि उसका जून 2017 में पारिवारिक विवाद हो गया था। जिस कारण वह कई दिनों पर डयूटी पर नहीं पहुंचा। विवाद को सुलझाने के बाद वह अपने कार्य पर लौटा तो होमगार्ड कमांडेंट ने उस पर कई अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया। कमांडेंट के ड्राइवर ने फोन पर उससे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसी संबंध में पीड़ित डीआईजी से शिकायत करने पहुंचा था, लेकिन आरोपी ड्राइवर ने उसे देखते ही बाहर रोक लिया। डीआईजी से शिकायत करने की बात कहने पर उसके साथ मारपीट की।
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इसके अलावा बड़ौत के आजाद नगर निवासी सत्तार सिंह भी अपनी पुत्री पूनम के साथ कार्यालय पहुंचे। सत्तार सिंह ने कहा कि वह पेड प्लाटून कमांडर की पोस्ट से रिटायर है। उसका बेटा दीपक कुमार होमगार्ड बड़ौत में कंपनी कमांडर था। उसे तीन माह पूर्व ही कमाडेंट नीता भारतीय ने अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उसे निकाल दिया तथा वापसी पर पचास हजार रुपये की रिश्वत मांगी। दोनों पीड़ित घंटों डीआईजी का इंतजार करते रहे, लेकिन डीआईजी होमगार्ड उनसे मिले बिना ही वापस लौट गई। डीआईजी होमगार्ड का कहना है कि वह केवल रिश्वत मामले की जांच के लिए बागपत आईं थी।
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