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योगी आदित्यनाथ तक पहुंची खेड़ी प्रधान के खनन की गूंज

Thu, 16 May 2019 01:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 16 May 2019 01:03 AM IST
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योगी आदित्यनाथ तक पहुंची खेड़ी प्रधान के खनन की गूंज
बागपत/बड़ौत। कोताना गांव के मजरे खेड़ी प्रधान में अवैध खनन का मामला सीएम योगी आदित्यनाथ और एनजीटी तक पहुंच गया है। बड़ौत विधायक केपी मलिक ने स्थानीय प्रशासन पर खनन माफिया से मिलीभगत का आरोप लगाया। यमुना में किए जा रहे अवैध खनन में पॉकलेन मशीनों का प्रयोग किए जाने, सरकारों को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि और रेत लदे ट्रकों से बागपत की सड़कों को नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। दूसरी तरफ विधायक योगेश धामा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले में खनन करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने े की मांग की।
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बड़ौत विधायक केपी मलिक ने सीएम और एनजीटी को पत्र भेजकर बताया कि कोताना और खेड़ी प्रधान में अवैध खनन किया जा रहा है। क्षेत्र के लोग उनसे रोज शिकायत कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन चल रहा है। पॉकलेन मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे यमुना मेें गहरे गड्ढे हो गए हैं। विधायक ने कहा कि काठा नाव हादसा भी इसी तरह के गड्ढों की वजह से हुआ । छपरौली से लेकर काठा तक आए दिन यमुना के गड्ढों में हादसे होते हैं, इसके बाद भी अवैध खनन किया जा रहा है। सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। रेत की खानों से रोजाना सैकड़ों ओवरलोड वाहनों को निकाला जा रहा है, इससे क्षेत्र की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है। अवैध खनन से पानी प्रदूषित हो चुका है, जिस पर एनजीटी पहले ही नाराजगी जता चुकी है।
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अवैध हथियारों से डराए जा रहे हैं ग्रामीण
बागपत। विधायक ने शिकायत में कहा है कि ग्रामीणों को अवैध हथियारों से डराया जा रहा है। अवैध खनन स्थल पर 30-40 गुर्गे खनन माफिया के रहते हैं, जो अवैध हथियारों से लोगों को डराते हैं। खादर में कई बार खूनी संघर्ष हो चुका है।
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योगेश धामा ने उठाए प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका पर सवाल
बागपत। बागपत के भाजपा विधायक योगेश धामा ने भी अवैध खनन पर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। विधायक का कहना है कि सरकार को राजस्व की हानि के अलावा छवि को धूमिल किया जा रहा है। बागपत जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। मुख्य सचिव से इस अधिकारी की जांच कराने की मांग की गई है। यह भी कहा गया है कि खनन माफियाओं के साथ प्रशासनिक अधिकारी की साठगांठ लग रही है। विधायक ने कहा कि जिले में अवैध खनन से भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर वह अवैध खनन के विषय में जानकारी देंगे और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की जाएगी। इसके लिए विशेष जांच टीम का गठन कराया जाएगा।

एसडीएम सीओ के पहुंचने से पहले भागे खनन माफिया
बड़ौत। खेड़ी प्रधान और कोताना में अवैध खनन की गूंज होते ही पुलिस-प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम बड़ौत गुलशन कुमार और सीओ बड़ौत रामानंद कुशवाह के नेतृत्व में जिला खनन अधिकारी शैलेंद्र कुमार मौर्य, तहसीलदार प्रदीप कुमार, राजस्व विभाग की टीम और पुलिसकर्मी यमुना खादर में पहुंचे और स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें खनन होता नहीं मिला। किसानों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन के आने की सूचना मिलते ही खनन माफिया यमुना खादर छोड़कर भाग खड़े हुए हैं। खनन माफिया रात के समय खनन कर रहे हैं। एसडीएम गुलशन कुमार का कहना है कि अगर अवैध खनन पकड़ा तो सख्ती कार्रवाई की जाएगी।

किसके इशारे पर खनन, कौन करता है लोकेशन ट्रेस
बागपत। कोताना गांव के किसान शमशाद, दिलशाद और रफी ने नौ मई को एसडीएम बड़ौत से शिकायत की कि उनकी जमीन यमुना पार हरियाणा की साइड में है। यहां पर अवैध खनन किया जा रहा है। किसानों ने शिकायत की कि उनकी गेहूं की फसल को खुर्द बुर्द कर दिया। सवाल है कि आखिर किसके इशारे पर अवैध खनन किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की टीम कार्रवाई के लिए पहुंचती है तो लोकेशन ट्रेस कर दी जाती है। पुलिस-प्रशासन का सूचना तंत्र भी यमुना खादर के अवैध खनन में नाकाम हो गया है। किसानों का कहना है कि उन्हें डराया धमकाया जाता है।


पहले सीएम ने रुकवाया था अवैध खनन
बागपत। विधायक केपी मलिक ने सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में लिखा है कि 16 दिसंबर 2018 को भी उन्होंने अवैध खनन का मामला उठाया । तब उनके निर्देश पर ही यहां अवैध खनन रुकवाया, लेकिन खनन माफिया इतने निरंकुश हो गए हैं कि सीएम के आदेश की अवहेलना करने पर उतर आए हैं।
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