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ज्योति की लाश के पास बैठकर वीरेंद्र ने लिखे सुसाइड नोट
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बागपत। पुलिस लाइन के तीसरे फ्लोर पर दिल दहला देने वाली वारदात हुई। सिर्फ चार महीने में वीरेंद्र और ज्योति के बीच घरेलू कलह गहरा गई । ज्योति की हत्या के बाद वीरेंद्र ने उसकी लाश के पास बैठकर सुसाइड नोट की दो कॉपी लिखी। एक कागज पर और दूसरी डायरी पर। ज्योति के परिजनों की दोपहर बाद तक बात नहीं हुई तो उन्हें अनष्टि की आशंका हुई।
बरेली के रहने वाली वीरेंद्र और सहारनपुर की ज्योति सजातीय थे। दोनों की अरैंज मैरिज पांच नवंबर 2018 को हुई। सिर्फ चार माह में ही दांपत्य जीवन में इतना जहर घुल गया, इससे एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। लखनऊ से वीरेंद्र रविवार सुबह ही बागपत पहुंचा था। सुबह साढे़ सात बजे ज्योति की अपने परिजनों से आखिरी बार बात हुई और उसने घर बताया कि वह अल्ट्रासाउंड के लिए सोनीपत जा रहे हैं। परिजनों ने दोपहर बाद कॉल की, लेकिन ज्योति और वीरेंद्र के मोबाइल स्विच ऑफ मिले। इधर कमरे में वीरेंद्र ने पहले पत्नी की पिटाई की। पीछे की तरफ उसके साथ बांधे और इसके बाद पानी गरम करने की रॉड की वायर से फांसी लगा दी। वारदात के बाद वीरेंद्र लाश के पास बैठा। पहले डायरी में सुसाइड नोट लिखा और इसके बाद उसे एक कागज पर उतारा। ज्योति की चुनरी से ही पंखे पर फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी।
दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप
बागपत। ज्योति की मौसी कविता देर रात बागपत पहुंच गई। उसने बताया कि ज्योति ने दहेज रहित विवाह किया, लेकिन शादी के बाद से ही वीरेंद्र उस पर पांच लाख रुपये का दबाव बना रहा था। यह भी आरोप लगाया कि वह लखनऊ से सीधे सहारनपुर जाता था, इसके बाद ज्योति को बागपत से सहारनपुर बुलाया। फिर दोनों बागपत आते थे। रविवार को वह लखनऊ से सीधे बागपत पहुंचा और वारदात को अंजाम दिया।
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क्या लिखा सुसाइड नोट में
वीरेंद्र कुमार और ज्योति...मैं दोनों की ही जिंदगी खत्म कर रहा हूं। इसमें मेरे घरवालों से कोई लेना-देना नहीं है। मेरी और मेरी पत्नी दोनों की ही मौत का जिम्मेदार इसका जीजा अजेंद्र और इसकी मौसी-मौसा नरेला वाले हैं। इन्होंने मेरी जिंदगी नरक बना दी। और इन्होंने कभी ज्योति को समझाया नहीं। इसलिए मुझे यह कदम उठाना पड़ा। हमेशा मेरी ही गलती बताई गई। मेरी गलती थी ही अब और तो और मेरी मां ने जब देशी घी दिया तो उसमें भी इन्होंने डालडा मिलाकर ज्योति को मेरे घरवालों के खिलाफ उल्टी सीधी बातें करवाई। और तो और मेरी बहनों के लिए हमेशा उल्टा सीधा बोलना, मेरी और मेरी पत्नी की मौत के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ इसका जीजा और इसकी मौसा-मौसी है।
तीन साल पहले भर्ती हुई थी ज्योति
बागपत। ज्योति साल 2016 और वीरेंद्र साल 2018 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे। वीरेंद्र की ट्रेनिंग 25 जनवरी को ही पूरी हुई थी।
तीसरी मंजिल पर दबकर रह गई ज्योति की चीखें
बागपत। जिस जगह वारदात हुई वह पुलिस लाइन का तीसरा फ्लोर है। क्वार्टर के आसपास कोई नहीं रहता। यही वजह है कि ज्योति की चीखें कोई नहीं सुन सका। एक पुलिसकर्मी को परिजनों ने दोपहर के समय कॉल की। बताया जा रहा है कि उसने कमरे में झांककर वीभत्स दृश्य देख भी लिया, लेकिन वह इतना सहम गया कि कहीं जिक्र नहीं किया। रात के समय आरआई को मामले की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई।
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बरेली के रहने वाली वीरेंद्र और सहारनपुर की ज्योति सजातीय थे। दोनों की अरैंज मैरिज पांच नवंबर 2018 को हुई। सिर्फ चार माह में ही दांपत्य जीवन में इतना जहर घुल गया, इससे एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। लखनऊ से वीरेंद्र रविवार सुबह ही बागपत पहुंचा था। सुबह साढे़ सात बजे ज्योति की अपने परिजनों से आखिरी बार बात हुई और उसने घर बताया कि वह अल्ट्रासाउंड के लिए सोनीपत जा रहे हैं। परिजनों ने दोपहर बाद कॉल की, लेकिन ज्योति और वीरेंद्र के मोबाइल स्विच ऑफ मिले। इधर कमरे में वीरेंद्र ने पहले पत्नी की पिटाई की। पीछे की तरफ उसके साथ बांधे और इसके बाद पानी गरम करने की रॉड की वायर से फांसी लगा दी। वारदात के बाद वीरेंद्र लाश के पास बैठा। पहले डायरी में सुसाइड नोट लिखा और इसके बाद उसे एक कागज पर उतारा। ज्योति की चुनरी से ही पंखे पर फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी।
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दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप
बागपत। ज्योति की मौसी कविता देर रात बागपत पहुंच गई। उसने बताया कि ज्योति ने दहेज रहित विवाह किया, लेकिन शादी के बाद से ही वीरेंद्र उस पर पांच लाख रुपये का दबाव बना रहा था। यह भी आरोप लगाया कि वह लखनऊ से सीधे सहारनपुर जाता था, इसके बाद ज्योति को बागपत से सहारनपुर बुलाया। फिर दोनों बागपत आते थे। रविवार को वह लखनऊ से सीधे बागपत पहुंचा और वारदात को अंजाम दिया।
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क्या लिखा सुसाइड नोट में
वीरेंद्र कुमार और ज्योति...मैं दोनों की ही जिंदगी खत्म कर रहा हूं। इसमें मेरे घरवालों से कोई लेना-देना नहीं है। मेरी और मेरी पत्नी दोनों की ही मौत का जिम्मेदार इसका जीजा अजेंद्र और इसकी मौसी-मौसा नरेला वाले हैं। इन्होंने मेरी जिंदगी नरक बना दी। और इन्होंने कभी ज्योति को समझाया नहीं। इसलिए मुझे यह कदम उठाना पड़ा। हमेशा मेरी ही गलती बताई गई। मेरी गलती थी ही अब और तो और मेरी मां ने जब देशी घी दिया तो उसमें भी इन्होंने डालडा मिलाकर ज्योति को मेरे घरवालों के खिलाफ उल्टी सीधी बातें करवाई। और तो और मेरी बहनों के लिए हमेशा उल्टा सीधा बोलना, मेरी और मेरी पत्नी की मौत के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ इसका जीजा और इसकी मौसा-मौसी है।
तीन साल पहले भर्ती हुई थी ज्योति
बागपत। ज्योति साल 2016 और वीरेंद्र साल 2018 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे। वीरेंद्र की ट्रेनिंग 25 जनवरी को ही पूरी हुई थी।
तीसरी मंजिल पर दबकर रह गई ज्योति की चीखें
बागपत। जिस जगह वारदात हुई वह पुलिस लाइन का तीसरा फ्लोर है। क्वार्टर के आसपास कोई नहीं रहता। यही वजह है कि ज्योति की चीखें कोई नहीं सुन सका। एक पुलिसकर्मी को परिजनों ने दोपहर के समय कॉल की। बताया जा रहा है कि उसने कमरे में झांककर वीभत्स दृश्य देख भी लिया, लेकिन वह इतना सहम गया कि कहीं जिक्र नहीं किया। रात के समय आरआई को मामले की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई।