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मुजफ्फरनगर दंगे की आंच में झुलसा था बागपत
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:11 AM IST
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बागपत। मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 के दंगे के दौरान बागपत भी झुलस गया था। बामनौली और वाजिदपुर गांव में महिला समेत तीन लोगों की हत्या की थी। दहशत के चलते सैकड़ों परिवारों ने जनपद से पलायन कर दिया था। इनमें से कई परिवार ऐसे हैं जो अभी भी वापस अपने घर नहीं लौटे हैं।
बड़ौत क्षेत्र के वाजिदपुर गांव में आठ सितंबर 2013 की रात में धार्मिक स्थल में फायरिंग की। इससे वहां भगदड़ मच गई थी। गोली लगने से किशोर सोएब की मौके पर ही मौत हो गई थी और इकबाल गोली लगने से घायल हो गया था। इसकी उपचार के दौरान बाद में मौत हो गई थी। अज्ञात में बड़ौत कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ । पुलिस की जांच में कई लोग सामने आए । पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की । दोघट क्षेत्र के बामनौली गांव में पांच सितंबर 2013 की रात को एक परिवार पर हमला किया था। इसमें अख्तरी नाम की महिला की मौत हो गई थी। परिजनों ने सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के आधार पर कार्रवाई की । दंगे की दहशत के चलते सैकड़ों परिवारों ने जनपद से पलायन कर दिया था। कुछ परिवार के लोग वापस अपने घर लौट आए है। जबकि कई परिवार आज भी घर से बेघर है।
काठा के युवक की हत्या
कर जला दिया था शव
बागपत। काठा गांव के युवक चांद की नौ सितंबर 2013 को हत्या कर शव को पेट्रोल छिड़ककर जला दिया गया था। बाद में उसका शव मिला था। उसका भाई मकसूद केस की पैरवी कर रहा है। उसको कई बार जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। पिछले दिनों पकड़े गए 15 हजार रुपये के इनामी राहुल काठा ने भी खुलासा किया था कि उसका मकसद मकसूद की हत्या करने का था, क्योंकि वह अपने भाई की हत्या के केस की पैरवी कर रहा है। हालांकि पुलिस-प्रशासन ने इसको दंगे में शामिल नहीं किया था।
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निनाना का परिवार आज भी रहता है निवाड़ा में
बागपत। फैजपुर-निनाना के शौकीन ने दंगे के दौरान गांव से पलायन कर दिया था। परिवार के साथ निवाड़ा में आकर रहने लगा था। परिवार अभी तक वापस अपने गांव नहीं लौटा है। शौकीन की पत्नी समीना और बेटे सद्दाम का कहना है कि डर से गांव छोड़ा था। उनकी शासन-प्रशासन ने कोई मद्द नहीं की है।
शामली और मुजफ्फरनगर
के लोगों ने ली थी शरण
बागपत। दंगे के समय शामली और मुजफ्फरनगर से बड़े स्तर पर पलायन हुआ था। कुछ लोगों ने बागपत में विभिन्न स्थानों पर शरण ली थी। इनमें से कई परिवार तो ऐसे है जो अभी तक वापस अपने जनपद में नहीं लौटे है।
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बड़ौत क्षेत्र के वाजिदपुर गांव में आठ सितंबर 2013 की रात में धार्मिक स्थल में फायरिंग की। इससे वहां भगदड़ मच गई थी। गोली लगने से किशोर सोएब की मौके पर ही मौत हो गई थी और इकबाल गोली लगने से घायल हो गया था। इसकी उपचार के दौरान बाद में मौत हो गई थी। अज्ञात में बड़ौत कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ । पुलिस की जांच में कई लोग सामने आए । पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की । दोघट क्षेत्र के बामनौली गांव में पांच सितंबर 2013 की रात को एक परिवार पर हमला किया था। इसमें अख्तरी नाम की महिला की मौत हो गई थी। परिजनों ने सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के आधार पर कार्रवाई की । दंगे की दहशत के चलते सैकड़ों परिवारों ने जनपद से पलायन कर दिया था। कुछ परिवार के लोग वापस अपने घर लौट आए है। जबकि कई परिवार आज भी घर से बेघर है।
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काठा के युवक की हत्या
कर जला दिया था शव
बागपत। काठा गांव के युवक चांद की नौ सितंबर 2013 को हत्या कर शव को पेट्रोल छिड़ककर जला दिया गया था। बाद में उसका शव मिला था। उसका भाई मकसूद केस की पैरवी कर रहा है। उसको कई बार जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। पिछले दिनों पकड़े गए 15 हजार रुपये के इनामी राहुल काठा ने भी खुलासा किया था कि उसका मकसद मकसूद की हत्या करने का था, क्योंकि वह अपने भाई की हत्या के केस की पैरवी कर रहा है। हालांकि पुलिस-प्रशासन ने इसको दंगे में शामिल नहीं किया था।
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निनाना का परिवार आज भी रहता है निवाड़ा में
बागपत। फैजपुर-निनाना के शौकीन ने दंगे के दौरान गांव से पलायन कर दिया था। परिवार के साथ निवाड़ा में आकर रहने लगा था। परिवार अभी तक वापस अपने गांव नहीं लौटा है। शौकीन की पत्नी समीना और बेटे सद्दाम का कहना है कि डर से गांव छोड़ा था। उनकी शासन-प्रशासन ने कोई मद्द नहीं की है।
शामली और मुजफ्फरनगर
के लोगों ने ली थी शरण
बागपत। दंगे के समय शामली और मुजफ्फरनगर से बड़े स्तर पर पलायन हुआ था। कुछ लोगों ने बागपत में विभिन्न स्थानों पर शरण ली थी। इनमें से कई परिवार तो ऐसे है जो अभी तक वापस अपने जनपद में नहीं लौटे है।