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हाइवे पर रेहड़े में प्रसव, जिला अस्पताल में परिजनों का हंगामा
Updated Fri, 08 Jun 2018 01:11 AM IST
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बागपत। महिला ने दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर रेहड़े में बच्ची को जन्म दिया। प्रसूता व नवजात बच्ची को लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। परिजनों का कहना था कि चिकित्सकों ने जिंदा नवजात बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन बच्ची को निजी अस्पताल ले गए, जहां तीन घंटे बाद बच्ची की मौत हुई। परिजनों ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
मोहल्ला मुगलपुरा नई बस्ती बागपत निवासी सोनी छह माह की गर्भवती थी। उसके पति मोमन ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह छह बजे सोनी को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे सीएचसी लेकर पहुंचे, लेकिन यहां कोई चिकित्सक नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। परिजन रेहड़े में ही गर्भवती महिला को लेकर जिला अस्पताल के लिए लेकर चल दिए। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर डीएम आवास के पास रेहड़े में ही महिला को प्रसव हो गया। परिजन नवजात बच्ची व प्रसूता को जिला अस्पताल ले गए। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों ने नवजात बच्ची को मृत घोषित कर दिया जबकि उसकी सांस चल रही थी। परिजनों ने प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कराया और नवजात बच्ची को एक निजी अस्पताल ले गए। यहां तीन घंटे तक बच्ची जिंदा रही, लेकिन बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। मोमीन ने बताया कि यदि समय पर बच्ची को इलाज मिल जाता तो वह बचाई जा सकती थी। उन्होंने मामले की शिकायत सीएमओ से की। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने बताया कि फिलहाल उनकी जानकारी में मामला नहीं है, अगर ऐसा हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल चल रहा राम भरोसे
बागपत। परिजनों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। अधिकतर कक्षों में कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। चिकित्सकों के कमरों में एसी व पंखे लगातार चलते रहते हैं और बाहर मरीज गर्मी से परेशान हो जाते हैं। अस्पताल राम भरोसे ही चल रहा है। जिस कारण मरीजों का सरकारी अस्पतालों से भरोसे उठ चुका है।
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मोहल्ला मुगलपुरा नई बस्ती बागपत निवासी सोनी छह माह की गर्भवती थी। उसके पति मोमन ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह छह बजे सोनी को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे सीएचसी लेकर पहुंचे, लेकिन यहां कोई चिकित्सक नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। परिजन रेहड़े में ही गर्भवती महिला को लेकर जिला अस्पताल के लिए लेकर चल दिए। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर डीएम आवास के पास रेहड़े में ही महिला को प्रसव हो गया। परिजन नवजात बच्ची व प्रसूता को जिला अस्पताल ले गए। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों ने नवजात बच्ची को मृत घोषित कर दिया जबकि उसकी सांस चल रही थी। परिजनों ने प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कराया और नवजात बच्ची को एक निजी अस्पताल ले गए। यहां तीन घंटे तक बच्ची जिंदा रही, लेकिन बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। मोमीन ने बताया कि यदि समय पर बच्ची को इलाज मिल जाता तो वह बचाई जा सकती थी। उन्होंने मामले की शिकायत सीएमओ से की। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने बताया कि फिलहाल उनकी जानकारी में मामला नहीं है, अगर ऐसा हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल चल रहा राम भरोसे
बागपत। परिजनों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। अधिकतर कक्षों में कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। चिकित्सकों के कमरों में एसी व पंखे लगातार चलते रहते हैं और बाहर मरीज गर्मी से परेशान हो जाते हैं। अस्पताल राम भरोसे ही चल रहा है। जिस कारण मरीजों का सरकारी अस्पतालों से भरोसे उठ चुका है।
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