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मलकपुर गन्ना समिति के चेयरमैन समेत 11 किसानों ने किया सरेंडर
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बागपत। बड़ौत में छह साल पहले गन्ना भुगतान के लिए दिल्ली-सहारनपुर हाईवे जाम करने के मामले में गन्ना विकास समिति मलकपुर के चेयरमैन समेत 11 किसानों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मिताली गोविंद राय की कोर्ट में सरेंडर कर दिया। हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।
बड़ौत तहसील में अप्रैल 2012 में किसानों ने गन्ना भुगतान के लिए मलकपुर मिल के खिलाफ 18 दिनों तक धरना दिया था। नौ अप्रैल को किसानों ने तहसील गेट के सामने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे जाम कर दिया था। हाईवे जाम करने पर पुलिस ने 37 नामजद किसानों समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। छह साल बाद किसानों के गैर जमानती वारंट जारी कर दिए गए थे। बृहस्पतिवार को गन्ना विकास समिति मलकपुर के चेयरमैन धूम सिंह, किसान नेता मुनेश बरवाला, बिजरौल थांबा के चौधरी यशपाल सिंह, रामफल आदर्श नंगला, बलजोर सिंह आर्य मलकपुर, इलम सिंह बदरखा, सोनू प्रधान सिनौली, रणपाल मान सिनौली, जयवीर मलिक चांदनहेड़ी, सत्यवीर फौजी सिरसली, रविंद्र चेयरमैन कंडेरा ने सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया जबकि बड़ौत थांबा के चौधरी अलबेल सिंह, बलजोर सिंह चांदनहेड़ी, कदम प्रधान सिनौली की मौत हो चुकी है। हालांकि बाद में किसानों को कोर्ट से जमानत मिल गई।
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किसानों ने क्या कहा
बागपत। किसान नेताओं ने कहा कि गन्ने का बकाया भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है। उल्टे किसानों पर फर्जी मुकदमे किए जा रहे हैं। बकाया भुगतान न होने से किसान परेशान हैं।
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एक्सईएन को पीटने वालों ने भी किया सरेंडर
बागपत। बड़ौत तहसील में वर्ष 2010 में धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों पर तत्कालीन एक्सईएन बड़ौत नेकीराम के साथ मारपीट का आरोप लगाया गया था। एक्सईएन ने किसान नेता मुनेश बरवाला, अशोक बिजरौल, सतेंद्र बरवाला, नरेंद्र लुहारी केम खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में मुनेश व सतेंद्र बरवाला ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया।
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बड़ौत तहसील में अप्रैल 2012 में किसानों ने गन्ना भुगतान के लिए मलकपुर मिल के खिलाफ 18 दिनों तक धरना दिया था। नौ अप्रैल को किसानों ने तहसील गेट के सामने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे जाम कर दिया था। हाईवे जाम करने पर पुलिस ने 37 नामजद किसानों समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। छह साल बाद किसानों के गैर जमानती वारंट जारी कर दिए गए थे। बृहस्पतिवार को गन्ना विकास समिति मलकपुर के चेयरमैन धूम सिंह, किसान नेता मुनेश बरवाला, बिजरौल थांबा के चौधरी यशपाल सिंह, रामफल आदर्श नंगला, बलजोर सिंह आर्य मलकपुर, इलम सिंह बदरखा, सोनू प्रधान सिनौली, रणपाल मान सिनौली, जयवीर मलिक चांदनहेड़ी, सत्यवीर फौजी सिरसली, रविंद्र चेयरमैन कंडेरा ने सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया जबकि बड़ौत थांबा के चौधरी अलबेल सिंह, बलजोर सिंह चांदनहेड़ी, कदम प्रधान सिनौली की मौत हो चुकी है। हालांकि बाद में किसानों को कोर्ट से जमानत मिल गई।
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किसानों ने क्या कहा
बागपत। किसान नेताओं ने कहा कि गन्ने का बकाया भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है। उल्टे किसानों पर फर्जी मुकदमे किए जा रहे हैं। बकाया भुगतान न होने से किसान परेशान हैं।
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एक्सईएन को पीटने वालों ने भी किया सरेंडर
बागपत। बड़ौत तहसील में वर्ष 2010 में धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों पर तत्कालीन एक्सईएन बड़ौत नेकीराम के साथ मारपीट का आरोप लगाया गया था। एक्सईएन ने किसान नेता मुनेश बरवाला, अशोक बिजरौल, सतेंद्र बरवाला, नरेंद्र लुहारी केम खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में मुनेश व सतेंद्र बरवाला ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया।