एमपी: 10 करोड़ की ठगी की रकम, 11 ATM कार्ड और 8 सिम...इंदौर पुलिस के हाथ लगा बड़ा नेटवर्क; दो आरोपी गिरफ्तार
इंदौर पुलिस ने साइबर ठगी की रकम फर्जी खातों में ट्रांसफर कराने वाले दीपक राव और गौरव राठौर को गिरफ्तार किया। 10 खातों में 10 करोड़ से अधिक पहुंचे, जबकि 5 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध लेनदेन मिला। नेटवर्क के तार 13 राज्यों से जुड़े हैं।
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इंदौर पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को फर्जी तरीके से बैंक खातों में ट्रांसफर कराने वाले नेटवर्क के दो आरोपियों दीपक राव और गौरव राठौर को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों से जुड़े 10 बैंक खातों में साइबर ठगी से संबंधित 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पहुंची है। वहीं, खातों की जांच में 5 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन भी सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी गौरव राठौर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाता था। ठगी की रकम दीपक राव के बैंक खातों में भी फर्जी तरीके से ट्रांसफर कराई जाती थी। दीपक अंडे का ठेला लगाता था। इसके बदले गौरव को लेनदेन की रकम का कुछ प्रतिशत कमीशन के रूप में मिलता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, आठ एक्टिव सिम कार्ड, 10 बैंक खाते और 11 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। इन सभी की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने और जांच एजेंसियों से बचने के लिए किया।
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जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों का नेटवर्क केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं था। साइबर ठगी के मामलों के तार देश के कई राज्यों से जुड़े मिले हैं। पुलिस के अनुसार तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार में हुई ठगी की वारदातों से भी आरोपियों का कनेक्शन सामने आया है।
पुलिस अब आरोपियों से जुड़े बैंक खातों की पूरी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाल रही है। साथ ही मोबाइल फोन और सिम कार्ड से मिले डेटा के आधार पर उनके संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इसके बाद यह पैसा किन लोगों तक पहुंचाया गया।
करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आने के बाद पुलिस को आशंका है कि आरोपी किसी संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।
