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Baghpat News: गोशाला में गोवंश को नहीं मिलता हरा चारा, चिकित्सक एक भी जगह नहीं जाते
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बागपत। यहां की गोशाला में गोवंश को हरा चारा तक नहीं मिलता वहीं चिकित्सक नियमित गोशाला में गोवंश को देखने के लिए नहीं जाते हैं। एक भी गोशाला में गोवंश की टैगिंग नहीं हुई है और सीसीटीवी कैमरे तक गोशाला में नहीं लगे है। मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने 30 गोशाला में अपने स्तर से अधिकारी भेजकर जांच कराई तो गोशालाओं की पोल खुली।
जिले में 30 गोशाला हैं और इनमें 5596 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। गोशालाओं में अव्यवस्था फैलने की शिकायत लगातार हो रही थी और सुधार तक नहीं कराया जा रहा था। गोशाला में गोवंश दम तोड़ रहे थे, इसलिए मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने अपने स्तर से नोडल अधिकारियों को गोशाला में भेजकर जांच कराई। जांच में पता चला कि एक भी गोवंश की अभी तक टैगिंग नहीं की गई है। केवल दो गोशाला में गोवंश को हरा चारा मिलता है और टीन शेड सिर्फ आठ गोशाला में लगी है।
इसके अलावा 12 गोशाला में ही छोटे व बड़े गोवंश अलग रखे गए हैं। सौर ऊर्जा की व्यवस्था किसी भी गोशाला में नहीं है। सिर्फ एक गोशाला में ही रात व दिन में चौकीदार रहता है और 28 गोशाला में जलभराव की स्थिति मिली। मंडलायुक्त ने डीएम व सीडीओ को पत्र लिखकर सभी गोशाला की कमियों को दूर कराने के निर्देश दिए है, ताकि गोवंश को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
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किसी भी गोशाला में मरे गोवंश के शव का नहीं होता निस्तारण
यदि गोशाला में गोवंश मर जाते हैं तो उनके शव का निस्तारण ठीक से किसी भी गोशाला में नहीं किया जाता है। जिले की 30 गोशाला में मरने के बाद गोवंश को इधर-उधर या फिर गड्ढे में फेंक दिया जाता है। उनके ऊपर ठीक से मिट्टी तक नहीं डाली जाती है। सिर्फ चार गोशाला में ही पशुओं का नियमित उपचार कराया जाता है।
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वर्जन
- गोशाला में मिली कमियों को दूर करने के लिए सभी सचिवों व प्रधानों को एक माह का समय दिया है। निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं होने पर सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -नीरज कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ
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जिले में 30 गोशाला हैं और इनमें 5596 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। गोशालाओं में अव्यवस्था फैलने की शिकायत लगातार हो रही थी और सुधार तक नहीं कराया जा रहा था। गोशाला में गोवंश दम तोड़ रहे थे, इसलिए मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने अपने स्तर से नोडल अधिकारियों को गोशाला में भेजकर जांच कराई। जांच में पता चला कि एक भी गोवंश की अभी तक टैगिंग नहीं की गई है। केवल दो गोशाला में गोवंश को हरा चारा मिलता है और टीन शेड सिर्फ आठ गोशाला में लगी है।
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इसके अलावा 12 गोशाला में ही छोटे व बड़े गोवंश अलग रखे गए हैं। सौर ऊर्जा की व्यवस्था किसी भी गोशाला में नहीं है। सिर्फ एक गोशाला में ही रात व दिन में चौकीदार रहता है और 28 गोशाला में जलभराव की स्थिति मिली। मंडलायुक्त ने डीएम व सीडीओ को पत्र लिखकर सभी गोशाला की कमियों को दूर कराने के निर्देश दिए है, ताकि गोवंश को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
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किसी भी गोशाला में मरे गोवंश के शव का नहीं होता निस्तारण
यदि गोशाला में गोवंश मर जाते हैं तो उनके शव का निस्तारण ठीक से किसी भी गोशाला में नहीं किया जाता है। जिले की 30 गोशाला में मरने के बाद गोवंश को इधर-उधर या फिर गड्ढे में फेंक दिया जाता है। उनके ऊपर ठीक से मिट्टी तक नहीं डाली जाती है। सिर्फ चार गोशाला में ही पशुओं का नियमित उपचार कराया जाता है।
वर्जन
- गोशाला में मिली कमियों को दूर करने के लिए सभी सचिवों व प्रधानों को एक माह का समय दिया है। निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं होने पर सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -नीरज कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ