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Baghpat News: कोरोना वायरस आया भी नहीं था, पहले ही कोरोना से मार डाले बुजुर्ग
Sat, 08 Feb 2025 12:22 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 08 Feb 2025 12:22 AM IST
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बागपत। कोरोना वायरस आया भी नहीं था, मगर कागजों में पहले ही कोरोना से बुजुर्ग को मार दिया गया। यह कारनामा पांच साल पहले बड़ौली गांव में सचिव रहे राहुल कुमार ने कर डाला। उसने वर्ष वर्ष 2019-20 में कोरोना बताकर बुजुर्ग भोंदू को मृतक दिखाकर पेंशन बंद करा दी।
बड़ौत ब्लॉक के बड़ौली गांव के रहने वाले बुजुर्ग भोंदू की पेंशन बंद हो गई तो वह करीब दो साल तक पेंशन आने का इंतजार करते रहे। पेंशन नहीं आई तो अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंचे। इसके बाद भी उनको टकराया जाता रहा। भोंदू ने परेशान होकर 22 जनवरी 2025 को डीएम अस्मिता लाल के सामने पेंशन बंद होने और अधिकारियों के सुनवाई नहीं करने की पीड़ा बताई।
डीएम ने उसकी जांच कराई तो पता चला कि भोंदू को कागजों में मरा हुआ दिखाकर पेंशन बंद की गई है। भोंदू ने बताया कि वह जिंदा है और गांव में भोंदू नाम का कोई दूसरा बुजुर्ग भी नहीं हैं। तत्कालीन सचिव राहुल को नोटिस जारी हुआ तो उसने अजीब तर्क दिया। उसने कहा कि वर्ष 2019-20 में कोरोना काल में मौत होने के कारण उसे भोंदू के मरने की जानकारी दी गई। इसलिए भोंदू के मरने की रिपोर्ट बनाकर भेज दी। जबकि यहां कोरोना वायरस का कोई मामला मार्च 2020 तक आया भी नहीं था। डीएम अस्मिता लाल ने बुजुर्ग भोंदू की तुरंत पेंशन शुरू करा दी और सचिव राहुल को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई।
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- मई 2020 में हुई थी कोरोना से पहली मौत
बागपत में कोरोना वायरस से पहली मौत मई 2020 में हुई थी। ढिकौली गांव में कैंसर से पीड़ित व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो गया था। उसका एक सप्ताह तक दिल्ली के अस्पताल में उपचार भी कराया गया था, मगर उसकी मौत हो गई थी। इस तरह मई 2020 में कोरोना से पहली मौत हुई और सचिव ने उससे पहले ही कोरोना से बुजुर्ग मरा हुआ दिखा दिया।
- बच्चों के खाद्य सुरक्षा भत्ते की राशि गटक गए शिक्षक
कोरोना काल में विद्यालय बंद होने के कारण मिड-डे-मील वितरण नहीं हो सकता था। इसलिए खाद्य सुरक्षा भत्ते के रूप में प्रति बच्चा रुपये उनके अभिभावकों के खाते में भेजे जाने थे। खाद्य सुरक्षा भत्ते की तीन किस्त जारी की गई थी जो बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेजने की प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी थी। मगर, कोरोना काल में ककड़ीपुर के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक के प्रधानाध्यापक रहे सतेंद्र पाल ने खाद्य सुरक्षा भत्ते की प्रथम व द्वितीय किस्त खुद ही खाते से निकाली ली। इसके अलावा तीसरी किस्त के रुपये भी खाते में नहीं भेजे गए। इसके लिए उनको पहले निलंबित किया गया। उसे बाद में बहाल किया गया।
इसमें अब दोबारा से बीईओ मुख्यालय पुष्पेंद्र शर्मा से जांच कराई गई। इसके बावजूद विद्यालय की स्थिति नहीं सुधरी और अभी तक खाद्य सुरक्षा भत्ते के रुपये बच्चों के अभिभावकों के खाते में नहीं भेजे गए। कंपोजिट ग्रांट खर्च करने का कोई ब्यौरा नहीं है तो रसोई माता को एक साल का मानदेय तक नहीं दिया गया। बीएसए गीता चौधरी ने प्रधानाध्यापक सतेंद्र पाल की एक वेतन वृद्धि रोकने के आदेश दिए।
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बड़ौत ब्लॉक के बड़ौली गांव के रहने वाले बुजुर्ग भोंदू की पेंशन बंद हो गई तो वह करीब दो साल तक पेंशन आने का इंतजार करते रहे। पेंशन नहीं आई तो अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंचे। इसके बाद भी उनको टकराया जाता रहा। भोंदू ने परेशान होकर 22 जनवरी 2025 को डीएम अस्मिता लाल के सामने पेंशन बंद होने और अधिकारियों के सुनवाई नहीं करने की पीड़ा बताई।
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डीएम ने उसकी जांच कराई तो पता चला कि भोंदू को कागजों में मरा हुआ दिखाकर पेंशन बंद की गई है। भोंदू ने बताया कि वह जिंदा है और गांव में भोंदू नाम का कोई दूसरा बुजुर्ग भी नहीं हैं। तत्कालीन सचिव राहुल को नोटिस जारी हुआ तो उसने अजीब तर्क दिया। उसने कहा कि वर्ष 2019-20 में कोरोना काल में मौत होने के कारण उसे भोंदू के मरने की जानकारी दी गई। इसलिए भोंदू के मरने की रिपोर्ट बनाकर भेज दी। जबकि यहां कोरोना वायरस का कोई मामला मार्च 2020 तक आया भी नहीं था। डीएम अस्मिता लाल ने बुजुर्ग भोंदू की तुरंत पेंशन शुरू करा दी और सचिव राहुल को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई।
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- मई 2020 में हुई थी कोरोना से पहली मौत
बागपत में कोरोना वायरस से पहली मौत मई 2020 में हुई थी। ढिकौली गांव में कैंसर से पीड़ित व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो गया था। उसका एक सप्ताह तक दिल्ली के अस्पताल में उपचार भी कराया गया था, मगर उसकी मौत हो गई थी। इस तरह मई 2020 में कोरोना से पहली मौत हुई और सचिव ने उससे पहले ही कोरोना से बुजुर्ग मरा हुआ दिखा दिया।
- बच्चों के खाद्य सुरक्षा भत्ते की राशि गटक गए शिक्षक
कोरोना काल में विद्यालय बंद होने के कारण मिड-डे-मील वितरण नहीं हो सकता था। इसलिए खाद्य सुरक्षा भत्ते के रूप में प्रति बच्चा रुपये उनके अभिभावकों के खाते में भेजे जाने थे। खाद्य सुरक्षा भत्ते की तीन किस्त जारी की गई थी जो बच्चों के अभिभावकों के खाते में भेजने की प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी थी। मगर, कोरोना काल में ककड़ीपुर के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक के प्रधानाध्यापक रहे सतेंद्र पाल ने खाद्य सुरक्षा भत्ते की प्रथम व द्वितीय किस्त खुद ही खाते से निकाली ली। इसके अलावा तीसरी किस्त के रुपये भी खाते में नहीं भेजे गए। इसके लिए उनको पहले निलंबित किया गया। उसे बाद में बहाल किया गया।
इसमें अब दोबारा से बीईओ मुख्यालय पुष्पेंद्र शर्मा से जांच कराई गई। इसके बावजूद विद्यालय की स्थिति नहीं सुधरी और अभी तक खाद्य सुरक्षा भत्ते के रुपये बच्चों के अभिभावकों के खाते में नहीं भेजे गए। कंपोजिट ग्रांट खर्च करने का कोई ब्यौरा नहीं है तो रसोई माता को एक साल का मानदेय तक नहीं दिया गया। बीएसए गीता चौधरी ने प्रधानाध्यापक सतेंद्र पाल की एक वेतन वृद्धि रोकने के आदेश दिए।