{"_id":"6269862f881b446ccb6531e3","slug":"clearance-for-delhi-dehradun-economic-corridor-baghpat-news-mrt586314740","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली-देहरादून इकॉनमिक कॉरिडोर का रास्ता होने लगा साफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली-देहरादून इकॉनमिक कॉरिडोर का रास्ता होने लगा साफ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का मुआवजा लेने को एडीएम के पास बढ़ने लगी फाइल
- जमीन का 32 गांवों के 5286 किसानों को दिया जाना है 824 करोड़ रुपये मुआवजा, पहले रुचि नहीं दिखा रहे थे किसान
- 312 किसानों ने 108 करोड़ रुपये मुआवजा लिया, एक ही महीने में 160 किसान मुआवजा लेने पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के बनने का रास्ता धीरे-धीरे साफ हो रहा है। एक महीने पहले तक कॉरिडोर के अधिग्रहण की गई जमीन का किसान मुआवजा लेने में रुचि नहीं दिखा रहे थे, वहीं अब इसमें काफी तेजी आई है। एक साल में करीब 150 किसानों ने मुआवजा लिया था, वहीं एक ही महीने में 160 किसानों ने मुआवजा ले लिया है। मुआवजा लेने वाले किसान अपने खेतों में कार्य शुरू कराने के लिए तैयार है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को दो चरण में बनाया जाना है। पहला चरण दिल्ली बॉर्डर से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे तक होगा जबकि दूसरा चरण ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से देहरादून तक है। दिल्ली बॉर्डर से ईपीई तक निर्माण का रास्ता पूरी तरह से साफ है, क्योंकि उसका निर्माण नेशनल हाईवे के ऊपर पिलर पर होना है। इससे आगे के निर्माण के लिए बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इस कॉरिडोर के लिए बागपत के 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन भी अधिग्रहीत की गई है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। मगर, एक महीने पहले तक केवल 150 किसानों ने मुआवजा लेने में रुचि दिखाई दिखाई थी। मुआवजा लेने के लिए किसान नहीं पहुंच रहे थे और इस कारण ही कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होता नहीं दिख रहा था। अब एक ही महीने में करीब 160 किसानों ने मुआवजा लिया है। इस तरह अभी तक 108 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। अधिकारियों के पास अब काफी फाइल मुआवजा लेने के लिए किसान लगा रहे है, जिससे जल्द से मुआवजा मिल सके।
अपने खेतों से कार्य शुरू कराने को तैयार कुछ किसान
मौजिजाबाद नांगल के रहने वाले किसान अशोक कुमार ने बताया कि उनकी जमीन इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत की गई थी। अपनी जमीन का उन्होंने मुआवजा ले लिया है। जहां तक मुआवजा बढ़ाने की बात है तो उसकी नियमानुसार प्रक्रिया होगी। हाईवे का निर्माण कार्य शुरू होना था और हम अपने खेतों से कार्य शुरू कराएंगे। बाघु गांव के कर्मबीर ने बताया कि हमारी जमीन का मुआवजा मिल गया है। अब इस मुआवजा को किसी अन्य कार्य में लगाया जाएगा। कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू कराने से कोई आपत्ति नहीं है।
विज्ञापन
पहले मुआवजा लेने में किसान काफी कम रुचि दिखा रहे थे। लेकिन अब कुछ दिनों से स्थिति बदल गई है और मुआवजे के लिए फाइलों की लाइन लगी है। मुआवजा बढ़ाकर मांग रहे किसानों को यह भी बताया गया है कि इसमें अधिकारियों के स्तर से कुछ नहीं होना है। यहां से मुआवजा लेकर भी वह कोर्ट में जा सकते है। - अमित कुमार, एडीएम
विज्ञापन
- जमीन का 32 गांवों के 5286 किसानों को दिया जाना है 824 करोड़ रुपये मुआवजा, पहले रुचि नहीं दिखा रहे थे किसान
- 312 किसानों ने 108 करोड़ रुपये मुआवजा लिया, एक ही महीने में 160 किसान मुआवजा लेने पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के बनने का रास्ता धीरे-धीरे साफ हो रहा है। एक महीने पहले तक कॉरिडोर के अधिग्रहण की गई जमीन का किसान मुआवजा लेने में रुचि नहीं दिखा रहे थे, वहीं अब इसमें काफी तेजी आई है। एक साल में करीब 150 किसानों ने मुआवजा लिया था, वहीं एक ही महीने में 160 किसानों ने मुआवजा ले लिया है। मुआवजा लेने वाले किसान अपने खेतों में कार्य शुरू कराने के लिए तैयार है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को दो चरण में बनाया जाना है। पहला चरण दिल्ली बॉर्डर से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे तक होगा जबकि दूसरा चरण ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से देहरादून तक है। दिल्ली बॉर्डर से ईपीई तक निर्माण का रास्ता पूरी तरह से साफ है, क्योंकि उसका निर्माण नेशनल हाईवे के ऊपर पिलर पर होना है। इससे आगे के निर्माण के लिए बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इस कॉरिडोर के लिए बागपत के 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन भी अधिग्रहीत की गई है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। मगर, एक महीने पहले तक केवल 150 किसानों ने मुआवजा लेने में रुचि दिखाई दिखाई थी। मुआवजा लेने के लिए किसान नहीं पहुंच रहे थे और इस कारण ही कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होता नहीं दिख रहा था। अब एक ही महीने में करीब 160 किसानों ने मुआवजा लिया है। इस तरह अभी तक 108 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। अधिकारियों के पास अब काफी फाइल मुआवजा लेने के लिए किसान लगा रहे है, जिससे जल्द से मुआवजा मिल सके।
विज्ञापन
अपने खेतों से कार्य शुरू कराने को तैयार कुछ किसान
मौजिजाबाद नांगल के रहने वाले किसान अशोक कुमार ने बताया कि उनकी जमीन इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत की गई थी। अपनी जमीन का उन्होंने मुआवजा ले लिया है। जहां तक मुआवजा बढ़ाने की बात है तो उसकी नियमानुसार प्रक्रिया होगी। हाईवे का निर्माण कार्य शुरू होना था और हम अपने खेतों से कार्य शुरू कराएंगे। बाघु गांव के कर्मबीर ने बताया कि हमारी जमीन का मुआवजा मिल गया है। अब इस मुआवजा को किसी अन्य कार्य में लगाया जाएगा। कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू कराने से कोई आपत्ति नहीं है।
विज्ञापन
पहले मुआवजा लेने में किसान काफी कम रुचि दिखा रहे थे। लेकिन अब कुछ दिनों से स्थिति बदल गई है और मुआवजे के लिए फाइलों की लाइन लगी है। मुआवजा बढ़ाकर मांग रहे किसानों को यह भी बताया गया है कि इसमें अधिकारियों के स्तर से कुछ नहीं होना है। यहां से मुआवजा लेकर भी वह कोर्ट में जा सकते है। - अमित कुमार, एडीएम