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बाल श्रम के अंगारे में दहक रहा बचपन, जिम्मेदार खामोश
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11 माह में केवल 18 बाल श्रमिक ही हुए बाल श्रम से मुक्त
हाथों में किताबें, बैग, पेन की रखने की बजाएं जूठन धोने का काम कर रहे बच्चे
बाल श्रमिकों को नहीं मालूम अभियान के मायने, श्रम विभाग भी उदासीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जिस उम्र में हाथों में किताबें, बैग, पैन और खेलकूद का सामान होना चाहिए, उस उम्र में बच्चे जूठन धोने और बोझ ढोने का काम कर रहे है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 11 माह में बाल श्रम विभाग मात्र 18 बच्चों को ही बाल श्रम से मुक्त करा पाया है। इस कारण शासन की योजनाओं का नौनिहालों को लाभ नहीं मिला रहा है। श्रम विभाग भी इसमें उदासीन रवैया अपना रहा है। यही वजह है कि आज भी बाल श्रम फलफूल रहा है।
हर साल 13 जून को बाल श्रम उन्नमूलन दिवस मनाया जाता है। इस दौरान गोष्ठी और जागरूकता अभियान के दौरान बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। मगर, इसके बाद इन दावों पर अमल भी न के बराबर होता है। वर्ष 2021 के अगस्त माह से लेकर अब तक केवल 18 बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यदि बाल श्रम रोकने के लिए सही तरीके से कदम उठाया गया होता तो बच्चों की संख्या में इजाफा हो गया होता।
18 बच्चों को अभियान के दौरान भेजा स्कूल
श्रम विभाग के अधिकारियों की मानें तो समय समय पर अभियान चलाए जाते हैं। 18 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है। इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। संबधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही बीएसए की मदद से सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों का दाखिला भी कराया गया है। बाल कल्याण समिति के माध्यम से बच्चों का पुनर्वासन कराया जाता है। उनकी काउंसलिंग भी कराई जाती है। यदि किसी बाल श्रमिक का पिता श्रमिक है तो उसका पंजीकरण कर विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाता है। नो चाइल्ड लेबर के तहत जून माह में अभियान चलाया जाएगा।
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समय पर बाल श्रम को रोकने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। चौदह साल से कम उम्र का बच्चा जिस जगह कार्य करता मिलता है, उस दुकानदार को नोटिस दिया जाता है। काउंसलिंग के साथ बच्चों को बीएसए की मदद से दाखिला भी कराया जाता है। - रेखा चौहान, सदस्य, बाल कल्याण समिति।
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हाथों में किताबें, बैग, पेन की रखने की बजाएं जूठन धोने का काम कर रहे बच्चे
बाल श्रमिकों को नहीं मालूम अभियान के मायने, श्रम विभाग भी उदासीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जिस उम्र में हाथों में किताबें, बैग, पैन और खेलकूद का सामान होना चाहिए, उस उम्र में बच्चे जूठन धोने और बोझ ढोने का काम कर रहे है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 11 माह में बाल श्रम विभाग मात्र 18 बच्चों को ही बाल श्रम से मुक्त करा पाया है। इस कारण शासन की योजनाओं का नौनिहालों को लाभ नहीं मिला रहा है। श्रम विभाग भी इसमें उदासीन रवैया अपना रहा है। यही वजह है कि आज भी बाल श्रम फलफूल रहा है।
हर साल 13 जून को बाल श्रम उन्नमूलन दिवस मनाया जाता है। इस दौरान गोष्ठी और जागरूकता अभियान के दौरान बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। मगर, इसके बाद इन दावों पर अमल भी न के बराबर होता है। वर्ष 2021 के अगस्त माह से लेकर अब तक केवल 18 बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यदि बाल श्रम रोकने के लिए सही तरीके से कदम उठाया गया होता तो बच्चों की संख्या में इजाफा हो गया होता।
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18 बच्चों को अभियान के दौरान भेजा स्कूल
श्रम विभाग के अधिकारियों की मानें तो समय समय पर अभियान चलाए जाते हैं। 18 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है। इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। संबधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही बीएसए की मदद से सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों का दाखिला भी कराया गया है। बाल कल्याण समिति के माध्यम से बच्चों का पुनर्वासन कराया जाता है। उनकी काउंसलिंग भी कराई जाती है। यदि किसी बाल श्रमिक का पिता श्रमिक है तो उसका पंजीकरण कर विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाता है। नो चाइल्ड लेबर के तहत जून माह में अभियान चलाया जाएगा।
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समय पर बाल श्रम को रोकने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। चौदह साल से कम उम्र का बच्चा जिस जगह कार्य करता मिलता है, उस दुकानदार को नोटिस दिया जाता है। काउंसलिंग के साथ बच्चों को बीएसए की मदद से दाखिला भी कराया जाता है। - रेखा चौहान, सदस्य, बाल कल्याण समिति।