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प्रतिद्वंद्वी राज नारायण का विरोध नहीं करने की अपील करते थे चौधरी साहब
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बागपत। चुनाव के इस दौर में जहां प्रत्याशियों का विरोध होने पर विपक्षी खुश होते है। मगर, चुनाव का एक वह दौर वह भी था, जब अपने प्रतिद्वंद्वी का विरोध नहीं करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह खुद अपील करते थे। उनकी अपील का असर भी होता था कि कोई भी विपक्षी का विरोध नहीं करता था और उनको भी प्रचार के दौरान पूरा सम्मान दिया जाता था।
वर्ष 1977 में मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। इस सरकार में चौधरी चरण सिंह गृहमंत्री बने थे। चौधरी चरण सिंह के खेमे के राजनारायण सिंह को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था। चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री बनने के दौरान भी राजनारायण सिंह उनके साथ रहे। मगर, वर्ष 1984 के चुनाव में बागपत सीट से चौधरी चरण सिंह के सामने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से राजनारायण सिंह चुनाव में उतर गए। इस पर क्षेत्र के लोगों ने विरोध जताया। ऐसे में चौधरी चरण सिंह को लगने लगा कि जब राजनारायण प्रचार के लिए जाएंगे, तब उनका विरोध करते हुए कोई घटना हो सकती है। इसलिए चौधरी चरण सिंह ने अपने प्रचार के लिए जहां भी बैठक की, वहीं राजनारायण का विरोध नहीं करने की अपील करते थे। उसका असर भी दिखाई दिया और राजनारायण सिंह का विरोध पूरी तरह से बंद हो गया।
तुगाना गांव के बुजुर्ग देशपाल बताते हैड्ड कि उनके घर राजनारायण आए तो उनका विरोध करने की जगह बैठाकर चाय पिलाई गई। यह केवल चरण सिंह की विरोध नहीं करने की अपील के कारण किया गया। कहते हैड्ड कि अब प्रत्याशी का विरोध होने पर विपक्षी खुश होते हैड्ड, जबकि इस तरह करने की जगह अपनी बात को तरीके से रखना चाहिए।
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वर्ष 1977 में मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। इस सरकार में चौधरी चरण सिंह गृहमंत्री बने थे। चौधरी चरण सिंह के खेमे के राजनारायण सिंह को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था। चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री बनने के दौरान भी राजनारायण सिंह उनके साथ रहे। मगर, वर्ष 1984 के चुनाव में बागपत सीट से चौधरी चरण सिंह के सामने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से राजनारायण सिंह चुनाव में उतर गए। इस पर क्षेत्र के लोगों ने विरोध जताया। ऐसे में चौधरी चरण सिंह को लगने लगा कि जब राजनारायण प्रचार के लिए जाएंगे, तब उनका विरोध करते हुए कोई घटना हो सकती है। इसलिए चौधरी चरण सिंह ने अपने प्रचार के लिए जहां भी बैठक की, वहीं राजनारायण का विरोध नहीं करने की अपील करते थे। उसका असर भी दिखाई दिया और राजनारायण सिंह का विरोध पूरी तरह से बंद हो गया।
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तुगाना गांव के बुजुर्ग देशपाल बताते हैड्ड कि उनके घर राजनारायण आए तो उनका विरोध करने की जगह बैठाकर चाय पिलाई गई। यह केवल चरण सिंह की विरोध नहीं करने की अपील के कारण किया गया। कहते हैड्ड कि अब प्रत्याशी का विरोध होने पर विपक्षी खुश होते हैड्ड, जबकि इस तरह करने की जगह अपनी बात को तरीके से रखना चाहिए।
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