{"_id":"65c3eb54be0e3ca5220c0e67","slug":"chaudhary-jayant-singh-became-the-political-pivot-of-western-up-baghpat-news-c-28-1-smrt1010-109689-2024-02-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: पश्चिमी यूपी की राजनीतिक धुरी बने चौधरी जयंत सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: पश्चिमी यूपी की राजनीतिक धुरी बने चौधरी जयंत सिंह
Thu, 08 Feb 2024 02:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Thu, 08 Feb 2024 02:13 AM IST
विज्ञापन
जयंत चौधरी
बागपत। लोकसभा चुनाव से पहले रालोद सुप्रीमो चौधरी जयंत सिंह पश्चिमी यूपी की राजनीतिक धुरी बन गए हैं। भाजपा के साथ बातचीत की चर्चा के बीच हर किसी की नजर उनके अंतिम फैसले पर टिकी है। सपा और कांग्रेस भी उनको मनाने में जुट गई है। वह पश्चिमी यूपी में अपने समर्थक जाट मतदाताओं के जरिए चुनाव परिणाम को प्रभावित करने में सक्षम माने जाते हैं।
वेस्ट यूपी की बागपत, कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बिजनौर, नोएडा, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, पीलीभीत, बरेली, आंवला, बदांयू, मथुरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़, हाथरस सीटों पर जाट मतदाता काफी संख्या में हैं। वर्तमान में अधिकतर जाट मतदाता रालोद के समर्थक माने जाते हैं, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करते हैं।
ऐसे में रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की एनडीए के साथ बातचीत शुरू हुई तो सपा और कांग्रेस भी जयंत को मनाने में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि जयंत के साथ तय हुई सात सीटों में जहां अभी तक तीन पर अपने प्रत्याशी उतारने का दबाव बना रही थी, वहीं अब वह रालोद के प्रत्याशी ही उतारने के लिए राजी हो गई है, जबकि कांग्रेस भी राजस्थान में एक लोकसभा सीट देने को तैयार है। अब हर किसी की नजर जयंत के अंतिम फैसले पर टिकी है। (संवाद)
विज्ञापन
000
-भावनात्मक जुड़ाव चाहता है हैंडपंप निशान
रालोद और हैंडपंप चुनाव चिह्न के साथ काफी सीटों पर जाट भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। इसलिए ही माना जा रहा है कि सपा अपने प्रत्याशियों को रालोद के सिंबल पर उतारना चाहती थी। वह कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर सीट पर अपने प्रत्याशी को रालोद के सिंबल पर उतारने की पूरी तैयारी कर चुके थे। इस पर ही विवाद बढ़ा और सपा का यह दांव उस पर ही भारी पड़ गया।
000
-एनडीए संग गए तो छपरौली में जल्द बड़ा कार्यक्रम
जयंत अगर एनडीए के साथ चले जाते हैं तो चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा के साथ ही छपरौली में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह की मूर्ति का अनावरण होगा और हरियाणा-यूपी को जोड़ने के लिए यमुना पर बने पुल का उद्घाटन हो सकता है।
विज्ञापन
वेस्ट यूपी की बागपत, कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बिजनौर, नोएडा, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, पीलीभीत, बरेली, आंवला, बदांयू, मथुरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़, हाथरस सीटों पर जाट मतदाता काफी संख्या में हैं। वर्तमान में अधिकतर जाट मतदाता रालोद के समर्थक माने जाते हैं, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करते हैं।
विज्ञापन
ऐसे में रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की एनडीए के साथ बातचीत शुरू हुई तो सपा और कांग्रेस भी जयंत को मनाने में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि जयंत के साथ तय हुई सात सीटों में जहां अभी तक तीन पर अपने प्रत्याशी उतारने का दबाव बना रही थी, वहीं अब वह रालोद के प्रत्याशी ही उतारने के लिए राजी हो गई है, जबकि कांग्रेस भी राजस्थान में एक लोकसभा सीट देने को तैयार है। अब हर किसी की नजर जयंत के अंतिम फैसले पर टिकी है। (संवाद)
विज्ञापन
000
-भावनात्मक जुड़ाव चाहता है हैंडपंप निशान
रालोद और हैंडपंप चुनाव चिह्न के साथ काफी सीटों पर जाट भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। इसलिए ही माना जा रहा है कि सपा अपने प्रत्याशियों को रालोद के सिंबल पर उतारना चाहती थी। वह कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर सीट पर अपने प्रत्याशी को रालोद के सिंबल पर उतारने की पूरी तैयारी कर चुके थे। इस पर ही विवाद बढ़ा और सपा का यह दांव उस पर ही भारी पड़ गया।
000
-एनडीए संग गए तो छपरौली में जल्द बड़ा कार्यक्रम
जयंत अगर एनडीए के साथ चले जाते हैं तो चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा के साथ ही छपरौली में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह की मूर्ति का अनावरण होगा और हरियाणा-यूपी को जोड़ने के लिए यमुना पर बने पुल का उद्घाटन हो सकता है।