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जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव के लिए होगा घमासान
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एक सदस्य का इस्तीफा दिलाकर अनुसूचित जाति की बनाई जाएगी जिला पंचायत सदस्य
अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे कुर्सी पर बैठाने की भाजपा की रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिला पंचायत की राजनीति दोबारा से गर्माने वाली है। अब विधानसभा व विधान परिषद के चुनाव होते ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसकी रणनीति बनाई जा रही है। जिससे इस बार भाजपा किसी भी तरह से फेल न होने पाए। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव हो सकता है।
बागपत में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर पिछले साल काफी हंगामा हुआ था। कभी रालोद की जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रत्याशी रही ममता किशोर के भाजपा में शामिल होकर सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह के साथ फोटो वायरल हुए तो कभी उसका पर्चा उठाने के लिए फर्जी महिला पहुंच गई। ममता किशोर के सामने बबली देवी ने चुनाव जरूर लड़ा, लेकिन भाजपा नेता नामांकन कराने में उसके साथ नहीं रहे। उसके साथ दमदारी से भी खड़े नहीं हुए थे। इन सभी के बीच यह सीट रालोद के पास पहुंच गई थी। ममता किशोर जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं। ममता किशोर के अध्यक्ष बनने के बाद जिला पंचायत सदस्यों ने विकास कार्यों की सूची सौंपी थी, लेकिन कई महीने तक उस पर काम नहीं हुआ था। इससे जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ रोष जताया था और उनके तेवर तभी से बगावती हो रहे हैं।
जिला पंचायत में विकास कार्य समय पर नहीं कराए जा रहे हैं। लोग उनके लिए जिला पंचायत सदस्यों को पकड़ती है। जिला पंचायत सदस्यों के बगावती तेवर होने से भाजपा ने अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव के लिए रणनीति बना ली है। किसी सामान्य सीट से सदस्य को इस्तीफा दिलाकर अनुसूचित महिला को चुनाव लड़ाया जाएगा। ऐसी सीट पर यह दांव खेला जाएगा, जहां से भाजपा का कैडर वोट उसे आसानी से जीत दिला सके। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उस भाजपा खेमे की अनुसूचित जाति की महिला सदस्य को अध्यक्ष की कुर्सी के लिए आगे लाया जाएगा। सदस्य के इस्तीफा देने से लेकर दोबारा चुनाव कराने तक अविश्वास प्रस्ताव लाने का समय भी पूरा हो जाएगा। इस तरह से जिला पंचायत की राजनीति में अंदरूनी दांवपेच चले जा रहे हैं।
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अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे कुर्सी पर बैठाने की भाजपा की रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिला पंचायत की राजनीति दोबारा से गर्माने वाली है। अब विधानसभा व विधान परिषद के चुनाव होते ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसकी रणनीति बनाई जा रही है। जिससे इस बार भाजपा किसी भी तरह से फेल न होने पाए। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव हो सकता है।
बागपत में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर पिछले साल काफी हंगामा हुआ था। कभी रालोद की जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रत्याशी रही ममता किशोर के भाजपा में शामिल होकर सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह के साथ फोटो वायरल हुए तो कभी उसका पर्चा उठाने के लिए फर्जी महिला पहुंच गई। ममता किशोर के सामने बबली देवी ने चुनाव जरूर लड़ा, लेकिन भाजपा नेता नामांकन कराने में उसके साथ नहीं रहे। उसके साथ दमदारी से भी खड़े नहीं हुए थे। इन सभी के बीच यह सीट रालोद के पास पहुंच गई थी। ममता किशोर जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं। ममता किशोर के अध्यक्ष बनने के बाद जिला पंचायत सदस्यों ने विकास कार्यों की सूची सौंपी थी, लेकिन कई महीने तक उस पर काम नहीं हुआ था। इससे जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ रोष जताया था और उनके तेवर तभी से बगावती हो रहे हैं।
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जिला पंचायत में विकास कार्य समय पर नहीं कराए जा रहे हैं। लोग उनके लिए जिला पंचायत सदस्यों को पकड़ती है। जिला पंचायत सदस्यों के बगावती तेवर होने से भाजपा ने अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव के लिए रणनीति बना ली है। किसी सामान्य सीट से सदस्य को इस्तीफा दिलाकर अनुसूचित महिला को चुनाव लड़ाया जाएगा। ऐसी सीट पर यह दांव खेला जाएगा, जहां से भाजपा का कैडर वोट उसे आसानी से जीत दिला सके। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उस भाजपा खेमे की अनुसूचित जाति की महिला सदस्य को अध्यक्ष की कुर्सी के लिए आगे लाया जाएगा। सदस्य के इस्तीफा देने से लेकर दोबारा चुनाव कराने तक अविश्वास प्रस्ताव लाने का समय भी पूरा हो जाएगा। इस तरह से जिला पंचायत की राजनीति में अंदरूनी दांवपेच चले जा रहे हैं।
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