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क्षेत्र में नहर, नदी और माइनरों का जाल, लेकिन जल संकट  

Tue, 10 Jan 2017 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Tue, 10 Jan 2017 12:13 AM IST
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Canal in the area, the river and the network of minor, but the water crisis
नदी - फोटो : amar ujala
बागपत। रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है पानी। इसके बिना सब सूना है, लेकिन बागपत में भविष्य ही नहीं, वर्तमान का भी सबसे बड़ा संकट बनकर पानी ही उभर रहा है। खेतों के लिए किसानों को पानी नहीं मिलता और घरों में पीने के लिए स्वच्छ पानी नहीं। सारे ब्लाक डार्क जोन में है। चौगाना क्षेत्र में हिंडन और कृष्णा जहरीली बनकर लोगों को मुश्किलों में डाले हैं। एक नहीं चौगामा क्षेत्र के दर्जनभर से अधिक गांव कैंसर की चपेट में हैं। त्वचा की बीमारी फैल रही है। विकलांगता ने कई गांवों को अपने चपेट में ले लिया है। विधानसभा चुनाव में खेती और किसानी के मुद्दों में पानी का सवाल भी उठेगा। किसान कहते हैं क्षेत्र में नहर, नदी और माइनरों का जाल बिछाया है, लेकिन वक्त पर किसानों को पानी क्यों नहीं मिलता। एनजीटी ने 29 गांवों के चार सौ से अधिक हैँडपंप उखाड़ने का आदेश दिया, इनमें दो सौ से अधिक हैंडपंप उखाड़े जा चुके हैं। गांव दर गांव हंगामे हुए। लोगों ने कहा उन्हें पहले शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो, इसके बाद ही हैंडपंप उखाड़े जाए। 
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सिंचाई के लिए क्या है व्यवस्था
बागपत में पूर्वी यमुना नहर की लंबाई 55.424 किमी है। कई साल से पूर्वी यमुना नहर की सफाई नहीं हुई। किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिस वक्त इस नहर से पानी की सबसे बड़ी उम्मीद होती है, तभी इसमें सिंचाई के लिए पानी नहीं आता। इसके बाद बागपत में रजवाहों की संख्या 17 हैं। इनकी लंबाई है करीब 274 किमी। छोटे-बड़े माइनर बागपत में हैं 23, इनकी लंबाई है करीब 105 किमी। बागपत की 62727 हेक्टेयर भूमि के लिए  इन नहरों, रजवाहों और माइनरों का जाल बिछाया है, लेकिन भूमि की प्यास नहीं बुझती। किसानों के अनुसार पानी फाइलों में ही आता है, धरातल पर सिंचाई विभाग ने कोई अच्छे इंतजाम नहीं किए हैं। इस कारण क्षेत्रीय लोगों को मुश्किलें उठानी पड़ती है। 
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प्रदूषित पानी पी रहे हैं बागपत के 29 गांव के लोग
जिले के 29 गांव में सरकारी हैंडपंपों से प्रदूषित जल आने की पुष्टि हो गई है। एनजीटी ने इन गांवों के करीब 413 हैंडपंपों को उखाड़ने के आदेश दिए हैं। जल निगम और प्रशासन की टीम गांव दर गांव जाकर हैंडपंप उखड़वा रही है, लेकिन जगह-जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा स्वच्छ पेयजल का इंतजाम करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। लोग जहरीला पानी पीने के कारण बीमार हो रहे हैं। जिन गांवों से हैंडपंप उखाड़े हैं, वहां पानी का कोई इंतजाम नहीं किया। इस कारण अब ग्रामीण मुश्किलों से घिरे हैं। 
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लोग बोले, पानी तो सबसे बड़ा मुद्दा
ग्रामीण एवं पर्यावरण विकास संस्था के सचिव एवं जल बिरादरी के वेस्ट यूपी के संयोजक कृष्णपाल सिंह कहते हैं जल, जंगल और जमीन की बात करने वालों को वोट दें। पानी देश के भविष्य का सवाल है, जो अब पानी के विषय में नहीं सोच सकते हैं, वह कभी नहीं सोच पाएंगे। इसलिए सब लोगों को एक होकर पानी बचाने के लिए काम करना चाहिए। जनप्रतिनिधियों से भी इस बाबत अब सवाल करना बेहद जरूरी हो गया है।
दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह के अनुसार पानी सबसे बड़ा मुद्दा है, जो लोग बगैर पानी के मर रहे हैं, बीमारी मिल रही है। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके यहां कैंसर की चपेट में आने से कई सदस्य मर गए। ऐसे में जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए क्या किया। यही नहीं, जब चुनाव लड़ रहे लोग वोट मांगने आए, तब जरूर पानी का सवाल उठाया जाना चाहिए।
फैजपुर निनाना गांव के प्रधान हरेंद्र चौधरी ने कहा स्वच्छ पेयजल सबका अधिकार है। नेताओं की जिम्मेदारी है कि लोगों को पानी उपलब्ध कराएं। बागपत डार्क जोन में है। आज अगर नहीं संभला तो भविष्य पर संकट खड़ा हो जाएगा। बच्चों को पानी नहीं मिलेगा, इसलिए जरूरी है विधानसभा चुनाव पांच साल बाद आते हैं। प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह पानी के इंतजाम पर भी सवाल करें और पानी का इंतजाम कराएं। जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, समस्या का समाधान होने वाला नहीं है।


चौगामा में घर-घर आरओ
प्रदूषित पेयजल का हाल यह है कि चौगामा क्षेत्र में अब घर-घर आरओ लग रहे हैं। जिन घरों में फिल्टर पानी नहीं, वहां बीमारी बढ़ रही है। 

एसडीएम बागपत मनोज कुमार सिंह के अनुसार क्षेत्र में पानी मुख्य समस्या है, लेकिन इसे बचाने की जिम्मेदारी भी प्रत्येक व्यक्ति की है। सबमर्सेबिल के चलन से समस्या बढ़ रही है। प्रत्येक व्यक्ति को पानी के प्रति जागरूक होना चाहिए।
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