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Baghpat News: खोदाई में मिली हड्डियां, शवाधान केंद्र होने की उम्मीद
Wed, 01 Jan 2025 11:59 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Wed, 01 Jan 2025 11:59 PM IST
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बड़ौत (बागपत)। तिलवाड़ा के जंगल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए जा रहे उत्खनन में बुधवार को मृदभांड के अलावा हड्डियां भी काफी संख्या में मिली। वहां मिली हड्डियां शवाधान केंद्र की ओर इशारा कर रही है। इनकी कार्बन डेटिंग कराने के बाद पता चलेगा कि वह कितनी पुरानी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद सिंह रावत, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद भूपेंद्र सिंह फोनिया के निर्देशन में तिलवाड़ा गांव के जंगल में आला टीला पर उत्खनन कार्य किया जा रहा है। खोदाई में अभी तक छोटे मृदभांड निकल रहे थे। मगर, बुधवार को खोदाई के दौरान पुराततत्वविदों को काफी संख्या में हड्डियां मिली हैं।
इनको लेकर पुरातत्वविद, इतिहासकार एवं शोधार्थियों में काफी उत्साह है। हड्डियों का मिलना कहीं न कहीं शवाधान केंद्र की ओर इशारा कर रही है। क्योंकि सिनौली में महाभारत कालीन पुरा संपदा प्राप्त हो चुकी हैं और तिलवाड़ा इससे तकरीबन आठ किमी दूर है। सिनौली में सबसे पहली उपलब्धि 20 साल पहले हुए उत्खनन में शवाधान केंद्र का मिलना था, वहां सैकड़ों मानव कंकाल मिले थे।
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हड्डियों को कार्बन डेटिंग के लिए भेजा जाएगा
खोदाई में मिली हड्डियों को पुरातत्वविदों की टीम कार्बन डेटिंग के लिए भेजेगी, ताकि इससे इनके काल की स्पष्ट जानकारी मिल सके। इतिहासकार डॉ़ अमित राय जैन का कहना है कि महाभारत काल के साक्ष्य सिनौली से पुष्ट हो चुके हैं। योद्धाओं की टुकड़ियां यहां रहती थी, जिन्हें सिनौली में मरणोपरांत दफन किया गया। इस तरह की टुकड़ियां सिनोली के आसपास जैसे तिलवाड़ा में भी होने से इंकार नहीं किया जा सकता। मानव कंकाल अगर वहां से मिलते हैं तो यह बड़ी उपलब्धि सामने आएगी।
वर्जन-- -
खोदाई में जो हड्डियां मिली हैं, यह कितनी महत्वपूर्ण है। इनकी सही जानकारी कार्बन डेटिंग होने के बाद साफ होगी। - भूपेंद्र सिंह फोनिया, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद सिंह रावत, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद भूपेंद्र सिंह फोनिया के निर्देशन में तिलवाड़ा गांव के जंगल में आला टीला पर उत्खनन कार्य किया जा रहा है। खोदाई में अभी तक छोटे मृदभांड निकल रहे थे। मगर, बुधवार को खोदाई के दौरान पुराततत्वविदों को काफी संख्या में हड्डियां मिली हैं।
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इनको लेकर पुरातत्वविद, इतिहासकार एवं शोधार्थियों में काफी उत्साह है। हड्डियों का मिलना कहीं न कहीं शवाधान केंद्र की ओर इशारा कर रही है। क्योंकि सिनौली में महाभारत कालीन पुरा संपदा प्राप्त हो चुकी हैं और तिलवाड़ा इससे तकरीबन आठ किमी दूर है। सिनौली में सबसे पहली उपलब्धि 20 साल पहले हुए उत्खनन में शवाधान केंद्र का मिलना था, वहां सैकड़ों मानव कंकाल मिले थे।
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हड्डियों को कार्बन डेटिंग के लिए भेजा जाएगा
खोदाई में मिली हड्डियों को पुरातत्वविदों की टीम कार्बन डेटिंग के लिए भेजेगी, ताकि इससे इनके काल की स्पष्ट जानकारी मिल सके। इतिहासकार डॉ़ अमित राय जैन का कहना है कि महाभारत काल के साक्ष्य सिनौली से पुष्ट हो चुके हैं। योद्धाओं की टुकड़ियां यहां रहती थी, जिन्हें सिनौली में मरणोपरांत दफन किया गया। इस तरह की टुकड़ियां सिनोली के आसपास जैसे तिलवाड़ा में भी होने से इंकार नहीं किया जा सकता। मानव कंकाल अगर वहां से मिलते हैं तो यह बड़ी उपलब्धि सामने आएगी।
वर्जन
खोदाई में जो हड्डियां मिली हैं, यह कितनी महत्वपूर्ण है। इनकी सही जानकारी कार्बन डेटिंग होने के बाद साफ होगी। - भूपेंद्र सिंह फोनिया, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद