चर्चित कफन चोरी का मामला: पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ दर्ज किया था मुकदमा, अब सामने आई सच्चाई
कफन चोरी का मामला फर्जी निकला है। अब ऐसे में तत्कालीन पुलिस कर्मियों पर सवाल उठ रहा है। जानिए आखिर पूरा मामला क्या था।
विस्तार
बागपत जनपद में बड़ौत का चर्चित रहा कफन चोरी का मामला पूरी तरह से फर्जी निकला है। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस ने चार्जशीट में चोरी और धोखाधड़ी की धाराओं को हटा दिया है। केवल कोरोना महामारी अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए संबंधित धाराओं में चार्जशीट लगाई है। ऐसे में बड़ौत थाने के तत्कालीन पुलिस कर्मियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहा है।
बड़ौत कोतवाली पुलिस ने नौ मई 2021 को प्रवीण जैन पुत्र श्रीपाल जैन निवासी नई मंडी बड़ौत, आशीष जैन पुत्र उदित जैन निवासी नई मंडी बड़ौत, श्रवण कुमार शर्मा पुत्र राममोहन शर्मा निवासी शबगा थाना छपरौली, ऋषभ जैन पुत्र अरविंद जैन निवासी पट्टी चौधरान खारी कुआं बड़ौत, राजू शर्मा पुत्र ईश्वर शर्मा निवासी फूस वाली मस्जिद के पीछे, बबलू पुत्र वेदप्रकाश कश्यप निवासी गुराना रोड बड़ौत और शाहरुख खान पुत्र मुबीन निवासी फूंस वाली मस्जिद के पीछे बड़ौत को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था कि यह लोग श्मशान से कफन चोरी करते थे। इसके बाद चोरी के कपड़ों को धुलाई व प्रेस करके उन पर ग्वालियर की कंपनी का मार्क लगाकर महंगे रेट पर बेचते थे।
पुलिस का कहना था कि इनमें कई कफन कोरोना संक्रमितों के होते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 520 सफेद व पीली चादर, 127 कुर्ते, 140 कमीज, 34 धोती, 12 रंगीन गर्म शॉल, 52 रंग-बिरंगी धोती, तीन रिबन के पैकेट, 158 रिबन ग्वालियर, 122 स्टीकर ग्वालियर कंपनी के बरामद दिखाए थे।
धोखाधड़ी व चोरी की धाराएं हटाईं, कोरोना महामारी अधिनियम की बची
पुलिस ने जिनको पकड़ा था, उनमें प्रवीण जैन की कपड़ों की दुकान है। प्रवीण की पत्नी जयश्री ने मामले में एडीजी को प्रार्थना पत्र देकर बागपत पुलिस पर मनगढ़ंत कहानी रचने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कई बिंदुओं पर पुलिस के खुलासे पर सवाल उठाए थे। इसके बाद हापुड़ एएसपी सर्वेश मिश्रा से जांच कराई गई। बाद में जांच को गाजियाबाद अपराध शाखा को सौंपा गया। अपराध शाखा के एसआई नासिर हुसैन की जांच में श्मशान घाट के चौकीदार, लकड़ी विक्रेता, ग्वालियर की कंपनी के मालिक समेत अन्य के बयान दर्ज किए गए। इनके बयानों में यह पुष्ट नहीं हो सका कि कफन चोरी किए जाते थे। बल्कि ग्वालियर की जिस कंपनी के स्टीकर कपड़ों पर लगाने की बात कही गई थी, उस कंपनी के मालिक ने अपने स्टीकर होने से इंकार कर दिया। इसलिए धोखाधड़ी व चोरी की धाराएं हटा दी गई और कोरोना महामारी अधिनियम की धाराएं रखी गई है।
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दिल्ली के चांदनी चौक व सीलमपुर से खरीदा गया था कपड़ा
इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए प्रवीण जैन ने विवेचक को कुछ बिल उपलब्ध कराए। इन बिल के आधार पर जांच की गई तो यह पुष्ट हो गया कि कुछ कपड़ा चांदनी चौक दिल्ली, कुछ सीलमपुर दिल्ली व अन्य बड़ौत के व्यापारियों से खरीदा गया था। इस तरह यह भी विवेचना में बड़ा आधार बनाया गया। इसके आधार पर ही धाराएं हटाई गई।
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पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह से व्यापारी व अन्य का उत्पीड़न किया है। उनको कफन चोर बताकर देशभर में बदनामी की गई, जबकि हम लोग शुरूआत से बता रहे थे कि यह पूरा मामला गलत है। अब पुलिस की जांच में यह साफ हो गया है। इस पर विचार किया जा रहा है कि मुकदमा दर्ज कराने में शामिल पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएं। - राजुद्दीन, आरोपी पक्ष के वकील
यह मामला मेरी जानकारी में तब आया था, जब इसकी जांच हापुड़ पुलिस कर रही थी। बाद में इसकी विवेचना गाजियाबाद पुलिस कर रही थी। अभी मैने चार्जशीट नहीं देखी है। चार्जशीट देखकर ही बता सकता हूं कि पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कोई जांच चल रही है या इसमें आगे क्या कार्रवाई की जा सकती है। - नीरज कुमार जादौन, एसपी