उफान पर कृष्णा नदी: चिंता में कई गांवों के लोग, फसलें हुईं जमलग्न, दहशत में रातें काट रहे किसान
Baghpat News : बागपत में कृष्णा नदी उफान पर है। वहीं, सैकड़ों किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं हैं। उधर, कई गांवों के लोगों की रातें भी दहशत में कट रही हैं।
विस्तार
बारिश के चलते बरनावा के निकट कृष्णा नदी भारी उफान पर आ गई है। सोमवार की रात्रि बढ़ा नदी का जल स्तर शेखपुरा गांव की सीम तक पहुंच गया। जिससे ग्रामीण चिंता में हैं। वहीं, जंगल में किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गईं।
बागपत में बरनावा के निकट कई दिनों से हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। जिससे वहां के आसपास के किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं। वहीं, सोमवार की रात से कृष्णा नदी भी रूद्र रूप में आ गई। शेखपुरा के सामने दोनों नदियों के संगम है।
डेरा सच्चा सौदा आश्रम के सामने स्थित शेखपुरा वन्य क्षेत्र मार्ग व रमजान, फेजाब, नसीरुद्दीन निवासी बरनावा, इदरीश, रूढे, हरिओम, रणबीर, रणजीत, जयपाल, राजपाल, श्याम सिंह निवासी शेखपुरा की सैकड़ों बीघा धान, ज्वार, मक्का, फूल, मिर्च आदि की फसलें जलमग्न हो गईं।
उधर, नदी का पानी शेखपुरा गांव की सीमा तक पहुंच गया, जिससे ग्रामीण चिंतित हैं वे रात तक गांव में नदी का पानी घुसने की आशंका जता रहे हैं। ग्राम प्रधान पति नूरहसन ने बताया कि कृष्णा नदी का पानी गांव की सीमा तक पहुंचने की सूचना प्रशाशनिक अधिकारियों को दे दी गई है।
वहीं, शाहपुर बाणगंगा में हिंडन नदी का पानी गांव की सीमा तक पहुंच गया है। यहां भी प्रवेंद्र गिरी, नीरज, नरेंद्र, श्रवण, लीलू, जसवंत, दुलीचंद सहित अनेकों किसानों की धान, ज्वार, बाजरा, ईंख, खीरे की फसलें जलमग्न हो गईं हैं।
यह भी पढ़ें: Meerut: भाजपा नेताओं ने किया कोतवाली का घेराव, जमकर हंगामा, पुलिस पर लगाया बदसलूकी का आरोप, ये है पूरा मामला
आश्रम के सेवादार ने लगा रहे मिट्टी के बैग
कृष्णा नदी का जलस्तर बढ़ने से डेरा सच्चा सौदा आश्रम के सेवादारों ने अपनी फसल के बचाव के लिए मिट्टी के बैग लगा रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा आश्रम बरनावा के सामने आश्रम की भूमि है, जिसकी उन्होंने बाउंड्री कर भूमि में सब्जी की फसलें बो रखी हैं। वहीं, रात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर सेवादार फसल के बचाव के लिए बाउंड्री की दीवार के नीचे मिट्टी के बैग लगा रहे हैं।
यह भी पढ़ें: खतरे में दर्जनों गांव: चार दिन से घरों में कैद हैं लोग, कही आंखों के सामने न डूब जाए आशियाने, सता रहा ये डर