बागपत: कुख्यात धर्मेंद्र किरठल पर लगी गैंगस्टर, बागपत जेल से अंबेडकरनगर किया गया शिफ्ट
धर्मेंद्र किरठल के खिलाफ 28 साल पहले लूट का पहला मुकदमा रमाला थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद से वह लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा है।
विस्तार
किरठल निवासी इरशाद की 12 दिसंबर 2020 को चुनावी रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुख्यात धर्मेंद्र किरठल, उसके साथी सतेंद्र मुखिया निवासी ग्राम सुन्हेड़ा और सुभाष उर्फ छोटू निवासी कस्बा सिसौली (मुजफ्फरनगर) के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
गिरफ्तारी न होने पर धर्मेंद्र किरठल व सुभाष उर्फ छोटू पर 50-50 हजार रुपये और सतेंद्र मुखिया पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ था। सतेंद्र मुखिया को उत्तराखंड एसटीएफ ने आठ मार्च को हरिद्वार से गिरफ्तार किया था, जबकि नोएडा एसटीएफ ने आरोपित धर्मेंद्र व सुभाष उर्फ छोटू कोआठ जून को देहरादून से पकड़ा था।
रमाला पुलिस ने धर्मेंद्र व सुभाष की निशानदेही पर नौ जून को घटना में प्रयुक्त तमंचा किरठल-रमाला मार्ग पर एक खेत से बरामद किया था। रमाला पुलिस ने सतेंद्र मुखिया को बी-वारंट पर लेकर उससे पूछताछ की थी। रमाला थाना प्रभारी रवेंद्र कुमार का कहना है कि जांच में चुनावी रंजिश सामने आई थी। तीन आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
बता दें कि धर्मेंद्र किरठल के खिलाफ 49 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या के 15 से ज्यादा मुकदमे हैं। इनके अतिरिक्त लूट व रंगदारी के मामले हैं। ज्यादातर में उसे जमानत मिल चुकी है। वहीं, कुछ मुकदमे खत्म हो चुके हैं।
धर्मेंद्र किरठल के खिलाफ 28 साल पहले लूट का पहला मुकदमा रमाला थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद से वह लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा है। वह उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा में गिरोह बनाकर संगठित अपराध करता था।
बीते वर्ष 15 अक्टूबर को शासन के निर्देश पर पुलिस ने उसकी 60 लाख कीमत की संपत्ति कुर्क की थी। पिछले दिनों पंचायत चुनाव के दौरान धर्मेंद्र किरठल की उसके गांव किरठल के आसपास गतिविधियों की सूचना पुलिस को मिली थी। पुलिस ने तब ड्रोन कैमरों की मदद से जंगल खंगाला था। हालांकि उसका सुराग नहीं लगा था।
विरोधी का साथ देने पर की थी इरशाद की हत्या
बीती 12 दिसंबर को ग्राम किरठल की पट्टी मूले जाट निवासी इरशाद अली (58) की खेत में गन्ना छीलते समय गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में धर्मेंद्र किरठल फरार चल रहा था। इसके चलते आईजी प्रवीण कुमार ने उसके ऊपर 50 हजार का इनाम घोषित कराया था। यह हत्या चुनावी रंजिश को लेकर की गई थी।
दरअसल, किरठल गांव में मूले जाटों की करीब 800 वोट हैं। वे इरशाद के इशारे पर एकमुश्त किसी भी प्रत्याशी को मिलती थी। इस बार इरशाद धर्मेंद्र किरठल के विरोधी कृष्णपाल का साथ दे रहा था। जिसके चलते इरशाद की हत्या कर दी गई। पिछले पंचायत चुनाव में धर्मेंद्र किरठल की मां सुरेश देवी जिला पंचायत सदस्य और पत्नी सुदेश देवी ग्राम प्रधान बनी थीं। इस बार भी उसके परिजन चुनाव लड़ने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस के दबाव के चलते वे ऐसा नहीं कर पाए।