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एक ही खेत में लगातार सरसों की बुवाई करने से परहेज करें किसान, इन बातों को रखें ध्यान

Sat, 03 Oct 2020 10:45 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 03 Oct 2020 10:45 PM IST
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Avoid sowing mustard in a field continuously
सरसों - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के बड़ौत में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित राजकीय बीज भंडार पर शनिवार को कृषि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को सरसों की बुआई संबंधित जानकारियां दी गयी।
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कृषि रक्षा अधिकारी नरेशपाल ने कहा कि सरसों में कई प्रकार के रोगों का प्रकोप होता है। इसमें तना गलन प्रमुख है। इस रोग को किसान पोलियो अथवा लकवा आदि के नाम भी जानते है। इस रोग की शुरुआत पतों से होती है और पत्तिया मुरझाकर नीचे गिर जाती है। फिर धीरे-धीरे तनो और टहनियो पर भी फैल जाता है।
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ऐसे करें बचाव
किसान इस बीमारी के बचाव के लिए लगातार खेत में सरसों की फसल बोने का परहेज करें। इससे रोग की उग्रता बढ़ती है और बिजाई से पहले 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम (बाविस्टिन) प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से सूखा बीज बिजाई करें। जिन क्षेत्रों में तना गलन का प्रकोप हर साल होता है वहां बिजाई के 45-50 दिन तथा 65-70 दिन के बाद कार्बेन्डाजिम दवा का 1 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी की दर से दो छिड़काव करें।
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ये है सरसों की बुआई का सही समय
उन्होंने बताया कि अक्टूबर से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक किसान सरसों की बुआई कर सकता है। इसके उपरांत बुआई करता है तो उन्हेें एक बीज बोना चाहिए, जो जल्दी से पक जाएं।

इतने हेक्टेयर में होती है सरसों की बुवाई
बड़ौत ब्लाक के अंतर्गत गत वर्ष 86.7 हेक्टेयरत में सरसों की बुआई हुई थी। इस बार बढ़ने की संभावना भी नाम के बराबर है।
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