अमर उजाला एक्सक्लूसिव: बजट विकास का, लगवा दिए होर्डिंग, सरकारी धन के 1.10 करोड़ रुपये का दुरुपयोग
उत्तर प्रदेश के बड़ौत में गांवों में विकास कार्य कराने के लिए दी गई धनराशि को ग्राम प्रधानों ने खुद को प्रचार करने में खर्च कर डाला है। नए साइन बोर्ड लगाने के नाम पर एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च कर दिए है, जबकि पुरानों मरम्मत में लगभग 40 से 50 हजार रुपये व्यय किए है।
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शासन की ओर से गांवों में विकास कार्य कराने के लिए ग्राम पंचायतों के खातों में भेजी गई करोड़ों की धनराशि में ग्राम प्रधानों ने खुद का प्रचार कर खेल कर दिया है। बागपत के बड़ौत क्षेत्र में ग्राम प्रधानों ने विकास कार्यों में लगाने के बजाए ग्राम पंचायतों के प्रवेश मार्गों पर ग्राम प्रधान/ प्रधान प्रतिनिधि के नाम पर राजनीतिक लोगों के फोटो, समर्थित पार्टी के रंग के साथ हार्दिक स्वागत करने और मतदाताओं का आभार जताने के नाम पर ही गांव में ही कई बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगाकर करीब 1.10 करोड़ रुपये खर्च कर डाले हैं। इस संबंध में सीडीओ ने बीडीओ को पत्र भेजकर दो दिनों के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
बागपत जनपद में कुल 244 ग्राम पंचायतें है। इनमें शासन ने केन्द्रीय वित्त व राज्य वित्त से गत माह विकास कार्यों को कराने के नाम पर करोड़ों की धनराशि भेजी थी। लेकिन, जनपद की अधिकतर ग्राम पंचायतों में इस धनराशि को नियमों को ताक पर रखकर साइन बोर्ड लगाने में खर्च दिए है।
नए साइन बोर्ड लगाने के नाम पर एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च कर दिए है जबकि पुरानों मरम्मत में लगभग 40 से 50 हजार रुपये व्यय किए है। कई गांवों में तो दो से तीन साइन बोर्ड लगे हुए है। मामला उजागर हुआ तो सीडीओ रंजीत सिंह ने इस संबंध में ग्राम पंचायतों को नोटिस भेजने के साथ-साथ बीडीओ को भी पत्र भेजकर दो दिनों के अंदर जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।
डीपीआरओ बनवारी सिंह ने बताया कि शासन ने गत माह केन्द्रीय वित्त से 13.13 करोड़ रुपये और राज्य वित्त से 6.12 करोड़ रुपये ग्राम पंचायत के खातों मेें भेजे थे। ग्राम प्रधान को केन्द्रीय व राज्य वित्त से गांव में साइन बोर्ड लगाने का कोई अधिकार नहीं है। क्योंकि गांव में लगाए गए साइन बोर्ड किसी भी प्रकार से जनहित के कार्य में नहीं है। यह बिल्कुल गलत है।
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तीन साइन बोर्ड पर खर्च कर डाले 4.80 लाख, अब भुगतान का बना रहे दवाब
बड़ौत के विभागीय अफसरों के अनुसार कंडेरा गांव के ही ग्राम प्रधान ने गांव में तीन साइन बोर्ड लगाए है। एक साइन बोर्ड में तकरीबन 1.60 लाख का खर्च दर्शाया है। अब ग्राम प्रधान भुगतान के लिए बीडीओ व ग्राम सचिव पर दबाव डाल रहे है।
इस संबंध मेें बीडीओ राहुल वर्मा ने बताया कि कई बार ग्राम प्रधान ने भुगतान कराने के लिए कहा है, लेकिन ग्राम प्रधान सहित अन्य ग्राम पंचायतों को सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों के निर्देश न मिलने पर भुगतान न कराने की बात कहीं गई है।
सरकारी धन को नहीं होने देंगे बर्बाद
सीडीओ रंजीत सिंह ने बताया जनपद की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को कराने के बजाएं ग्राम पंचायतों में साइन बोर्ड लगाने के नाम पर करोड़ों की धनराशि निकाली गई है। यह किसी भी प्रकार से जनहित के कार्य नहीं है और न ही यह राज्य/ केन्द्रीय वित्त आयोग के अनुमन्य कार्यों की श्रेणी में आता है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्राम पंचायतों को नोटिस भेजने के साथ-साथ जनपद के समस्त बीडीओ को पत्र भेजकर दो दिनों के अंदर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए है। सरकारी धनराशि को बिना वजह बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
मानकों को किया गया दरकिनार
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार ले बताया कि साइन बोर्ड की ऊंचाई छह फीट होनी चाहिए। इस पर लिखावट रेडियम से होनी चाहिए, ताकि रात के समय लाइट लगने से साइन बोर्ड दिखाई दे सके। मगर, ग्राम पंचायतों में जो साइन बोर्ड लगे हुए है, उनमें लोहे के पाइप लगे हुए हैं। रेडियम से लिखावट के बजाएं फ्लेक्सी लगा दी गई है। साइन बोर्ड की ऊंचाई भी मानक के अनुरूप नहीं है। इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) 67 के अनुसार ही साइन बोर्ड बनाने चाहिए।