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धूल के गुबार और हिचकोले वाला हाईवे 

Tue, 28 Feb 2017 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Tue, 28 Feb 2017 12:02 AM IST
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A puff of dust and battered highway
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित बागपत के सरूरपुर गांव में जर्जर मार्ग से गुजरते वाहन चालक - फोटो : amar ujala
बागपत। दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे का निर्माण फाइलों में दर्शाकर 455 करोड़ रुपये डकार लिए गए। हकीकत में गाजियाबाद से लेकर सहारनपुर तक स्टेट हाईवे में जगह-जगह पैबंद (टुक्कियां) लगी हैं। बागपत जिले की सीमा के करीब  51 किमी के टुकड़े से गुजरना दुश्वारियों से कम नहीं है। गांव सिसाना, गौरीपुर मोड़ और सरूरपुर कलां के ग्रामीणों के लिए हाईवे बुरे सपने जैसा बन गया है।
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हाईवे के चौड़ीकरण की शुरूआत 30 मार्च 2012 को हुई थी, उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण (उपशा) का दावा था कि छह सितंबर 2016 तक निर्माण पूरा हो जाएगा। धरातल पर हालात बेहद खराब हैं। बागपत से सहारनपुर की तरफ बढ़े तो कलक्ट्रेट से पहले ही सिसाना गांव में हकीकत सिस्टम का मुंह चिढ़ाने लगती है। गांव निवाड़ा, गौरीपुर जवाहरनगर, सरूरपुर कलां से होते  बड़ौत तक के करीब 18 किमी के टुकड़े में वाहन चालकों को पसीने छूटते लगते हैं। गौरीपुर मोड़ पर हर गड्ढे ही गड्ढे हैं। सबसे ज्यादा जाम भी यहीं पर रहता है। बड़ौत से आगे निकलते ही बावली, हसनपुर जिवानी गेट के पास, कासिमपुर खेड़ी और रमाला तक कई जगह हादसों को न्योता देने वाले गड्ढे हैं। धूल के गुबार उड़ते हुए देखे जा सकते हैं।
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क्या - क्या  दिक्कतें
बागपत। दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे पर वाहनों की संख्या का दबाव है। यूपी के अलावा इस पर हरियाणा के वाहनों की संख्या अधिक है। चौड़ीकरण नहीं होने के कारण आए दिन हादसे होते हैं। कई जगह ऐसी हैं जहां, पुलिया और गड्ढों की मरम्मत का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया, जिस कारण परेशानी अधिक हो रही है। 
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हेवा- लूंब मार्ग के जर्जर होने से परेशानी 
छपरौली। क्षेत्र के हेवा- लूंब गांव को जोड़ने वाले सड़क मार्ग के जर्जर होने से ग्रामीण परेशान है।  ग्रामीणों ने डीएम से हस्तक्षेप कर सड़क को बनवाने की मांग की है। उन्होंने कहा यदि समय रहते सड़क नहीं बनवाई तो वे आंदोलन होगा।लूंब सड़क से हेवा की ओर जाने वाले सड़क मार्ग विगत सात आठ साल से जर्जर हालत में है। इससे ग्रामीणों में सरकार के प्रति गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीण सुरेश पाल डायरेक्टर ने  बताया मिल ने बजट के आधार पर थोड़ी दूरी की सड़क बनवाई, इसके बाद भी समस्या जस की तस है। मांगेराम ने बताया लूंब- हेवा मार्ग के साथ साथ बाईपास सड़क मार्ग की जर्जर है, इसकी लंबाई दो किमी है, उसे भी किसी ने भी ठीक नहीं कराया । गौरव कुमार ने बताया सड़क टूटी होने के कारण लूंब तक ग्रामीणों को पैदल ही जाना पड़ता है। सुरेंद्र सिंह ने बताया जर्जर सड़क पर रोड़ी बिखरी होने से पशु भी घायल हो गए हैं । इस रास्ते पर जनता इंटर कॉलेज भी है, इस कारण छात्र और छात्राएं भी परेशान हैं। उन्होंने कहा संबंधित विभाग के अफसरों से कई बार समस्या बताई, लेकिन सड़क जस की तस है । ग्रामीणों ने डीएम से हस्तक्षेप करके जर्जर हेवा - लूंब सड़क को बनवाने की मांग की है। 
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