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पश्चिमी यूपी की खापों को मंजूर नहीं फैसला

Tue, 22 Apr 2014 05:31 AM IST
Baghpat
Baghpat Updated Tue, 22 Apr 2014 05:31 AM IST
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बागपत। हरियाणा की सतरोल खाप ने अंतर्जातीय विवाह को अनुमति देकर भले ही ऐतिहासिक फैसला ले लिया हो, लेकिन पुरानी परंपराओं के लिए जिद पर अड़ जाने वाली पश्चिमी यूपी की खापों को यह बदलाव जरा भी मंजूर नहीं। खाप चौधरियों का साफ कहना है कि अंतर्जातीय विवाह पर पुरानी रवायतें बदली नहीं जा सकती और न ही इसकी जरूरत महसूस की जा रही है।
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हरियाणा से सटे पश्चिमी यूपी के इस इलाके में सतरोल खाप का कोई प्रभाव नहीं है। यहां की मुख्य खापों में बालियान, गठवाला, देश, चौगामा, बतीसा, लाटियान, पंवार, चौहान और अहलावत मानी जाती हैं। इनके चौधरी पुरानी परंपराओं की खातिर कानूनी लड़ाई तक लड़ चुके हैं। इन्हें जब सतरोल खाप के फैसले का पता चला तो हैरान रह गए। पहली प्रतिक्रिया यही थी कि अंतर्जातीय विवाह मंजूर नहीं है।
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फिर चाहे बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत हों या चौगामा खाप के चौधरी कृष्णपाल, सभी ने एक सुर में यही कहा कि अंतर्जातीय विवाह स्वीकार नहीं किया जा सकता है। देशखाप के चौधरी देवेंद्र और बतीसा खाप के चौधरी सूरजमल की भी बिल्कुल यही प्रतिक्रिया आई।
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गौरतलब है कि इस इलाके में अंतर्जातीय विवाह पर ऑनर किलिंग तक की घटनाएं हुई हैं। जैसे सगोत्र विवाह का विरोध है, वैसे ही अंतर्जातीय शादी का भी है।
हालांकि जाट समाज के कुछ नेता सतरोल खाप के फैसले की हां में हां मिला रहे है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक कहते हैं कि सतरोल खाप के फैसले को ठीक से समझने की जरूरत है।

उनका कहना है कि अंतर्जातीय विवाह मां-बाप की सहमति पर मंजूर किया गया है। साथ ही सगोत्र विवाह और गांव में शादी का विरोध किया गया है। इसमें क्या बुराई है ? मलिक का कहना है कि जाट समाज के कई नेताओं के परिवारों में अंतरजातीय विवाह पहले से होते आए हैं। उधर, बागपत जिला जाट महासभा के अध्यक्ष एडवोकेट चरण सिंह खोखर का कहना है कि इस इलाके में अंतर्जातीय विवाह अच्छा नहीं समझा जाता है, इसलिए ऐसा न होना ही ठीक है।
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