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फिर से बदलने लगा चौधरियों का मिजाज
Baghpat
Updated Thu, 13 Feb 2014 05:44 AM IST
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बड़ौत। शुद्ध देसी राजनीति के लिए मशहूर बागपत के चौधरियों का मिजाज फिर से बदलता हुआ लग रहा है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद चौधरी रालोद से नाराज बताए जा रहे थे। भाजपा ने मौके का फायदा उठाने में देरी नहीं की। एक बार तो ऐसा हल्ला मचा कि चौधरी भी भगवा रंग में रंग गए हैं लेकिन जाट आरक्षण का रास्ता साफ होने के बाद से बदलनी शुरूहुई कहानी लगातार बदलती ही जा रही है। रालोद को फिर से उम्मीद लगी है कि बिगड़ी बात बनाना बहुत मुश्किल नहीं है।
जयंत चौधरी के लिए हर पदयात्रा करना बेहद जरूरी था। मेरठ की रैली में नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह ने बड़े चौधरी साहब और बाबा टिकैत का नाम लेकर जाट समाज पर डोरे डाले थे। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से जाट रालोद से थोड़े नाराज बताए जा रहे थे। भाजपा की नजर तब से अब तक रालोद के वोटबैंक पर ही लगी है।
शायद इसीलिए चौधरी अजित सिंह ने जयंत चौधरी को आगे किया है। जयंत की दो खूबी हैं। एक तो युवा हैं, युवाओं को जोड़ सकते हैं। दूसरा उनके चेहरे में बड़े चौधरी साहब की झलक दिखाई पड़ती है। जयंत ने पदयात्रा के लिए दिन भी बहुत सोच समझकर तय किया।12 फरवरी को उनके पिता चौधरी अजित सिंह का जन्मदिन होता है। उन्होंने मुद्दे भी ऐसे पकड़े कि सपा नेताओं की नींद उड़ जाए। पहला टूटी सड़कें और दूसरा गन्ना बकाया भुगतान। अब जवाब सपाइयों को देना है। भाजपाइयों को भी बताना होगा कि सड़कें ठीक कराने के लिए सड़कों पर क्यों नहीं उतरते हो? और गन्ना बकाया दिलाने के लिए अब तक क्या-क्या किया?
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जयंत चौधरी के लिए हर पदयात्रा करना बेहद जरूरी था। मेरठ की रैली में नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह ने बड़े चौधरी साहब और बाबा टिकैत का नाम लेकर जाट समाज पर डोरे डाले थे। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से जाट रालोद से थोड़े नाराज बताए जा रहे थे। भाजपा की नजर तब से अब तक रालोद के वोटबैंक पर ही लगी है।
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शायद इसीलिए चौधरी अजित सिंह ने जयंत चौधरी को आगे किया है। जयंत की दो खूबी हैं। एक तो युवा हैं, युवाओं को जोड़ सकते हैं। दूसरा उनके चेहरे में बड़े चौधरी साहब की झलक दिखाई पड़ती है। जयंत ने पदयात्रा के लिए दिन भी बहुत सोच समझकर तय किया।12 फरवरी को उनके पिता चौधरी अजित सिंह का जन्मदिन होता है। उन्होंने मुद्दे भी ऐसे पकड़े कि सपा नेताओं की नींद उड़ जाए। पहला टूटी सड़कें और दूसरा गन्ना बकाया भुगतान। अब जवाब सपाइयों को देना है। भाजपाइयों को भी बताना होगा कि सड़कें ठीक कराने के लिए सड़कों पर क्यों नहीं उतरते हो? और गन्ना बकाया दिलाने के लिए अब तक क्या-क्या किया?
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