{"_id":"39294","slug":"Baghpat-39294-51","type":"story","status":"publish","title_hn":"असारा को दहशत ने घेरा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
असारा को दहशत ने घेरा
Baghpat
Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
रमाला (बागपत )। असारा के तिहरे हत्याकांड में अभी सिर्फ एक दारोगा ही नपा है, लेकिन मुल्जिमों को यह सनसनीखेज वारदात अंजाम देने का मौका देने में और भी पुलिस वालों की लापरवाही रही। अधिकारियों ने न केवल पुलिस की चूक स्वीकार कर ली है बल्कि इस पर जांच भी बिठा दी है। यह भी साफ कर दिया है कि जिन पुलिसकर्मियों की गलती रही, उन पर भी एक्शन होगा। दूसरी ओर इस मामले में रमाला के अलावा बड़ौत थाना पुलिस की ढिलाई भी साफ नजर आ रही है।
ट्रिपल मर्डर के मास्टरमाइंड शकील नकली नोटों के मामले में बड़ौत थाने में वांटेड है। वह असारा में अपने घर ही था, लेकिन बड़ौत पुलिस ने दबिश नहीं दी। अब पुलिस को बताना होगा कि उसकी गिरफ्तारी न करके उसे एक और वारदात का मौका क्यों दिया गया? नकली नोटों के मामले बेहद संगीन अपराधों में आते हैं। सवाल ये भी कि सुपरविजन करने वाले अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी किस ढंग से निभाई? अगर पुलिस ने शकील को पहले ही पकड़ लिया होता तो तीन बेगुनाह लोगों की हत्या होने से बच जाती। शकील एक महीने से वारदात की फिराक में था। उसने अखलाक और उसकी पत्नी साजिदा के साथ मारपीट भी की, लेकिन रमाला थाना पुलिस न जाने क्यों उस पर एक्शन लेने से बचती रही? सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि क्या यह पुलिस की सिर्फ लापरवाही थी ? कहीं ऐसा तो नहीं कि जानबूझकर एक्शन न लिया जा रहा हो? असारा गांव में प्रेम विवाह करने वाले दंपतियों को 15-20 सिरफिरे युवकों ने धमकी दी थी। इन दंपतियों ने अपनी जान को खतरा बताया था, लेकिन इन्हें भी आज तक न जाने क्यों सुरक्षा नहीं दी गई। क्या पुलिस एक और वारदात का इंतजार कर रही है? सवाल तो ये भी उठ रहा है कि असारा की पहली पंचायत के बाद पुलिस पर हमला करके दारोगा की बाइक तक फूंक देने के मामले में एफआईआर हो जाने के बावजूद आज तक एक भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पाई? इस बारे में एसपी वीके शेखर का कहना है कि पुलिस लापरवाही की जांच कराई जा रही है। जो पुलिसकर्मी दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दो दिन में एक भी गिरफ्तारी नहीं
दबिश के नाम पर खानापूरी कर रही है पुलिस
रमाला ( बागपत ) क्या जिस तरह असारा में खाकी पर हुए हमले के मामले में पुलिस हाथ पर हाथ धरे चुपचाप बैठी रही, वैसे ही तिहरे हत्याकांड में भी कार्रवाई के नाम पर कागजी लिखा पढ़ी ही होती रहेगी? ऐसी आशंका इसलिए पैदा हुई है क्योंकि इस तिहरे सनसनीखेज वारदात की एफआईआर में नामजदगी हो जाने के बावजूद पुलिस दो दिन में एक भी मुल्जिम को गिरफ्तार करना तो दूर उनकी लोकेशन तक नहीं ढूंढ पाई। ये आरोपी पहले से ही नकली नोट के मामले में वांटेड हैं, लेकिन आज तक इनका बाल बांका नहीं हुआ। इस बार भी न जाने क्यों अफसरों ने इन पर एक्शन लेने के लिए किसी तरह की फुर्ती नहीं दिखलाई है।
विज्ञापन
नामजद आरोपियों के नाम पते ही नहीं, फोन नंबर भी पुलिस के पास हैं। सर्विलांस के सहारे इनकी लोकेशन ट्रेस करना बड़ी बात नहीं, लेकिन लगता है अधिकारियों ने अपने आईटी एक्सपर्ट की मदद लेना जरूरी नहीं समझा। दबिश के नाम पर पुलिस दो तीन बार गांव में टहल आई है। आरोपियों के रिश्तेदार बताए गए छह लोग हिरासत में लिए गए हैं, लेकिन न जाने कौन सी तरकीब से पूछताछ की गई है कि इन्होंने कुछ नहीं बताया।
नसीम की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में साजिदा के पहले शौहर शकील के अलावा अब्बास, इलियास, शौकत को नामजद कराया था जबकि छह अज्ञात थे। अज्ञात के नाम पते तब मिलेेंगे, जब नामजद आरोपी पकड़े जाएंगे, लेकिन अभी तक कोई हाथ नहीं आया। सीओ बड़ौत अवनीश मिश्रा का कहना है कि पुलिस अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।
विज्ञापन
ट्रिपल मर्डर के मास्टरमाइंड शकील नकली नोटों के मामले में बड़ौत थाने में वांटेड है। वह असारा में अपने घर ही था, लेकिन बड़ौत पुलिस ने दबिश नहीं दी। अब पुलिस को बताना होगा कि उसकी गिरफ्तारी न करके उसे एक और वारदात का मौका क्यों दिया गया? नकली नोटों के मामले बेहद संगीन अपराधों में आते हैं। सवाल ये भी कि सुपरविजन करने वाले अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी किस ढंग से निभाई? अगर पुलिस ने शकील को पहले ही पकड़ लिया होता तो तीन बेगुनाह लोगों की हत्या होने से बच जाती। शकील एक महीने से वारदात की फिराक में था। उसने अखलाक और उसकी पत्नी साजिदा के साथ मारपीट भी की, लेकिन रमाला थाना पुलिस न जाने क्यों उस पर एक्शन लेने से बचती रही? सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि क्या यह पुलिस की सिर्फ लापरवाही थी ? कहीं ऐसा तो नहीं कि जानबूझकर एक्शन न लिया जा रहा हो? असारा गांव में प्रेम विवाह करने वाले दंपतियों को 15-20 सिरफिरे युवकों ने धमकी दी थी। इन दंपतियों ने अपनी जान को खतरा बताया था, लेकिन इन्हें भी आज तक न जाने क्यों सुरक्षा नहीं दी गई। क्या पुलिस एक और वारदात का इंतजार कर रही है? सवाल तो ये भी उठ रहा है कि असारा की पहली पंचायत के बाद पुलिस पर हमला करके दारोगा की बाइक तक फूंक देने के मामले में एफआईआर हो जाने के बावजूद आज तक एक भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पाई? इस बारे में एसपी वीके शेखर का कहना है कि पुलिस लापरवाही की जांच कराई जा रही है। जो पुलिसकर्मी दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
दो दिन में एक भी गिरफ्तारी नहीं
दबिश के नाम पर खानापूरी कर रही है पुलिस
रमाला ( बागपत ) क्या जिस तरह असारा में खाकी पर हुए हमले के मामले में पुलिस हाथ पर हाथ धरे चुपचाप बैठी रही, वैसे ही तिहरे हत्याकांड में भी कार्रवाई के नाम पर कागजी लिखा पढ़ी ही होती रहेगी? ऐसी आशंका इसलिए पैदा हुई है क्योंकि इस तिहरे सनसनीखेज वारदात की एफआईआर में नामजदगी हो जाने के बावजूद पुलिस दो दिन में एक भी मुल्जिम को गिरफ्तार करना तो दूर उनकी लोकेशन तक नहीं ढूंढ पाई। ये आरोपी पहले से ही नकली नोट के मामले में वांटेड हैं, लेकिन आज तक इनका बाल बांका नहीं हुआ। इस बार भी न जाने क्यों अफसरों ने इन पर एक्शन लेने के लिए किसी तरह की फुर्ती नहीं दिखलाई है।
विज्ञापन
नामजद आरोपियों के नाम पते ही नहीं, फोन नंबर भी पुलिस के पास हैं। सर्विलांस के सहारे इनकी लोकेशन ट्रेस करना बड़ी बात नहीं, लेकिन लगता है अधिकारियों ने अपने आईटी एक्सपर्ट की मदद लेना जरूरी नहीं समझा। दबिश के नाम पर पुलिस दो तीन बार गांव में टहल आई है। आरोपियों के रिश्तेदार बताए गए छह लोग हिरासत में लिए गए हैं, लेकिन न जाने कौन सी तरकीब से पूछताछ की गई है कि इन्होंने कुछ नहीं बताया।
नसीम की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में साजिदा के पहले शौहर शकील के अलावा अब्बास, इलियास, शौकत को नामजद कराया था जबकि छह अज्ञात थे। अज्ञात के नाम पते तब मिलेेंगे, जब नामजद आरोपी पकड़े जाएंगे, लेकिन अभी तक कोई हाथ नहीं आया। सीओ बड़ौत अवनीश मिश्रा का कहना है कि पुलिस अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।