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चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह मनाया
Updated Tue, 31 Jul 2018 01:06 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान मेें सुरत्न सागर महाराज का चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह विहर्ष सभागार मेें मनाया गया।
इस समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ डॉ. श्रेयांस जैन और मधु दीदी ने किया। इसके बाद स्याद्वाद महिला संगठन ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अजित नाथ भगवान के चित्र का अनावरण मनोज जैन ने किया। दीप प्रज्ज्वलन का सौभाग्य त्रिसला जैन को प्राप्त हुआ, झंडारोहण जयपाल, मुकेश जैन ने किया। कार्यक्रम मेें दिगंबर जैन बाल सदन के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर भक्तों ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट किए।
इस मौके पर सुरत्न महाराज ने कहा कि वैसे तो साधु आठ महीने पदविभार करते हैं, जिस प्रकार नदी नियंत्रण बहती रहती है, उसी प्रकार साधु भी चलते रहते हैं, लेकिन चातुर्मास व्यवस्था, अनादी व्यवस्था है। क्योंकि वर्षा काल मेें जीव अधिक उत्पन्न होते हैं, उनकी हिंसा से बचने के लिए साधु एक मास पर चातुमार्स करते हैं। इस अवसर पर आचार्य प्रसन्न महाराज ने भी अपना आशीर्वाद दिया। इस दौरान मेें सुमति माता, ब्रहमचारी सीमा दीदी, मधु दीदी भी उपस्थित रहीं। प्रथम कलश का सौभाग्य मुकेश कुमार बजाज, दूसरा कलश अरुण जैन, तृतीय कलश राजेश जैन को प्राप्त हुआ। पदापक्षालन राकेश जैन ने, शास्त्र भेंट प्रदीप जैन, आरती साधुवात महिला संगठन को प्राप्त हुआ। संचालन वरदान जैन ने किया। इसमें सुभाष चंद जैन, मुकेश जैन, मुकेश बजाज, प्रदीप जैन, सतीश जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, सुंदरलाल जैन, अशोक जैन, सुरेश जैन, अंकुर जैन, विवेक जैन, मदनलाल जैन, महेंद्र लाल जैन उपस्थित रहे।
मन बूढ़ा नहीं होता
बड़ौत। प्राचीन जैन स्थानक पट्टी चौधरान मेें जैन महा साध्वी वैभव ने धर्मसभा में कहा कि मन चंचल होता है, मन अड़ियल घोडे़ के सामान होता है, समय के चाबुक से सही रास्तों पर लाया जा सकता है, तप धर्म से मन को संयम आएगा। सद गुरुदेव की सत्य भावना वाणी से इस संसार की दलदल से फंसे को निकाला जा सकता है, मुंह के कारण हम दलदल मेें फंसा है, अहंकार से बचाना चाहिए, मन ऐसा पापी है, इसको समझ सके, मन जवान रहता है, बूढ़ा नहीं होता। इस अवसर पर जैन साध्वी प्राजल ने भी भजन प्रस्तुत किए। इस मौके पर सुंदर जैन, हेमचंद जैन, बाबूराम जैन, बोबी जैन, नितिन जैन, सुरेश, मंजु, कविता, अनीता उपस्थित रही।
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अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान मेें सुरत्न सागर महाराज का चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह विहर्ष सभागार मेें मनाया गया।
इस समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ डॉ. श्रेयांस जैन और मधु दीदी ने किया। इसके बाद स्याद्वाद महिला संगठन ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अजित नाथ भगवान के चित्र का अनावरण मनोज जैन ने किया। दीप प्रज्ज्वलन का सौभाग्य त्रिसला जैन को प्राप्त हुआ, झंडारोहण जयपाल, मुकेश जैन ने किया। कार्यक्रम मेें दिगंबर जैन बाल सदन के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर भक्तों ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट किए।
इस मौके पर सुरत्न महाराज ने कहा कि वैसे तो साधु आठ महीने पदविभार करते हैं, जिस प्रकार नदी नियंत्रण बहती रहती है, उसी प्रकार साधु भी चलते रहते हैं, लेकिन चातुर्मास व्यवस्था, अनादी व्यवस्था है। क्योंकि वर्षा काल मेें जीव अधिक उत्पन्न होते हैं, उनकी हिंसा से बचने के लिए साधु एक मास पर चातुमार्स करते हैं। इस अवसर पर आचार्य प्रसन्न महाराज ने भी अपना आशीर्वाद दिया। इस दौरान मेें सुमति माता, ब्रहमचारी सीमा दीदी, मधु दीदी भी उपस्थित रहीं। प्रथम कलश का सौभाग्य मुकेश कुमार बजाज, दूसरा कलश अरुण जैन, तृतीय कलश राजेश जैन को प्राप्त हुआ। पदापक्षालन राकेश जैन ने, शास्त्र भेंट प्रदीप जैन, आरती साधुवात महिला संगठन को प्राप्त हुआ। संचालन वरदान जैन ने किया। इसमें सुभाष चंद जैन, मुकेश जैन, मुकेश बजाज, प्रदीप जैन, सतीश जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, सुंदरलाल जैन, अशोक जैन, सुरेश जैन, अंकुर जैन, विवेक जैन, मदनलाल जैन, महेंद्र लाल जैन उपस्थित रहे।
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मन बूढ़ा नहीं होता
बड़ौत। प्राचीन जैन स्थानक पट्टी चौधरान मेें जैन महा साध्वी वैभव ने धर्मसभा में कहा कि मन चंचल होता है, मन अड़ियल घोडे़ के सामान होता है, समय के चाबुक से सही रास्तों पर लाया जा सकता है, तप धर्म से मन को संयम आएगा। सद गुरुदेव की सत्य भावना वाणी से इस संसार की दलदल से फंसे को निकाला जा सकता है, मुंह के कारण हम दलदल मेें फंसा है, अहंकार से बचाना चाहिए, मन ऐसा पापी है, इसको समझ सके, मन जवान रहता है, बूढ़ा नहीं होता। इस अवसर पर जैन साध्वी प्राजल ने भी भजन प्रस्तुत किए। इस मौके पर सुंदर जैन, हेमचंद जैन, बाबूराम जैन, बोबी जैन, नितिन जैन, सुरेश, मंजु, कविता, अनीता उपस्थित रही।
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