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67 साल बाद फिर से हो रही है बरनावा में अतीत की खोज

Mon, 08 Jan 2018 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Mon, 08 Jan 2018 01:08 AM IST
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67 years later again searching for past in Barnava
बरनावा के लाक्षागृह में उत्खनन के लिए सर्वे करते इतिहासकार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बरनावा में टीले के उत्खनन का कार्य 10 जनवरी से आरंभ होगा। मानव सभ्यता जानने के लिए करीब 67 साल बाद वेस्ट यूपी में उत्खनन का कार्य किया जाएगा। इससे पहले भारतीय पुरातत्व टीम ने वर्ष 1950-51 में हस्तिानापुर में टीले की खुदाई की थी। इतिहासकारों की मानना है कि आर्य और हड़प्पा कालीन सभ्यता के बीच के इतिहास को जोड़ने में बरनावा से मदद मिल सकती है। सांस्कृतिक काल की जानकारी भी मिलेगी।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम बरनावा के लाक्षागृह टीले की विधिवत विस्तृत उत्खनन 10 जनवरी से शुरू होगा। जिस जगह उत्खनन होना है, उसकी सफाई कराई जा रही है। 
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रविवार को शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और एमएम डिग्री कॉलेज मोदीनगर के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ केके शर्मा ने बरनावा का दौरा किया। केके शर्मा बताते हैं कि हस्तिनापुर के बाद बरनावा में खुदाई कई मायनों में अहम है।
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यह दूसरा मौका है, जब टीले की खुदाई की जा रही है। सिनौली में जिस खेत की खुदाई की थी, वहां तो हड़प्पा कालीन शवादान गृह मिला था। इसके बाद चंदायन में खुदाई हुई, लेकिन इतिहास से कुछ खास जुड़ाव नहीं हुआ। 

पुरातत्व विभाग का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। अमित राय जैन बताते हैं कि इस क्षेत्र में कौन सी सभ्यता के लोग रहते थे, उनका कल्चर कैसा था यह इस खुदाई से स्पष्ट हो सकेगा। यह भी माना जा रहा है कि आर्य सभ्यता और हड़प्पा कालीन सभ्यता के तार भी यहां जुड़ सकते हैं। खुदाई के लिए दस जनवरी का समय तय किया गया है।

जुटेंगे वेस्ट यूपी के इतिहासकार
बिनौली। अमित राय जैन बताते हैं कि खुदाई का विधिवत शुभारंभ 10 जनवरी को होगा। इस मौके पर वेस्ट यूपी के प्रमुख इतिहासकार भी मौके पर जुटेेंगे। प्रोफेसर केके शर्मा बताते हैं कि यह क्षेत्र के इतिहास के लिए बड़ा कदम है।

चलता रहा सफाई का कार्य
बिनौली। जिस जगह खुदाई होनी है, उसकी सफाई का कार्य भी चलता रहा। पुरातत्व विभाग की टीम संभवत: मंगलवार को अंतिम तौर पर उत्खनन स्थल का दौरा करेगी। यहां कार्य में तेजी लाने के लिए मजदूरों की संख्या बढ़ाई गई है। 


उत्सुकता का केंद्र बनी है गुफा
बिनौली। बरनावा के लाक्षा गृह स्थित गुफा लोगों के उत्सुकता का केंद्र बनीं है। उत्खनन के बाद यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि गुफा का राज क्या है।

दिनभर लोगों का जमावड़ा
बिनौली। एक तरफ पुरातत्व विभाग की टीम ने यहां डेरा डाल रखा है, दूसरी तरफ ग्रामीण भी इतिहास के विषय में जानने के लिए पहुंच रहे हैं। उत्खनन शुरू होने से पहले ही बरनावा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। आसपास के गांव के अलावा मुजफ्फरनगर और शामली के लोग भी यहां पहुंचकर जानकारियां ले रहे हैं।
 
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