{"_id":"5ac3d90c4f1c1bec618b549f","slug":"61522784524-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कब होगा यूपी-हरियाणा की जमीन का बंटवारा?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कब होगा यूपी-हरियाणा की जमीन का बंटवारा?
Updated Wed, 04 Apr 2018 01:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बागपत। यमुना के किनारों पर गेहूं के अधिकतर खेत पककर तैयार खड़े हैं। लहलहाती फसल को देखकर किसानों के बीच खुशी नहीं, बल्कि चिंता की लकीरें अधिक हैं। ऐसी सैकड़ों बीघा जमीन है, इसके मालिकाना हक को लेकर सालों से लड़ाई चल रही है। खेत की बुवाई कोई करता है और फसल कोई काट ले जाता है। सीमा विवाद की यह जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। मारपीट, फसलों को तहस-नहस करना, आगजनी, ट्यूबवेलों पर लगे इंजन लूटकर ले जाना जैसे मामले तो सैकड़ों हैं। निवाड़ा गांव के किसान इखलाक का कहना है कि यूपी के किसान कभी अपनी हद पार नहीं करते हैं। पिछले साल हरियाणा के किसान निवाड़ा चेक पोस्ट तक आ गए , लेकिन पुलिस खड़ी देखती रही। सिसाना गांव के किसान बलजोर और बकारू का कहना है कि हरियाणा का पुलिस-प्रशासन उनका साथ देता है, जबकि यूपी पुलिस और अधिकारी किसानों को सिर्फ पिटते हुए ही देखते रहते हैं। सिसाना के ही अनिल का कहना है कि आखिर कब तक पिटते और मरते रहेंगे। केंद्र के अलावा यूपी और हरियाणा में भाजपा की ही सरकार है, इसके बावजूद दोनों राज्यों के किसानों की सबसे बड़ी समस्या का समाधान अब तक क्यों नहीं किया जा रहा।
क्या था दीक्षित अवार्ड
बागपत। वर्ष 1979 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने कृषि मंत्री उमा शंकर दीक्षित की अध्यक्षता में समाधान के लिए अवार्ड का गठन किया, जिसे दीक्षित अवार्ड माना गया। व्यवस्था दी कि वर्ष 1974 की यमुना धार को आधार मानकर सीमांकन कराया जाए। इसके बाद यमुना खादर में सीमांकन कर खंभे लगवा दिए। कुछ दिन बाद खंभे गायब हो गए। इसका आरोप भी हरियाणा के किसानों पर लगा। भूमि के पूरे रिकॉर्ड का आदान प्रदान भी अभी तक नहीं किया जा सका है।
45 सौ हेक्टेयर जमीन पर विवाद
बागपत। बागपत से सोनीपत और पानीपत के यमुना खादर की करीब 50 किमी सीमा सटी है। यमुना की धार बदलते रहने के कारण दोनों तरफ के हजारों किसानों की 4500 हेक्टेयर भूमि सीमा विवाद में फंसी हैं। बागपत के किसानों की 2850 हेक्टेयर और हरियाणा के सोनीपत-पानीपत के किसानों की 1750 हेक्टेयर भूमि का विवाद है।
विज्ञापन
बागपत के 25 गांव प्रभावित
बागपत। जमीन विवाद में बागपत के 25 गांव के अलावा सोनीपत-पानीपत के करीब 22 गांव प्रभावित हैं। इनमें बागपत के निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहरनगर, नैथला, निनाना, लुहारी, कौताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवी कलां, सुभानपुर और सांकरौद गांव सीमा विवाद का दंश झेल रहे हैं।
इस तरह बहता रहा है खून
बागपत। यमुना खादर की धरती सालों से लाल होती रही है। 20 नवंबर 1997 को दोनों तरफ के किसानों के बीच गोलाबारी में बागपत के कुर्डी गांव का विशंभर की मौत हो गई थी। 20 अक्तूबर 1998 को हरियाणा के किसानों ने बागपत के नंगला बहलोपुर गांव में फायरिंग कर करीब 80 घरों को आग के हवाले कर दिया था। 19 नवंबर 2008 को हरियाणा के मनौली गांव के किसानों ने काठा गांव के किसानों की 150 बीघा गन्ने की फसल को तहस-नहस कर दिया था। दिसंबर 2008 में हरियाणा के किसानों ने सिसाना के किसानों पर फायरिंग कर दी थी। पिछले वर्ष भी निवाड़ा के किसानों पर फायरिंग की गई थी, जिसमें कई किसान घायल हो गए थे।
पिकनिक जैसे हो गई अधिकारियों की मीटिंग
बागपत। दोनों प्रदेशों के अधिकारी हर साल मीटिंग करते हैं। फाइलें खंगाली जाती हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता है। खादर में तनाव के वक्त भी दोनों प्रदेशों के अधिकारियों का जमावड़ा लगता है, लेकिन हासिल कुछ नहीं होता।
हथियारों के बीच कटती है फसल
बागपत। दोनों प्रदेशों के किसान हथियार लेकर फसल कटाई करने पहुंचते हैं। शामली के किसान की मौत के मामले ने एक बार फिर यही साबित कर दिया है। बंदूकों के पहरे में फसल कटती है और घर तक लाई जाती है।
पीएम से मांग चुके हैं इच्छा मृत्यु
बागपत। निवाड़ा गांव के किसान इखलाक खुलासा करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर करीब 25 किसान इच्छा मृत्यु की मांग कर चुके हैं। अब तक कोई जवाब नहीं मिला। आखिर किसान कहां जाएं।
राई में यह हुआ था फैसला
बागपत। सोनीपत के राई में वर्षे 2013 में बागपत के निवाड़ा और सोनीपत के जाजल गांव के किसानों की बैठक हुई। दोनों तहसीलों के एसडीएम मौजूद रहे। तय किया गया था कि यमुना की ढ़ाग के ऊपर की जमीन पर जाजल के किसान काबिज रहेंगे, लेकिन यमुना के अंदर की जमीन पर निवाड़ा गांव के किसान काबिज होंगे। फैसला हुआ, लेकिन हरियाणा के किसानों ने सिर्फ एक साल ही इसका पालन किया, इसके बाद फिर से सारे नियम तोड़ दिए गए।
क्या था दीक्षित अवार्ड
बागपत। वर्ष 1979 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने कृषि मंत्री उमा शंकर दीक्षित की अध्यक्षता में समाधान के लिए अवार्ड का गठन किया, जिसे दीक्षित अवार्ड माना गया। व्यवस्था दी कि वर्ष 1974 की यमुना धार को आधार मानकर सीमांकन कराया जाए। इसके बाद यमुना खादर में सीमांकन कर खंभे लगवा दिए। कुछ दिन बाद खंभे गायब हो गए। इसका आरोप भी हरियाणा के किसानों पर लगा। भूमि के पूरे रिकॉर्ड का आदान प्रदान भी अभी तक नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
45 सौ हेक्टेयर जमीन पर विवाद
बागपत। बागपत से सोनीपत और पानीपत के यमुना खादर की करीब 50 किमी सीमा सटी है। यमुना की धार बदलते रहने के कारण दोनों तरफ के हजारों किसानों की 4500 हेक्टेयर भूमि सीमा विवाद में फंसी हैं। बागपत के किसानों की 2850 हेक्टेयर और हरियाणा के सोनीपत-पानीपत के किसानों की 1750 हेक्टेयर भूमि का विवाद है।
विज्ञापन
बागपत के 25 गांव प्रभावित
बागपत। जमीन विवाद में बागपत के 25 गांव के अलावा सोनीपत-पानीपत के करीब 22 गांव प्रभावित हैं। इनमें बागपत के निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहरनगर, नैथला, निनाना, लुहारी, कौताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवी कलां, सुभानपुर और सांकरौद गांव सीमा विवाद का दंश झेल रहे हैं।
इस तरह बहता रहा है खून
बागपत। यमुना खादर की धरती सालों से लाल होती रही है। 20 नवंबर 1997 को दोनों तरफ के किसानों के बीच गोलाबारी में बागपत के कुर्डी गांव का विशंभर की मौत हो गई थी। 20 अक्तूबर 1998 को हरियाणा के किसानों ने बागपत के नंगला बहलोपुर गांव में फायरिंग कर करीब 80 घरों को आग के हवाले कर दिया था। 19 नवंबर 2008 को हरियाणा के मनौली गांव के किसानों ने काठा गांव के किसानों की 150 बीघा गन्ने की फसल को तहस-नहस कर दिया था। दिसंबर 2008 में हरियाणा के किसानों ने सिसाना के किसानों पर फायरिंग कर दी थी। पिछले वर्ष भी निवाड़ा के किसानों पर फायरिंग की गई थी, जिसमें कई किसान घायल हो गए थे।
पिकनिक जैसे हो गई अधिकारियों की मीटिंग
बागपत। दोनों प्रदेशों के अधिकारी हर साल मीटिंग करते हैं। फाइलें खंगाली जाती हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता है। खादर में तनाव के वक्त भी दोनों प्रदेशों के अधिकारियों का जमावड़ा लगता है, लेकिन हासिल कुछ नहीं होता।
हथियारों के बीच कटती है फसल
बागपत। दोनों प्रदेशों के किसान हथियार लेकर फसल कटाई करने पहुंचते हैं। शामली के किसान की मौत के मामले ने एक बार फिर यही साबित कर दिया है। बंदूकों के पहरे में फसल कटती है और घर तक लाई जाती है।
पीएम से मांग चुके हैं इच्छा मृत्यु
बागपत। निवाड़ा गांव के किसान इखलाक खुलासा करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर करीब 25 किसान इच्छा मृत्यु की मांग कर चुके हैं। अब तक कोई जवाब नहीं मिला। आखिर किसान कहां जाएं।
राई में यह हुआ था फैसला
बागपत। सोनीपत के राई में वर्षे 2013 में बागपत के निवाड़ा और सोनीपत के जाजल गांव के किसानों की बैठक हुई। दोनों तहसीलों के एसडीएम मौजूद रहे। तय किया गया था कि यमुना की ढ़ाग के ऊपर की जमीन पर जाजल के किसान काबिज रहेंगे, लेकिन यमुना के अंदर की जमीन पर निवाड़ा गांव के किसान काबिज होंगे। फैसला हुआ, लेकिन हरियाणा के किसानों ने सिर्फ एक साल ही इसका पालन किया, इसके बाद फिर से सारे नियम तोड़ दिए गए।