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हिंडन और कृष्णा के प्रदूषण से फैल रही बीमारियां
Updated Sun, 16 Sep 2018 01:24 AM IST
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बागपत। अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है, लेकिन ओजोन परत कमजोर होने के कारण पृथ्वी संकट में है। पर्यावरण प्रदूषण एवं औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रसायनिक पानी के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। जिले में हिंडन और कृष्णा नदियों में प्रवाहित दूषित पानी भी प्रदूषण फैला रहा है। लोग जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे है।
जिले से होकर हिंडन और कृष्णा नदियां गुजरती है। इन नदियों में फैक्ट्रियों का रसायनिक पानी डाला जाता है। जिससे नदियों का पानी दूषित हो गया है। दूषित पानी भू जल तक पहुंच गया। इन दूषित पानी के कारण लोग कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जनपद में अब तक दूषित पानी के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। एक दशक से लोग इसके खिलाफ आंदोलन चलाए हुए, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। दोनों नदियों के बीच में चौगामा क्षेत्र है। दूषित पानी से यह क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है। नदियां में प्रवाहित दूषित पानी प्रदूषण फैला रहा है। यह प्रदूषण ओजोन परत के लिए घातक है। नदियों को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए एनजीटी में भी मामला चल रहा है।
क्या है ओजोन परत
बागपत। पृथ्वी के धरातल से 20 किमी की ऊंचाई पर वायुमंडल के ताप मंडल क्षेत्र में ओजोन गैस का आवरण है। यह ओजोन परत पर्यावरण की रक्षक है। ओजोन परत हानिकारक परा बैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। यदि सूर्य से आने वाली सभी पराबैगनी किरणें पृथ्वी पर पहुंच जाती है तो पृथ्वी पर प्राणी कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं।
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पानी का प्रदूषण रोकना जरूरी
बागपत। दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह कहते हैं कि पानी का प्रदूषण लोगों के लिए समस्या बनी हुई है। एनजीटी के आदेश के बावजूद चौगामा क्षेत्र के लोगों को अभी तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया है।
कई गांव बीमारी की चपेट में
बागपत। नदियों में प्रदूषण की वजह से गांगनौली, रहतना, असारा, कंडेरा के ग्रामीण बीमारी की चपेट में है। ग्रामीण देवेंद्र सिंह, सहेंद्र, हरपाल सिंह का कहना है कि कैंसर जैसी बीमारी फैली है, यही नहीं दिव्यांगता के मामले भी सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार का ध्यान नहीं है।
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जिले से होकर हिंडन और कृष्णा नदियां गुजरती है। इन नदियों में फैक्ट्रियों का रसायनिक पानी डाला जाता है। जिससे नदियों का पानी दूषित हो गया है। दूषित पानी भू जल तक पहुंच गया। इन दूषित पानी के कारण लोग कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जनपद में अब तक दूषित पानी के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। एक दशक से लोग इसके खिलाफ आंदोलन चलाए हुए, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। दोनों नदियों के बीच में चौगामा क्षेत्र है। दूषित पानी से यह क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है। नदियां में प्रवाहित दूषित पानी प्रदूषण फैला रहा है। यह प्रदूषण ओजोन परत के लिए घातक है। नदियों को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए एनजीटी में भी मामला चल रहा है।
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क्या है ओजोन परत
बागपत। पृथ्वी के धरातल से 20 किमी की ऊंचाई पर वायुमंडल के ताप मंडल क्षेत्र में ओजोन गैस का आवरण है। यह ओजोन परत पर्यावरण की रक्षक है। ओजोन परत हानिकारक परा बैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। यदि सूर्य से आने वाली सभी पराबैगनी किरणें पृथ्वी पर पहुंच जाती है तो पृथ्वी पर प्राणी कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं।
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पानी का प्रदूषण रोकना जरूरी
बागपत। दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह कहते हैं कि पानी का प्रदूषण लोगों के लिए समस्या बनी हुई है। एनजीटी के आदेश के बावजूद चौगामा क्षेत्र के लोगों को अभी तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया है।
कई गांव बीमारी की चपेट में
बागपत। नदियों में प्रदूषण की वजह से गांगनौली, रहतना, असारा, कंडेरा के ग्रामीण बीमारी की चपेट में है। ग्रामीण देवेंद्र सिंह, सहेंद्र, हरपाल सिंह का कहना है कि कैंसर जैसी बीमारी फैली है, यही नहीं दिव्यांगता के मामले भी सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार का ध्यान नहीं है।