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14 अगस्त को ही उतम है जन्माष्टमी का पर्व
Updated Sun, 13 Aug 2017 01:33 AM IST
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बागपत। भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत शास्त्रों के अनुसार 14 अगस्त को ही उत्तम है। सभी योग इस दिन बन रहे हैं। 15 अगस्त को अष्टमी 05:39 बजे समाप्त हो जाएगी। इस लिए व्रत का कोई औचित्य नहीं बनता है। चंद्रोदय 11:30 बजे होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु, वायु, अग्नि, भविष्य पुरान में लिखा है रात में अष्टमी होने पर ही भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत उत्तम रहता है। इस वर्ष संवत 2074 को 14 अगस्त को शाम को 7:46 पर अष्टमी का प्रवेश हो जाएगा। जबकि, 15 अगस्त को अष्टमी शाम के 05:39 पर समाप्त हो जाएगी। 14 अगस्त को ही जन्माष्टमी का व्रत उत्तम और शुभ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र अष्टमी में हुआ था। अष्टमी में ही रोहिणी नक्षत्र होने पर यह जयंती योग बन जाता है। इस नक्षत्र का अभाव रहने से यह व्रत 14 अगस्त को ही मनेगा। चंद्रोदय 11:30 पर होगा। पांच हजार 243 वर्ष पूर्व मध्य रात्रि श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु, वायु, अग्नि, भविष्य पुरान में लिखा है रात में अष्टमी होने पर ही भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत उत्तम रहता है। इस वर्ष संवत 2074 को 14 अगस्त को शाम को 7:46 पर अष्टमी का प्रवेश हो जाएगा। जबकि, 15 अगस्त को अष्टमी शाम के 05:39 पर समाप्त हो जाएगी। 14 अगस्त को ही जन्माष्टमी का व्रत उत्तम और शुभ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र अष्टमी में हुआ था। अष्टमी में ही रोहिणी नक्षत्र होने पर यह जयंती योग बन जाता है। इस नक्षत्र का अभाव रहने से यह व्रत 14 अगस्त को ही मनेगा। चंद्रोदय 11:30 पर होगा। पांच हजार 243 वर्ष पूर्व मध्य रात्रि श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।
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