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दिल्ली-सहारनपुर हाईवे में बाधा बने 450 पेड़

Sun, 08 Mar 2020 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2020 12:42 AM IST
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450 trees become obstacles on Delhi-Saharanpur highway
बागपत में निर्माधीन दिल्ली-सहारनपुर हाईवे - फोटो : BAGHPAT
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के निर्माण की धीमी रफ्तार लोगों के लिए मुसीबत की वजह बन गई है। आबादी के बीच के क्षेत्र से होकर गुजरना वाहन चालकों के लिए मुश्किल भरा है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से लेकर ककड़ीपुर की सीमा तक करीब 450 पेड़ काटने की अनुमति अभी वन विभाग से नहीं मिली है। इस कारण हाईवे का निर्माण रफ्तार नहीं पकड़ सका है। काठा, सरूरपुर कलां, ट्योढ़ी, बिड़ौली, बड़ौत और किशनपुर बिराल में निर्माण नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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नियम के फेर में उलझी बिजली लाइन
बागपत। पेड़ों को काटने के अलावा विद्युत लाइन शिफ्ट करना भी चुनौती बन गया है। बड़ौली और बड़ौत में निर्धारित जगह हाईवे में लेने के बाद विद्युत पोल खड़े करने की जगह नहीं बच रही है। इस कारण निर्माण अधूरा है। उर्जा निगम के अफसरों का कहना है कि पोल और बिजली लाइन भवन से पांच फीट की दूरी पर रहनी चाहिए, जबकि जगह कम होने के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है।
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23 मई तक पूरा होना है पहला चरण
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे के पहले चरण का निर्माण 23 मई तक पूरा होना है। परियोजना निदेशक संजय मिश्रा ने कहा कि पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य 23 मई तक निर्धारित किया गया है। ठेकेदार कंपनी निर्माण के चार साल बाद तक रख रखाव करेगी।
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इस तरह होना है निर्माण
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का निर्माण 155.125 किमी होगा। अनुमानित लागत 1505.72 करोड़ है। पहले चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के मवी कलां कट से शामली बाईपास तक 61.409 किमी का निर्माण चल रहा है। पहले चरण के 61.409 किमी के हिस्से की अनुमानित लागत 726.33 करोड़ है। शामली बाईपास से सहारनपुर तक मार्ग की लंबाई 62.779 है, जिसकी अनुमानित लागत 779.39 करोड़ है। दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या नौ से लोनी होते हुए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे तक के टुकड़े का निर्माण तीसरे चरण में कराया जाएगा।
किसने क्या कहा
- क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि नियमानुसार एनओसी दी जाएगी। केंद्र सरकार से पेड़ काटने की अनुमति ली जाती है। स्थानीय स्तर पर फाइल लंबित नहीं है।

- एनएचएआई के परियोजना निदेशक संजय मिश्रा का कहना है कि एनओसी नहीं मिलने का प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं है। अगर एनओसी नहीं मिली है तो जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
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