{"_id":"5cdc697dbdec22073964f0b4","slug":"41557948797-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुरान-ए-पाक लोगों की हिदायत का जरिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुरान-ए-पाक लोगों की हिदायत का जरिया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। हाफिज हाजी वकील अहमद झिंझाना वाले ने कहा कि रमजान मुबारक माह में कुरान-ए-पाक को सुनाना और सुनना चाहिए। माह में कुरान-ए-पाक नाजिल किया गया है। कुरान पाक लोगों की हिदायत का जरिया है। अल्लाह का कलाम है। जिस तरीके से अल्लाह की बात सबसे बड़ी है, उसी तरह से अल्लाह का कलाम सबसे बड़ा है। उन्होंने कहा कि रमजान माह में कुरान-ए-पाक पढने पर नेकियां मिलती है। इस लिए मुसलमानों की तरह इस माह मुबारक के अंदर खास तौर पर पांचो वक्त की नमाज, तराबीहे और रोजा रखना चाहिए। दुनिया में कुछ नहीं हमें अपनी आखिरत का फिकर होना चाहिए, जो मरने के बाद काम आएगी।
हाईटेक युग में सहरी में जगाने वाली टॉलियां भी हुई गायब
अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। समय के साथ-साथ सब कुछ बदल जाता है। रमजान मुबारक के महीने में चार दशक पूर्व सहरी के समय शबब के लिए रात में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में रोजेदारों को जगाने के लिए लोगों की टॉलियां घूमा करती थी। उस समय साधन कम थे, लेकिन आज पर्यापत साधन हो गए है। जिस वजह से सहरी के जगाने वाले दिखाई नहीं देते है। अब हाईटेक युग में लोग अपने मोबाइलों को ही सहारा बना चुके है। मस्जिदों में भी अब माइकों से समय-समय पर घोषणाएं होती रहती है। इस लिए अब सहरी में जगाने वाली टॉलियां गायब हो गई है।
विज्ञापन
हाईटेक युग में सहरी में जगाने वाली टॉलियां भी हुई गायब
अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। समय के साथ-साथ सब कुछ बदल जाता है। रमजान मुबारक के महीने में चार दशक पूर्व सहरी के समय शबब के लिए रात में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में रोजेदारों को जगाने के लिए लोगों की टॉलियां घूमा करती थी। उस समय साधन कम थे, लेकिन आज पर्यापत साधन हो गए है। जिस वजह से सहरी के जगाने वाले दिखाई नहीं देते है। अब हाईटेक युग में लोग अपने मोबाइलों को ही सहारा बना चुके है। मस्जिदों में भी अब माइकों से समय-समय पर घोषणाएं होती रहती है। इस लिए अब सहरी में जगाने वाली टॉलियां गायब हो गई है।
विज्ञापन