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किसानों के दो परिवारों ने तहसील में डाला डेरा

Fri, 11 Jan 2019 01:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jan 2019 01:18 AM IST
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किसानों के दो परिवारों ने तहसील में डाला डेरा
बड़ौत/दोघट (बागपत)। चकबंदी में जमीन नहीं मिलने पर बामनौली गांव के दो किसानों ने परिवार सहित बड़ौत तहसील में डेरा डाल दिया है। आरोप है कि तीन साल से किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन उसकी कोई सुनने वाला नहीं। छह माह पहले किसान ने टावर पर चढ़कर विरोध जताया था, लेकिन इसके बाद भी उसे जमीन नहीं दी गई। किसान का कहना है कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलता वह तहसील से नहीं जाएगा।
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बामनौली गांव निवासी किसान कृष्णपाल व उसके भाई सुक्रमपाल ने बताया कि चकबंदी में उनकी कृषि भूमि घट गई है। पड़ोसी किसान से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। न्यायालय में भी मुकदमा चल रहा है। तीन साल से वे जमीन के लिए अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। चकबंदी से आहत होकर बृहस्पतिवार को दोनों किसान परिवार सहित ट्रैक्टर-ट्राली में घर का सामान भरकर बड़ौत तहसील पहुंच गए और तहसील में धरना शुरू कर दिया।
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किसानों ने बताया कि 21 जून 2018 को गांव में दोनों किसानों ने मोबाइल टॉवर पर चढ़कर विरोध भी किया था, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। बृहस्पतिवार को एसओसी चकबंदी भीम सैन टीम के साथ खेत में पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को बुलाया। पीड़ित किसान कृष्णपाल व सुक्रमपाल से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा, लेकिन किसानों ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। चकबंदी अधिकारियों ने किसानों से कहा कि तुम्हारी जमीन नहीं मिल सकती। इससे किसान परिवार में रोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि चकबंदी अधिकारी उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। जब तक उनकी जमीन की पूरी पैमाइश नहीं कराई जाती, तब तक वे बड़ौत तहसील में धरने से नहीं उठेंगे। तहसील में ही खाना बनाएंगे और वहां पर रात भी गुजारेंगे। यदि परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ हुआ तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की कहोगी। इस संबंध में एसओसी भीम सैन ने बताया कि दोनों पक्षों का न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। कोर्ट के आदेश आने तक भूमि की पैमाइश नहीं की जा सकती। किसान गलत आरोप लगा रहे हैं। दबाव बनाने के लिए इस तरह की हरकत की जा रही है।
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