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%मौत से कब तक डरेंगे, यमुना के पार है जिंदगी’

Sun, 17 Sep 2017 01:55 AM IST
Updated Sun, 17 Sep 2017 01:55 AM IST
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%मौत से कब तक डरेंगे, यमुना के पार है जिंदगी’
बागपत। यमुना किनारे काठा गांव में नाव हादसे के बाद मातम पसरा है। सिसकते किसान और मजदूरों के आंसू पोंछने का सिलसिला जारी है। यमुना के किनारे से मौत की नाव हट चुकी है, लेकिन सवाल है कि दो हजार बीघा जमीन तक सैकड़ों किसान और मजदूर अब कैसे पहुंच सकेंगे। किसान के अनुसार हादसा दर्दनाक है, लेकिन मौत से कब तक डरेंगे। खेत उनकी जिंदगी है, यहीं से चूल्हे चलते हैं। जमीन को छोड़ न हीं सकते। सिस्टम को यदि सैकड़ों लोगों की जान की चिंता है तो पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।
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शनिवार को सुबह के समय करीब 11 बजे हैं। गांव काठा नाव हादसे में मारे गए तेजपाल के घर सांत्वना देने वालों का तांता लगा है। बात शुरू होती है तो युवा किसान राहुल ने बताया यमुना नदी के पार दो हजार बीघा जमीन अकेले काठा गांव की है। इससे सैकड़ों परिवारों की रोजी रोटी चलती है। किसान के खेत की मदद से ही मजदूरों के चूल्हे जलते हैं। विनोद कुमार कहते हैं कि खेती को कैसे छोड़ दें। यमुना नदी का उफान पहले भी देखा है, लेकिन कभी गांव का इतना भयावह दर्द नहीं दिया। सिस्टम की चूक है। रामपाल ने कहा सरकार ने कभी पुख्ता इंतजाम नहीं किए। एक दशक पहले तक ग्रामीण खुद इंतजाम करते थे। कभी हादसा नहीं हुआ। काठा पर इससे बड़ी आपदा क्या होगी, लेकिन फिर भी किसानों को खेतों तक जाना ही पड़ेगा। सूरजभान कहते हैं कि खेती किसान की जिंदगी होती है, उसे छोड़ नहीं सकते। काठा की एक या दो बीघा नहीं बल्कि दो हजार बीघा जमीन यमुना नदी के उस पार है, इसलिए नदी तो फिर भी पार करनी ही पड़ेगी। कैसे, इस पर किसान कहते हैं कि पहले सरकार का काम देख लें, फिर कोई साझा फैसला लिया जाएगा। मजदूर बिलेंद्र का बेटा अनिल हादसे का शिकार हुआ। वह कहता है कि आधे से अधिक गांव की जिंदगी तो यमुना के उस पार ही है, सरकार को कोई इंतजाम करना चाहिए।
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क्यों मजबूर हैं काठा के लोग
बागपत। काठा गांव के किसान और मजदूर यदि अपने गांव के सामने से यमुना पार कर खेतों में जाएं तो दस मिनट का समय लगता है. यदि ग्रामीणों को गौरीपुर मोड़ के पुल से घूमकर खेतों तक जाना पड़े तो एक चक्कर करीब 70 किमी का बैठता है। यही वजह है किसान और मजदूर यमुना पार करने को ही प्राथमिकता देते हैं।
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क्या हो सकता है काठा के लिए
बागपत। गौरीपुर का पुल दूर है, लेकिन इसके अलावा भी कई विकल्प है। प्रशासन यहां कम से कम एक बड़ी नाव और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित नाविक का इंतजाम करें। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के एक तरफ कट है, यदि दूसरी तरफ भी कट मिल जाए तो लोगों की जिंदगी बेहद आसान हो जाएगी या गांव के सामने पुल का निर्माण, लेकिन यह इतनी जल्दी संभव नहीं है।



नाव हटाई, इंतजाम कुछ नहीं
बागपत। शनिवार को पुलिस ने काठा गांव के किनारे से नाव हटा ली है। गमजदा काठा के लोग फिलहाल यमुना पार नहीं कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई विकल्प नहीं रखा गया है। यदि किसी किसान को खेत में जाना पड़ेगा, तो 70 किमी का फेर लगाना ही पड़ेगा। जिला पंचायत या प्रशासन के पास अभी कोई ठोस विकल्प नहीं है।
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