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गठवाला के निर्णय का देशखाप का भी समर्थन
Updated Wed, 21 Feb 2018 01:24 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। सोनीपत के गोहाना में गठवाला खाप के घूंघट को लेकर किए गए फैसले का देश खाप ने भी समर्थन किया है। चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा महिलाओं का खाप पंचायतें हमेशा से सम्मान करती हैं। बेटियां आगे बढ़ रही है। घूंघट से निकलकर महिलाओं ने ओलंपिक खेलों में पदक जीता। समाज को बदलाव स्वीकार करने चाहिए। देहात में घूंघट परिवारों की स्वेच्छा पर निर्भर हैं। अधिकतर परिवारों में बहू से घूंघट नहीं कराने की प्रथा लंबे समय से चल रही है।
मंगलवार को अपने आवास पर पर उन्होंने कहा कि देश खाप पहले से ही महिलाओं के उत्थान के पक्ष मेें है। आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। चाहे कृषि का क्षेत्र हो या फिर शिक्षा का। सभी में महिलाएं भागीदारी कर रही है। उन्होंने महिलाओं से भी अपील की कि जिस माहौल व संस्कृति मेें वे रह रही है, उसका सम्मान करें। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति विदेशों में भी स्वीकार्य रही है। गोहाना सोनीपत में आयोजित गठवाला खाप के समारोह में लिए निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चौरासी खाप पहले से ही महिलाओं घूंघट करें, इसके पक्ष में नहीं है। समाज में करीब दो दशक से ही घूंघट को लेकर बदलाव हो चुका है। परिवारों में शिक्षा बढ़ने के साथ बहू से घूंघट नहीं कराया जा रहा है। जरूरी परिवारों में मान-सम्मान है। बहू अपने ससुर के लिए बेटी जैसी है। नए दौर में इस बदलाव को स्वीकार किया जाना चाहिए।
सौरम में जब बदला था पहनावा
बागपत। मुजफ्फरनगर के सौरम में वर्ष 1940 में हुई खाप पंचायत में महिलाओं के पहनावे में बदलाव किया । उस दौर में देहात की महिलाएं घाघरा पहनती थी। सर्व खाप के अध्यक्ष सुभाष बालियान बताते हैं कि पंचायत ने ऐलान किया था कि महिलाएं घाघरे के बजाए सूट सलवार का प्रयोग कर सकती हैं।
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मंगलवार को अपने आवास पर पर उन्होंने कहा कि देश खाप पहले से ही महिलाओं के उत्थान के पक्ष मेें है। आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। चाहे कृषि का क्षेत्र हो या फिर शिक्षा का। सभी में महिलाएं भागीदारी कर रही है। उन्होंने महिलाओं से भी अपील की कि जिस माहौल व संस्कृति मेें वे रह रही है, उसका सम्मान करें। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति विदेशों में भी स्वीकार्य रही है। गोहाना सोनीपत में आयोजित गठवाला खाप के समारोह में लिए निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चौरासी खाप पहले से ही महिलाओं घूंघट करें, इसके पक्ष में नहीं है। समाज में करीब दो दशक से ही घूंघट को लेकर बदलाव हो चुका है। परिवारों में शिक्षा बढ़ने के साथ बहू से घूंघट नहीं कराया जा रहा है। जरूरी परिवारों में मान-सम्मान है। बहू अपने ससुर के लिए बेटी जैसी है। नए दौर में इस बदलाव को स्वीकार किया जाना चाहिए।
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सौरम में जब बदला था पहनावा
बागपत। मुजफ्फरनगर के सौरम में वर्ष 1940 में हुई खाप पंचायत में महिलाओं के पहनावे में बदलाव किया । उस दौर में देहात की महिलाएं घाघरा पहनती थी। सर्व खाप के अध्यक्ष सुभाष बालियान बताते हैं कि पंचायत ने ऐलान किया था कि महिलाएं घाघरे के बजाए सूट सलवार का प्रयोग कर सकती हैं।
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