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अहंकार पतन का कारण

Wed, 02 Aug 2017 12:59 AM IST
Updated Wed, 02 Aug 2017 12:59 AM IST
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अहंकार पतन का कारण
अहंकार पतन का कारण
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बड़ौत (बागपत)। दंडी स्वामी प्रेम नारायण आश्रम ने कहा समर्थ वही है, जिसने अपने विकारों पर विजय प्राप्त कर ली।
जागोस गांव के श्रीराम मंदिर में आयोजित राम कथा में दंडी स्वामी ने कहा अहंकार पतन का कारण होता है। अहंकार शून्य सीता ने उसे बाएं हाथ से उठा लिया। सीता भक्ति है। शक्ति पानी सेना का साकार रूप है। सेवा भाव जिस मानस में होगा, उसके लिए अहंकार तणवत हो जाएगा। श्रीराम में अहंकार शून्य थे। इसीलिए वे धनुष तोड़ने में सफल रहे। जबकि अहंकारी राजा उसे हिला भी नहीं सके। राजा जनक से अपमानित होने पर अपने स्थान से उठकर नहीं आए। अहंकारी व्यक्ति भक्ति नहीं कर सकता। सीता ने माला डालने में विलंब कर श्रीराम से देरी का बदला लिया। धनुष तोड़ने में उन्होंने जान बुझकर देरी की और जब सीता ने राम के गले में माला डाल दी तो सीता राम की हो गई और पूरा जगत उल्लास से खिल उठा। इस अवसर पर राकेश, छोटे शर्मा, तिलकराम, सुनील शर्मा, रामौवतार, सुरेश, बालेश्वर शर्मा, राज कुमार, अनिल शर्मा आदि रहे।
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