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ग्लैंडर्स रोग से पीड़ित सात घोड़ों को लगाया मौत का इंजेक्शन
Updated Sun, 20 May 2018 12:29 AM IST
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ग्लैंडर्स से पीड़ित सात घोड़ों को दिया मौत का इंजेक्शन
बागपत। ग्लैंडर्स रोग से पीड़ित घोड़े, घोड़ी और खच्चर सहित सात मवेशियों को पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौत का इंजेक्शन लगाया। उसके बाद जेसीबी मशीन से गहरा गड्ढा खुदवाकर मृत घोड़ों को दफना दिया गया। इसके बाद विभाग ने मुआवजा देने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
शनिवार को पशु चिकित्सा विभाग की टीम नौरोजपुर गुर्जर रोड स्थित एक ईंट भट्ठे पर पहुंची। यहां पर नौ घोड़ा, घोड़ी और खच्चर में ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि हुई थी। इसके बाद विभाग की टीम ने सभी बीमार घोड़ों को एक स्थान पर लाकर उन्हें मौत का इंजेक्शन लगाया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने इसकी जानकारी प्रभारी डीएम लोकपाल सिंह को दी।
सीवीओ ने बताया कि कुर्डी नांगल निवासी राजकुमार की घोड़ी, आस मोहम्मद की घोड़ी, प्रदीप का घोड़ा, इंद्रजीत का खच्चर, ओमकार की घोड़ी, नरेंद्र की घोड़ी, नौरोजपुर गांव निवासी नवाब सिंह के घोड़े को पहले बेहोश किया और उसके बाद उसे जहर का इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया गया। उसके बाद टीम ने मौके पर ही जेसीबी से गहरे-गहरे गड्ढे खोदवाकर उन्हें दफना दिए गए। उन्होंने बताया कि मृत किए गए घोड़ा और खच्चर पालकों को नियमानुससार मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिख दिया गया है। वहां से अनुमति मिलते ही खच्चर मलिक को 16 हजार और घोड़ा मालिक को 25 हजार का मुआवजा दिया जाएगा। 102 अश्वों के सैंपल भी भेजे गए है जल्द इसकी रिपॉर्ट आते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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एक घोड़े की पहले ही हो गई मौत
ग्लैंडर्स से पीड़ित नौ घोड़ों में बीमारी पुष्टि हुई थी। इसमें कुछ दिन पूर्व एक घोड़े को मौत दे दी गई थी। आठ अश्व पालकों ने इसका विरोध करते हुए दोबारा से इसकी जांच करवाने की मांग की थी। दोबारा आई रिपोर्ट में भी उन्हें रोग की पुष्टि हुई। इस बीमारी के चलते शमीम का घोड़ा पहले ही मर गया था। अब सात घोड़ों को शनिवार को मौत का इंजेक्शन लगाया।
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मृत अश्वों को देख छलक उठे आंसू
मृत पड़े अपने घोड़े और खच्चरों को देखकर मजदूरों की आंखे भर्र आइं। पालक बोले, जिनको कभी लाड़ और प्यार से परिवार की तरह पाला। उन्हें अब मरता देखना पड़ा है। इनकी मौत के साथ ही परिवार पर रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
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छह माह तक अन्य पशु न बांधे
सीवीओ डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर रोग से पीड़ित घोड़े और खच्चर बंधे थे। वे वहां पर छह माह तक न तो पशु बांधे और न ही खुद जाएं क्योंकि इस बीमारी का छह माह तक फैलने का खतरा बना रहता है। साथ ही टीम ने वहां चूना भी डलवा दिया और दवा का छिड़काव कराया गया।
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मानव जीवन के लिए भी खतरा ग्लैंडर्स
डिप्टी सीवीओ डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि ग्लैंडर्स रोग मानव जीवन के लिए भी खतरा है। इस रोग में अश्व प्रजाति के पशुओं की मौत निश्चित है। एक्ट के अनुसार पशु चिकित्सा विभाग को इस रोग से पीड़ित घोड़े, खच्चर, गधे आदि को मारने के निर्देश हैं।
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बागपत। ग्लैंडर्स रोग से पीड़ित घोड़े, घोड़ी और खच्चर सहित सात मवेशियों को पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौत का इंजेक्शन लगाया। उसके बाद जेसीबी मशीन से गहरा गड्ढा खुदवाकर मृत घोड़ों को दफना दिया गया। इसके बाद विभाग ने मुआवजा देने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
शनिवार को पशु चिकित्सा विभाग की टीम नौरोजपुर गुर्जर रोड स्थित एक ईंट भट्ठे पर पहुंची। यहां पर नौ घोड़ा, घोड़ी और खच्चर में ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि हुई थी। इसके बाद विभाग की टीम ने सभी बीमार घोड़ों को एक स्थान पर लाकर उन्हें मौत का इंजेक्शन लगाया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने इसकी जानकारी प्रभारी डीएम लोकपाल सिंह को दी।
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सीवीओ ने बताया कि कुर्डी नांगल निवासी राजकुमार की घोड़ी, आस मोहम्मद की घोड़ी, प्रदीप का घोड़ा, इंद्रजीत का खच्चर, ओमकार की घोड़ी, नरेंद्र की घोड़ी, नौरोजपुर गांव निवासी नवाब सिंह के घोड़े को पहले बेहोश किया और उसके बाद उसे जहर का इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया गया। उसके बाद टीम ने मौके पर ही जेसीबी से गहरे-गहरे गड्ढे खोदवाकर उन्हें दफना दिए गए। उन्होंने बताया कि मृत किए गए घोड़ा और खच्चर पालकों को नियमानुससार मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रमुख सचिव को पत्र लिख दिया गया है। वहां से अनुमति मिलते ही खच्चर मलिक को 16 हजार और घोड़ा मालिक को 25 हजार का मुआवजा दिया जाएगा। 102 अश्वों के सैंपल भी भेजे गए है जल्द इसकी रिपॉर्ट आते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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एक घोड़े की पहले ही हो गई मौत
ग्लैंडर्स से पीड़ित नौ घोड़ों में बीमारी पुष्टि हुई थी। इसमें कुछ दिन पूर्व एक घोड़े को मौत दे दी गई थी। आठ अश्व पालकों ने इसका विरोध करते हुए दोबारा से इसकी जांच करवाने की मांग की थी। दोबारा आई रिपोर्ट में भी उन्हें रोग की पुष्टि हुई। इस बीमारी के चलते शमीम का घोड़ा पहले ही मर गया था। अब सात घोड़ों को शनिवार को मौत का इंजेक्शन लगाया।
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मृत अश्वों को देख छलक उठे आंसू
मृत पड़े अपने घोड़े और खच्चरों को देखकर मजदूरों की आंखे भर्र आइं। पालक बोले, जिनको कभी लाड़ और प्यार से परिवार की तरह पाला। उन्हें अब मरता देखना पड़ा है। इनकी मौत के साथ ही परिवार पर रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
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छह माह तक अन्य पशु न बांधे
सीवीओ डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर रोग से पीड़ित घोड़े और खच्चर बंधे थे। वे वहां पर छह माह तक न तो पशु बांधे और न ही खुद जाएं क्योंकि इस बीमारी का छह माह तक फैलने का खतरा बना रहता है। साथ ही टीम ने वहां चूना भी डलवा दिया और दवा का छिड़काव कराया गया।
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मानव जीवन के लिए भी खतरा ग्लैंडर्स
डिप्टी सीवीओ डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि ग्लैंडर्स रोग मानव जीवन के लिए भी खतरा है। इस रोग में अश्व प्रजाति के पशुओं की मौत निश्चित है। एक्ट के अनुसार पशु चिकित्सा विभाग को इस रोग से पीड़ित घोड़े, खच्चर, गधे आदि को मारने के निर्देश हैं।