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एनपीए में जाने से बचे होम लोन और लघु उद्योग के 18 हजार खाते

Sat, 05 Sep 2020 12:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 12:12 AM IST
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18 thousand accounts of home loans and small scale industries left in NPA
एनपीए में जाने से बचे होम लोन और लघु उद्योग के 18 हजार खाते
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिलहाल खाता धारकों को मिली राहत
जिले में पुराने 11715 एनपीए खाते, जिन पर 245 करोड़ बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कर्ज नहीं चुका पा रहे खाताधारकों के बैंक खाते फिलहाल एनपीए में शामिल नहीं किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जिले के 18482 खाताधारकों को लाभ होगा। इनमें लघु उद्योग और होम लोन के खाताधारक शामिल हैं।
कोरोना काल में मार्च महीने से 31 अगस्त तक एनपीए श्रेणी में शामिल नहीं किए जाने से खाताधारकों को राहत मिली है। बैंक अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई और रिजर्व बैंक की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक प्रदीप थरोट का कहना है कि होम लोन के करीब 1482 खाताधारकों और लघु उद्योग के 17 हजार खाता धारकों को इसका फायदा मिलेगा। इन्हें एनपीए में शामिल नहीं किया जाएगा।
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बिना अनुमति के नहीं काटी गई खातों से किश्त
प्रदीप थरोट का कहना है कि होम लोन के खातों की किश्त बिना खाता धारक की अनुमति के नहीं ली गई है। नौकरीपेशा या व्यवसायी कोरोना संक्रमण काल में भी किश्त जमा करते आ रहे हैं।
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इस तरह जमा की जा सकती है किश्त
होम लोन की किश्त के लिए बैंकों ने गाइडलाइन जारी की है। कोरोना के चलते मिल रही छूट 31 अगस्त को खत्म हो गई। छह माह के ब्याज के रुपयों पर टर्म लोन दिया जा रहा है। किश्तों में खाताधारक जमा कर सकते हैं। इसके अलावा री-स्ट्रक्चर फार्मूले के साथ बैंक लोन के रुपये लेगा। खाताधारक के पास दोनों विकल्प खुले हुए हैं।
एनपीए खातों के 245 करोड़ बकाया
जिले में कोरोना काल से पहले यानी 31 मार्च 2020 तक 245 करोड़ एनपीए खातों में हैं। 18 बैंकों में 11715 खाते एनपीए हो चुके हैं। कोरोना के बाद इन खातों की संख्या बढ़ना लाजिमी है। लेकिन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
होम लोन के 1482 खाते
प्रदीप थरोट ने बताया कि होम लोन के जिले में 1482 बैंक खाते हैं। इनमें अकेले सिंडीकेट बैंक और केनरा बैंक के ही कुल 674 खाते हैं। इन पर बैंकों के 93.05 करोड़ रुपये बकाया हैं।
किसने क्या कहा
कोर्ट रोड निवासी सोनू का कहना है कि कोरोना काल के छह महीने में भी उनके खाते से किश्त काटी गई है। बैंक ने उनसे जानकारी लेकर राहत नहीं दी है।
बड़ौत रोड निवासी सीमा चौधरी का कहना है कि कोरोना काल में आर्थिक नुकसान हुआ है। बैंकों की ओर से संपर्क कर किश्त शुरू करने और बकाए को जमा करने की बात कही जा रही है।

किसानों को भी मिलेगी राहत
एलडीएम प्रदीप थरोट का कहना है कि गन्ने पर निर्भर किसानों के खातों को एनपीए में शामिल नहीं किया जाएगा। गन्ना किसानों के एक लाख से अधिक खाते हैं, इनमें से करीब 45 हजार खाते भी इस दायरे में आने से बच गए हैं।
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