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सिनौली में उत्खनन कार्य जारी......
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सिनौली में उत्खनन कार्य जारी रहा
बड़ौत (बागपत)। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय एवं भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से सिनौली में प्रथम और द्वितीय चरण के बाद तृतीय चरण में उत्खनन कार्य रविवार को भी जारी रहा।
15 जनवरी को सिनौली मेें शुरू हुए तृतीय चरण के उत्खनन कार्य को एक माह से अधिक का समय हो चुका है। इस अवधि में यहां से मानव बस्ती के प्रमाण मिल चुकी है। इसके अलावा ईटों की विशाल दीवार, दुर्लभ पोट्री के साथ-साथ एक ट्रेंच से मानव कंकाल प्राप्त हुआ। यह महिला का कंकाल है और इसके कानों से स्वर्ण आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। इस दौरान टीम को एक शाही ताबूत भी मिला। संभावना जतायी जा रही है कि यह महिला का कंकाल 4500 वर्ष पुराना है और किसी रायल परिवार से है। रविवार को भी उत्खनन कार्य जारी रहा।
वर्ष 2005 में हुई थी प्रथम चरण की खुदाई
बड़ौत। वर्ष 2005 में सिनौली में वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में एएसआई द्वारा प्रथम चरण की खुदाई कराई गई थी। यहां पर 177 मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तलवार के साथ-साथ एक विशाल शवाधान केंद्र की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 15 फरवरी 2018 को सिनौली साइट पर एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में लगभग साढ़े तीन माह तक उत्खनन हुआ। आठ मानव कंकाल, तीन एंटीना सोर्ड यानी तलवारें, काफी संख्या में मृदभांड, विभिन्न दुर्लभ पत्थरों के मनके, सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राप्ति के रूप मेें पांच हजार साल प्राचीन मानव योद्धाओं के तीन ताबूत तांबे से सुसज्जित, भारतीय योद्धाओं के तीन रथ प्राप्त हुए, जो इतिहास की दुर्लभतम घटना साबित हुई।
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बड़ौत (बागपत)। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय एवं भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से सिनौली में प्रथम और द्वितीय चरण के बाद तृतीय चरण में उत्खनन कार्य रविवार को भी जारी रहा।
15 जनवरी को सिनौली मेें शुरू हुए तृतीय चरण के उत्खनन कार्य को एक माह से अधिक का समय हो चुका है। इस अवधि में यहां से मानव बस्ती के प्रमाण मिल चुकी है। इसके अलावा ईटों की विशाल दीवार, दुर्लभ पोट्री के साथ-साथ एक ट्रेंच से मानव कंकाल प्राप्त हुआ। यह महिला का कंकाल है और इसके कानों से स्वर्ण आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। इस दौरान टीम को एक शाही ताबूत भी मिला। संभावना जतायी जा रही है कि यह महिला का कंकाल 4500 वर्ष पुराना है और किसी रायल परिवार से है। रविवार को भी उत्खनन कार्य जारी रहा।
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वर्ष 2005 में हुई थी प्रथम चरण की खुदाई
बड़ौत। वर्ष 2005 में सिनौली में वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में एएसआई द्वारा प्रथम चरण की खुदाई कराई गई थी। यहां पर 177 मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तलवार के साथ-साथ एक विशाल शवाधान केंद्र की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 15 फरवरी 2018 को सिनौली साइट पर एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में लगभग साढ़े तीन माह तक उत्खनन हुआ। आठ मानव कंकाल, तीन एंटीना सोर्ड यानी तलवारें, काफी संख्या में मृदभांड, विभिन्न दुर्लभ पत्थरों के मनके, सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राप्ति के रूप मेें पांच हजार साल प्राचीन मानव योद्धाओं के तीन ताबूत तांबे से सुसज्जित, भारतीय योद्धाओं के तीन रथ प्राप्त हुए, जो इतिहास की दुर्लभतम घटना साबित हुई।
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