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संस्कृत से ही संस्कृति की रक्षा संभव
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बिनौली (बागपत)। बरनावा के लाक्षागृह स्थित श्री महानंद संस्कृत विद्यालय में वर्तमान परिवेश में संस्कृत की उपयोगिता विषय पर विचार गोष्ठी हुई, इसमें विद्वानों ने संस्कृत को सब भाषाओं की जननी और संस्कृति की वाहक बताया।
गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र ने किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम कान्वेंट स्कूलों में दी जा रही शिक्षा से इंजीनियर व डॉक्टर तो बन रहे हैं, लेकिन संस्कारों के अभाव में मानव नहीं बन रहे हैं। जबकि हमारी प्राचीन परंपरा के वाहक गुरुकुलों में संस्कृत और संस्कारों की शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा से ही हमारी संस्कृति की रक्षा हो सकती है। ऋषि दयानन्द की विचारधारा, मूल्य और सिद्धांतों व उनके द्वारा रचित ग्रंथों में निहित शिक्षा से ही राष्ट्र की उन्नति हो सकती है। संस्कृत के ज्ञान के बिना वेद ज्ञान की अनुभूति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आज भी गुरुकुलों में संस्कृत, संस्कारों व संस्कृति की शिक्षा दी जा रही है। संस्कृत के उन्नयन से हमारी संस्कृति सुरक्षित रह सकती है। उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित योजनाओं का यहां जल्द क्रियान्वयन शुरू कराने का भी आश्वासन दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रधानाचार्य आचार्य विनोद कुमार, संचालन आचार्य अंकुर भारद्वाज ने किया। इसमें डॉ. देवेंद्र शास्त्री, सुनील शास्त्री, निमेष शर्मा, गुरुवचन शास्त्री, अरविंद शास्त्री, यश कुमार, सौरभ, विशाल आदि ने विचार व्यक्त किए।
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गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र ने किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम कान्वेंट स्कूलों में दी जा रही शिक्षा से इंजीनियर व डॉक्टर तो बन रहे हैं, लेकिन संस्कारों के अभाव में मानव नहीं बन रहे हैं। जबकि हमारी प्राचीन परंपरा के वाहक गुरुकुलों में संस्कृत और संस्कारों की शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा से ही हमारी संस्कृति की रक्षा हो सकती है। ऋषि दयानन्द की विचारधारा, मूल्य और सिद्धांतों व उनके द्वारा रचित ग्रंथों में निहित शिक्षा से ही राष्ट्र की उन्नति हो सकती है। संस्कृत के ज्ञान के बिना वेद ज्ञान की अनुभूति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आज भी गुरुकुलों में संस्कृत, संस्कारों व संस्कृति की शिक्षा दी जा रही है। संस्कृत के उन्नयन से हमारी संस्कृति सुरक्षित रह सकती है। उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित योजनाओं का यहां जल्द क्रियान्वयन शुरू कराने का भी आश्वासन दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रधानाचार्य आचार्य विनोद कुमार, संचालन आचार्य अंकुर भारद्वाज ने किया। इसमें डॉ. देवेंद्र शास्त्री, सुनील शास्त्री, निमेष शर्मा, गुरुवचन शास्त्री, अरविंद शास्त्री, यश कुमार, सौरभ, विशाल आदि ने विचार व्यक्त किए।
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