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खेत में फसल अवशेष जलाने से कम होती है उर्वरा शक्ति
Updated Thu, 27 Sep 2018 01:24 AM IST
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बागपत। सम्राट पृथ्वीराज चौहान डिग्री कॉलेज में फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों के सेमिनार में कृषकों को उपयोगी जानकारी दी गई।
सह प्राध्यापक कृषि अभियंत्रण डॉ. संजय सिंह ने कहा कि फसलों के अवशेष को जलाना नहीं चाहिए। इससे वातावरण के साथ-साथ भूमि को भी हानि होती है। इसके लिए हमे हैप्पी सीडर, मल्चर, जीरोटिल, सिड ड्रिल का प्रयोग करना चाहिए। डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि फसल अवशेष को मिट्टी में मिला देना चाहिए। जिससे उर्वरता तो बढ़ती है और इसकी मात्रा को भी कम किया जा सकता है। खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. गजेंद्र पाल ने अवशेष को मिट्टी में मिलने से जहां जमीन के पोषक तत्व बढ़ेंगे, वहीं पर्यावरण भी शुद्ध होगा। प्राचार्य डॉ. अनिल, डॉ. अरविंद वर्मा, अनिल शर्मा, नीरज मलिक, डॉ. प्रदीप सिरोही, डॉ. शीतल पांडेय, रवि शर्मा, डॉ. संजय, पवन, डॉ. सुदेश भाटी, संजय चौहान मौजूद रहे। उधर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों ने भी छात्र-छात्राओं को फसल अवशेष से होने वाले दुष्प्रभाव को बताया।
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सह प्राध्यापक कृषि अभियंत्रण डॉ. संजय सिंह ने कहा कि फसलों के अवशेष को जलाना नहीं चाहिए। इससे वातावरण के साथ-साथ भूमि को भी हानि होती है। इसके लिए हमे हैप्पी सीडर, मल्चर, जीरोटिल, सिड ड्रिल का प्रयोग करना चाहिए। डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि फसल अवशेष को मिट्टी में मिला देना चाहिए। जिससे उर्वरता तो बढ़ती है और इसकी मात्रा को भी कम किया जा सकता है। खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. गजेंद्र पाल ने अवशेष को मिट्टी में मिलने से जहां जमीन के पोषक तत्व बढ़ेंगे, वहीं पर्यावरण भी शुद्ध होगा। प्राचार्य डॉ. अनिल, डॉ. अरविंद वर्मा, अनिल शर्मा, नीरज मलिक, डॉ. प्रदीप सिरोही, डॉ. शीतल पांडेय, रवि शर्मा, डॉ. संजय, पवन, डॉ. सुदेश भाटी, संजय चौहान मौजूद रहे। उधर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों ने भी छात्र-छात्राओं को फसल अवशेष से होने वाले दुष्प्रभाव को बताया।
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