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रालोद खामोश, सपा और कांग्रेस के विकल्प खुले
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बागपत। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बसपा अध्यक्ष ने विधानसभा के उपचुनाव अकेले लड़ने का एलान कर सहयोगी दलों को चौंका दिया। रालोद नेतृत्व की ओर से प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि उपचुनाव में रालोद के पास सपा और कांग्रेस से गठबंधन का विकल्प खुला हुआ है। इसकी एक वजह यह भी है कि जिन सीटों पर रालोद अध्यक्ष अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने चुनाव लड़ा, उन दोनों जगह कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार ही खड़े नहीं किए थे।
बसपा के गठबंधन से हट जाने के बाद नए सियासी समीकरण बनेंगे। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह या उपाध्यक्ष जयंत चौधरी की ओर से कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है। हालांकि रालोद और सपा नेताओं का मानना है कि बसपा भले ही गठबंधन से हट गई हो, लेकिन दोनों दलों का गठबंधन उपचुनाव और इसके बाद भी जारी रहेगी। दोनों दल उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तैयारी एक साथ करेंगे। बसपा के विकल्प के तौर पर इस गठबंधन में कांग्रेस को शामिल किया जा सकता है। रालोद और कांग्रेस की नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। बागपत और मुजफ्फरनगर सीट पर कांग्रेस ने इस बार उम्मीदवार ही नहीं उतारे थे।
सपा नेताओं से हुई थी रालोद नेताओं की बातचीत
बागपत। लोकसभा चुनाव में गठबंधन के दौरान भी रालोद नेताओं और बसपा नेताओं की सीधे तौर पर कोई बात नहीं हुई थी। गठबंधन की शुरूआत सपा और बसपा ने की। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी से बातचीत कर तीन सीटों पर सहमति बनाई थी। शुरूआत दौर की बातचीत के अलावा गठबंधन के एलान के वक्त भी रालोद एक तरीके से अलग थलग ही रहा था।
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किसे क्या कहे रालोद, जाट वोट ही बंट गए
बागपत। बागपत लोकसभा सीट पर रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। जाट वोटों के उम्मीदों से अधिक ध्रुवीकरण हार की बड़ी वजह रहा। दलित वोटों का भी ध्रुवीकरण हुआ, लेकिन इसके बाद भी काफी दलित वोट रालोद के हिस्से में आए। इसी तरह यादव बाहुल्य क्षेत्र में भी रालोद को वोट मिलें, हालांकि यादव वोट भाजपा को भी मिले, लेकिन रालोद का बेस वोट कहे जाने वाले जाट वोटों का अधिक ध्रुवीकरण हुआ, जो हार की मुख्य वजह रहा। सरूरपुर कलां, बावली, बिजरौल और जौहड़ी जैसे जाट बाहुल्य गांव में रालोद को भाजपा के सामने हार झेलनी पड़ी।
किसने क्या कहा
भाजपा जिलाध्यक्ष वेद पाल उपाध्याय का कहना है कि मतलब परस्त लोगों का गठबंधन था, जो टूटना ही था। आमजन को भी पता था कि इस गठबंधन का भविष्य क्या होगा।
रालोद जिलाध्यक्ष सुखबीर गठीना ने कहा बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। सपा के साथ अभी भी रालोद का गठबंधन है। नेतृत्व का फैसला मंजूर होगा, कार्यकर्ता दोबारा मेहनत करेंगे।
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष जो फैसला करेंगे, कार्यकर्ता उसके लिए तैयार हैं। बसपा ने अभी तक उप चुनाव अकेले लड़ने की बात कही है।
बसपा जिलाध्यक्ष जय कुमार जाटव ने कहा पार्टी का पहला मकसद भाईचारा बनाने का है। उपचुनाव में लोगों के बीच जाएंगे। नेतृत्व का फैसला मान्य होगा। बसपा के वोटर ने प्राथमिकता से गठबंधन को वोट दिया है।
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बसपा के गठबंधन से हट जाने के बाद नए सियासी समीकरण बनेंगे। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह या उपाध्यक्ष जयंत चौधरी की ओर से कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है। हालांकि रालोद और सपा नेताओं का मानना है कि बसपा भले ही गठबंधन से हट गई हो, लेकिन दोनों दलों का गठबंधन उपचुनाव और इसके बाद भी जारी रहेगी। दोनों दल उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तैयारी एक साथ करेंगे। बसपा के विकल्प के तौर पर इस गठबंधन में कांग्रेस को शामिल किया जा सकता है। रालोद और कांग्रेस की नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। बागपत और मुजफ्फरनगर सीट पर कांग्रेस ने इस बार उम्मीदवार ही नहीं उतारे थे।
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सपा नेताओं से हुई थी रालोद नेताओं की बातचीत
बागपत। लोकसभा चुनाव में गठबंधन के दौरान भी रालोद नेताओं और बसपा नेताओं की सीधे तौर पर कोई बात नहीं हुई थी। गठबंधन की शुरूआत सपा और बसपा ने की। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी से बातचीत कर तीन सीटों पर सहमति बनाई थी। शुरूआत दौर की बातचीत के अलावा गठबंधन के एलान के वक्त भी रालोद एक तरीके से अलग थलग ही रहा था।
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किसे क्या कहे रालोद, जाट वोट ही बंट गए
बागपत। बागपत लोकसभा सीट पर रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। जाट वोटों के उम्मीदों से अधिक ध्रुवीकरण हार की बड़ी वजह रहा। दलित वोटों का भी ध्रुवीकरण हुआ, लेकिन इसके बाद भी काफी दलित वोट रालोद के हिस्से में आए। इसी तरह यादव बाहुल्य क्षेत्र में भी रालोद को वोट मिलें, हालांकि यादव वोट भाजपा को भी मिले, लेकिन रालोद का बेस वोट कहे जाने वाले जाट वोटों का अधिक ध्रुवीकरण हुआ, जो हार की मुख्य वजह रहा। सरूरपुर कलां, बावली, बिजरौल और जौहड़ी जैसे जाट बाहुल्य गांव में रालोद को भाजपा के सामने हार झेलनी पड़ी।
किसने क्या कहा
भाजपा जिलाध्यक्ष वेद पाल उपाध्याय का कहना है कि मतलब परस्त लोगों का गठबंधन था, जो टूटना ही था। आमजन को भी पता था कि इस गठबंधन का भविष्य क्या होगा।
रालोद जिलाध्यक्ष सुखबीर गठीना ने कहा बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। सपा के साथ अभी भी रालोद का गठबंधन है। नेतृत्व का फैसला मंजूर होगा, कार्यकर्ता दोबारा मेहनत करेंगे।
सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष जो फैसला करेंगे, कार्यकर्ता उसके लिए तैयार हैं। बसपा ने अभी तक उप चुनाव अकेले लड़ने की बात कही है।
बसपा जिलाध्यक्ष जय कुमार जाटव ने कहा पार्टी का पहला मकसद भाईचारा बनाने का है। उपचुनाव में लोगों के बीच जाएंगे। नेतृत्व का फैसला मान्य होगा। बसपा के वोटर ने प्राथमिकता से गठबंधन को वोट दिया है।