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बंद होने लगी मिलें, कोल्हू में लुटने लगा किसान
Updated Sat, 19 May 2018 12:29 AM IST
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बंद होने लगी मिलें, कोल्हू में लुटने लगा किसान
बागपत। बकाया भुगतान की समस्या से जूझ रहे किसानों के सामने खेतों में खड़ा गन्ना मुसीबत बनने लगा है। चीनी मिलों में पेराई बंद होने को है। अब किसानों के पास कोल्हू का विकल्प बचा है, जहां गन्ने का भाव दो सौ रुपये कुंतल है। मलकपुर चीनी मिल ने पेराई बंद कर दी है, लेकिन किसानों का कहना है कि क्षेत्र में अब भी कई जगह गन्ने की फसल खड़ी हुई है।
बागपत के किसान वेस्ट यूपी की 14 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। गन्ने की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों के चेहरे अब मुरझा गए हैं। सहकारी क्षेत्र की बागपत और रमाला मिल के अलावा सिर्फ मोदीनगर चीनी मिल के तौल केंद्रों पर ही गन्ना खरीदा जा रहा है। जाहिर है कि 11 चीनी मिलों ने तौल बंद कर दिया है। किसानों का दावा है कि अभी भी सैकड़ों बीघा जमीन पर गन्ना खड़ा है। ऐसे में किसानों के पास कोल्हू के पास गन्ना डालने का विकल्प है, लेकिन यहां पर गन्ने का भाव दो सौ रुपये कुंतल के आसपास ही दिया जा रहा है। जाहिर है किसानों को आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोल्हू संचालकों का कहना है कि अगर वह इससे ज्यादा भाव पर गन्ना खरीदेंगे तो उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ेगा। यही वजह है कि कम भाव पर गन्ना खरीदा जा रहा है। कृष्णपाल, सतेंद्र और कालू आदि किसानों का कहना है कि अभी खेतों में गन्ना खड़ा है, जिसके चलते परेशानी हो रही है।
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चीनी मिलों पर 776 करोड़ बकाया
बागपत। वेस्ट यूपी की 14 चीनी मिलों पर जिले के किसानों के 776 करोड़ रुपये बकाया है। मलकपुर चीनी मिल ने पेराई सत्र समाप्त कर दिया है। अकेले मलकपुर मिल पर ही करीब 409 करोड़ रुपये बकाया है।
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इन चीनी मिलों को देते हैं गन्ना
बागपत के किसान मलकपुर, बागपत, रमाला, किनौनी, भैसाना, ऊन, दौराला, सिंभावली, मोदीनगर, ब्रजनाथपुर, नंगलामल, खतौली, गांगनौली और तितावी मिल को गन्ना सप्लाई करते हैं। वर्तमान में बागपत, रमाला और मोदीनगर मिल ही किसानों से गन्ना खरीद कर रही हैं।
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भुगतान के लिए बना रहे दबाव: डीसीओ
डीसीओ सुशील कुमार का कहना है कि चीनी मिलों पर किसानों का भुगतान दिलाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। अधिकतर गन्ने की खरीद हो चुकी है। कुछ किसानों की शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच कराई जाएगी। अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा।
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चीनी के उत्पादन में भी बागपत ने बनाया रिकॉर्ड
बागपत। जिले की तीनों मिलों ने इस बार चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन किया है, लेकिन भाव गिर जाने से चीनी मिलें भी संकट में है। अभी तक 23.18 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन किया जा चुका है, जिनमें अकेले चीनी मिल ने ही 14.22 लाख कुंतल चीनी उत्पादन किया है। जबकि पेराई सत्र 2016-17 में तीनी चीनी मिलों ने सिर्फ 18.06 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन ही किया था। पेराई सत्र 2015-16 में जिले की मिलों ने 16.09 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन किया था।
पेराई सत्र के शुरूआत में मिलों को चीनी का औसत भाव 3604 रुपये प्रति कुंतल मिल रहा था, लेकिन अब यह दाम 2541 रुपये प्रति कुंतल के आसपास है। चीनी मिलों को नुकसान होने से गन्ना भुगतान पर भी असर पड़ने की आशंका है। यही नहीं चीनी के गिरते दामों के कारण चीनी मिलों को अभी से ही अगले पेराई सत्र की चिंता भी सताने लगी है। पूर्वानुमान के मुताबिक इस बार गन्ने का रकबा बढ़ा है, जिससे वर्तमान सत्र के सापेक्ष दो गुणा गन्ना पैदा होने के आसार है, जिसकी पेराई करना चीनी मिलों के लिए आसान नहीं रहेगा।
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बागपत। बकाया भुगतान की समस्या से जूझ रहे किसानों के सामने खेतों में खड़ा गन्ना मुसीबत बनने लगा है। चीनी मिलों में पेराई बंद होने को है। अब किसानों के पास कोल्हू का विकल्प बचा है, जहां गन्ने का भाव दो सौ रुपये कुंतल है। मलकपुर चीनी मिल ने पेराई बंद कर दी है, लेकिन किसानों का कहना है कि क्षेत्र में अब भी कई जगह गन्ने की फसल खड़ी हुई है।
बागपत के किसान वेस्ट यूपी की 14 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। गन्ने की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों के चेहरे अब मुरझा गए हैं। सहकारी क्षेत्र की बागपत और रमाला मिल के अलावा सिर्फ मोदीनगर चीनी मिल के तौल केंद्रों पर ही गन्ना खरीदा जा रहा है। जाहिर है कि 11 चीनी मिलों ने तौल बंद कर दिया है। किसानों का दावा है कि अभी भी सैकड़ों बीघा जमीन पर गन्ना खड़ा है। ऐसे में किसानों के पास कोल्हू के पास गन्ना डालने का विकल्प है, लेकिन यहां पर गन्ने का भाव दो सौ रुपये कुंतल के आसपास ही दिया जा रहा है। जाहिर है किसानों को आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोल्हू संचालकों का कहना है कि अगर वह इससे ज्यादा भाव पर गन्ना खरीदेंगे तो उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ेगा। यही वजह है कि कम भाव पर गन्ना खरीदा जा रहा है। कृष्णपाल, सतेंद्र और कालू आदि किसानों का कहना है कि अभी खेतों में गन्ना खड़ा है, जिसके चलते परेशानी हो रही है।
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चीनी मिलों पर 776 करोड़ बकाया
बागपत। वेस्ट यूपी की 14 चीनी मिलों पर जिले के किसानों के 776 करोड़ रुपये बकाया है। मलकपुर चीनी मिल ने पेराई सत्र समाप्त कर दिया है। अकेले मलकपुर मिल पर ही करीब 409 करोड़ रुपये बकाया है।
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इन चीनी मिलों को देते हैं गन्ना
बागपत के किसान मलकपुर, बागपत, रमाला, किनौनी, भैसाना, ऊन, दौराला, सिंभावली, मोदीनगर, ब्रजनाथपुर, नंगलामल, खतौली, गांगनौली और तितावी मिल को गन्ना सप्लाई करते हैं। वर्तमान में बागपत, रमाला और मोदीनगर मिल ही किसानों से गन्ना खरीद कर रही हैं।
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भुगतान के लिए बना रहे दबाव: डीसीओ
डीसीओ सुशील कुमार का कहना है कि चीनी मिलों पर किसानों का भुगतान दिलाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। अधिकतर गन्ने की खरीद हो चुकी है। कुछ किसानों की शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच कराई जाएगी। अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा।
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चीनी के उत्पादन में भी बागपत ने बनाया रिकॉर्ड
बागपत। जिले की तीनों मिलों ने इस बार चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन किया है, लेकिन भाव गिर जाने से चीनी मिलें भी संकट में है। अभी तक 23.18 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन किया जा चुका है, जिनमें अकेले चीनी मिल ने ही 14.22 लाख कुंतल चीनी उत्पादन किया है। जबकि पेराई सत्र 2016-17 में तीनी चीनी मिलों ने सिर्फ 18.06 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन ही किया था। पेराई सत्र 2015-16 में जिले की मिलों ने 16.09 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन किया था।
पेराई सत्र के शुरूआत में मिलों को चीनी का औसत भाव 3604 रुपये प्रति कुंतल मिल रहा था, लेकिन अब यह दाम 2541 रुपये प्रति कुंतल के आसपास है। चीनी मिलों को नुकसान होने से गन्ना भुगतान पर भी असर पड़ने की आशंका है। यही नहीं चीनी के गिरते दामों के कारण चीनी मिलों को अभी से ही अगले पेराई सत्र की चिंता भी सताने लगी है। पूर्वानुमान के मुताबिक इस बार गन्ने का रकबा बढ़ा है, जिससे वर्तमान सत्र के सापेक्ष दो गुणा गन्ना पैदा होने के आसार है, जिसकी पेराई करना चीनी मिलों के लिए आसान नहीं रहेगा।