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आज भी गुरूकुलीय शिक्षा ही सर्वश्रेष्ठ
Updated Fri, 01 Dec 2017 01:06 AM IST
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बिनौली (बागपत)।
बरनावा स्थित ज्ञान सागर गुरुकुल में पहुंचे जैन मुनि शुभम कीर्ति महाराज बच्चों की प्रतिभा और संस्कारों को देखकर अभिभूत हुए। उन्होंने कहा आज भी गुरुकुलीय शिक्षा ही सर्वश्रेष्ठ है, जहां मानवीय मूल्यों, सेवा और संस्कारों की शिक्षा दी जाती है।
बुढ़ाना से पद विहार कर बरनावा पहुंचे जैन मुनि आचार्य देव नंदी के शिष्य शुभम कीर्ति महाराज का बड़ौत रोड पर ज्ञान सागर गुरुकुल में जैन समाज के लोगों व बच्चों ने स्वागत किया। इसके बाद गुरुकुल परिसर में धर्मसभा का आयोजन हुआ। इसमें गुरुकुल के छात्र दिव्यांश ने भगवान महावीर का गुणगान, सुमित जैन ने पिता की व्यथा, अर्पित जैन ने जीवन सुधार, पंकज जैन ने मां की ममता पर भजन, कविता और रचनाएं प्रस्तुत कीं। गुरुकुल के बच्चों की प्रतिभा और संस्कारों को देखकर जैन मुनि अभिभूत हो गए। उन्होंने कहा आज भी ऋषि मुनियों द्वारा प्रदत्त गुरुकुलीय शिक्षा सर्वश्रेष्ठ है। गुरुकुलों में मानवीय मूल्यों, धर्म, सेवा और संस्कारों की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने गरीब बेसहारा बच्चों का जीवन संवारने के पुनीत कार्य करने वाले संस्थापक ब्रहमचारी अतुल भैया को साधुवाद देकर आशीष भी प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने गुरुकुल की व्यवस्था और संचालन की भी जानकारी ली। संचालन अजित जैन ने किया। इसमें राकेश जैन, मुकेश जैन, सुनील जैन, कंवर सेन जैन, प्रमोद जैन, महिपाल जैन, गुणपालरुन, मनीत जैन, विक्की जैन, चंद्रकांत कुलश्रेष्ठ, विरेंद्र जैन, विशाल जैन आदि रहे।
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बरनावा स्थित ज्ञान सागर गुरुकुल में पहुंचे जैन मुनि शुभम कीर्ति महाराज बच्चों की प्रतिभा और संस्कारों को देखकर अभिभूत हुए। उन्होंने कहा आज भी गुरुकुलीय शिक्षा ही सर्वश्रेष्ठ है, जहां मानवीय मूल्यों, सेवा और संस्कारों की शिक्षा दी जाती है।
बुढ़ाना से पद विहार कर बरनावा पहुंचे जैन मुनि आचार्य देव नंदी के शिष्य शुभम कीर्ति महाराज का बड़ौत रोड पर ज्ञान सागर गुरुकुल में जैन समाज के लोगों व बच्चों ने स्वागत किया। इसके बाद गुरुकुल परिसर में धर्मसभा का आयोजन हुआ। इसमें गुरुकुल के छात्र दिव्यांश ने भगवान महावीर का गुणगान, सुमित जैन ने पिता की व्यथा, अर्पित जैन ने जीवन सुधार, पंकज जैन ने मां की ममता पर भजन, कविता और रचनाएं प्रस्तुत कीं। गुरुकुल के बच्चों की प्रतिभा और संस्कारों को देखकर जैन मुनि अभिभूत हो गए। उन्होंने कहा आज भी ऋषि मुनियों द्वारा प्रदत्त गुरुकुलीय शिक्षा सर्वश्रेष्ठ है। गुरुकुलों में मानवीय मूल्यों, धर्म, सेवा और संस्कारों की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने गरीब बेसहारा बच्चों का जीवन संवारने के पुनीत कार्य करने वाले संस्थापक ब्रहमचारी अतुल भैया को साधुवाद देकर आशीष भी प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने गुरुकुल की व्यवस्था और संचालन की भी जानकारी ली। संचालन अजित जैन ने किया। इसमें राकेश जैन, मुकेश जैन, सुनील जैन, कंवर सेन जैन, प्रमोद जैन, महिपाल जैन, गुणपालरुन, मनीत जैन, विक्की जैन, चंद्रकांत कुलश्रेष्ठ, विरेंद्र जैन, विशाल जैन आदि रहे।
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