{"_id":"5c4f5f5dbdec22739b069ab9","slug":"141548705629-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दर्शन लाल जैन को सम्मानित करने पर जैन समाज में खुशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दर्शन लाल जैन को सम्मानित करने पर जैन समाज में खुशी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेकड़ा (बागपत)।
हरियाणा के संघ प्रचारक प्रबुद्ध समाज सेवी दर्शन लाल जैन बाबू जी को भारत सरकार ने श्रेष्ठ नागरिक सम्मान पदम भूषण सम्मान से सम्मानित किया। इससे खेकड़ा नगर के जैन समाज में खुशी का माहौल है।
खेकड़ा नगर में आयोजित बैठक में दर्शन लाल जैन को सम्मान देने पर केन्द्र सरकार का आभार जताया । वक्ताओं ने बताया कि राष्ट्रीय सेवक संघ के प्रचारक 91 वर्षीय दर्शन लाल जैन स्वर्गीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई और स्वर्गीय बलराज मधोक के परम सहयोगी रहे हैं। वह पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक भी रहे। पीएम मोदी ने उनके साथ आठ वर्ष हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रचारक के रूप में कार्य किया। इस सम्मान से खेकड़ा जैन समाज में गर्व और खुशी की लहर व्याप्त है। बैठक में जैन समाज के प्रधान जिनेश जैन, जैन मिलन के अध्यक्ष जनेश्वर दयाल जैन, अजय जैन, राकेश जैन, श्रीयांश जैन, मनोज जैन, अंकुश जैन, नरेश कुमार जैन, राहुल जैन, महेश जैन आदि रहे।
आपात काल में जेल में रहे
दर्शन लाल जैन का जन्म 12 दिसंबर 1927 को हरियाणा के जगाधरी शहर में एक धार्मिक और उद्योगपति जैन परिवार में हुआ। लोग उन्हें बाबू जी के नाम से भी पुकारते हैं। बचपन से ही देशभक्ति की भावना के चलते वे आरएसएस के संपर्क में आएं। वह महात्मा गांधी से बहुत प्रेरित रहे और ब्रिटिश शासन के दौरान जब स्वतंत्रता सेनानी के प्रतीक के रूप में जब खादी पर प्रतिबंध था तो वे स्कूल में खादी पहनकर जाते थे। 15 साल की उम्र में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ काम करने पर उन्हें 1975. 1977 में आपात काल के दौरान जेल में रखा गया था। इस दौरान सशर्त रिहा करने के सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।
विज्ञापन
एमएलसी और राज्यपाल के पद से इंकार किया
उनका सक्रिय राजनीति में शामिल होने की ओर झुकाव कभी नहीं था और 1954 में जनसंघ द्वारा एमएलसी सुनिश्चित सीट के लिए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। बाद में उन्हें तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा राज्यपाल की पेशकश भी की गई, लेकिन उन्होंने गवर्नर का पद भी स्वीकार नहीं किया।
विज्ञापन
हरियाणा के संघ प्रचारक प्रबुद्ध समाज सेवी दर्शन लाल जैन बाबू जी को भारत सरकार ने श्रेष्ठ नागरिक सम्मान पदम भूषण सम्मान से सम्मानित किया। इससे खेकड़ा नगर के जैन समाज में खुशी का माहौल है।
खेकड़ा नगर में आयोजित बैठक में दर्शन लाल जैन को सम्मान देने पर केन्द्र सरकार का आभार जताया । वक्ताओं ने बताया कि राष्ट्रीय सेवक संघ के प्रचारक 91 वर्षीय दर्शन लाल जैन स्वर्गीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई और स्वर्गीय बलराज मधोक के परम सहयोगी रहे हैं। वह पीएम नरेंद्र मोदी के राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक भी रहे। पीएम मोदी ने उनके साथ आठ वर्ष हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रचारक के रूप में कार्य किया। इस सम्मान से खेकड़ा जैन समाज में गर्व और खुशी की लहर व्याप्त है। बैठक में जैन समाज के प्रधान जिनेश जैन, जैन मिलन के अध्यक्ष जनेश्वर दयाल जैन, अजय जैन, राकेश जैन, श्रीयांश जैन, मनोज जैन, अंकुश जैन, नरेश कुमार जैन, राहुल जैन, महेश जैन आदि रहे।
विज्ञापन
आपात काल में जेल में रहे
दर्शन लाल जैन का जन्म 12 दिसंबर 1927 को हरियाणा के जगाधरी शहर में एक धार्मिक और उद्योगपति जैन परिवार में हुआ। लोग उन्हें बाबू जी के नाम से भी पुकारते हैं। बचपन से ही देशभक्ति की भावना के चलते वे आरएसएस के संपर्क में आएं। वह महात्मा गांधी से बहुत प्रेरित रहे और ब्रिटिश शासन के दौरान जब स्वतंत्रता सेनानी के प्रतीक के रूप में जब खादी पर प्रतिबंध था तो वे स्कूल में खादी पहनकर जाते थे। 15 साल की उम्र में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ काम करने पर उन्हें 1975. 1977 में आपात काल के दौरान जेल में रखा गया था। इस दौरान सशर्त रिहा करने के सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।
विज्ञापन
एमएलसी और राज्यपाल के पद से इंकार किया
उनका सक्रिय राजनीति में शामिल होने की ओर झुकाव कभी नहीं था और 1954 में जनसंघ द्वारा एमएलसी सुनिश्चित सीट के लिए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। बाद में उन्हें तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा राज्यपाल की पेशकश भी की गई, लेकिन उन्होंने गवर्नर का पद भी स्वीकार नहीं किया।